खबर फिली – चाहता था लोग मेरे पैरों को देखें, चेहरे के रंग को नहीं…फिल्म इंडस्ट्री में मिथुन को झेलना पड़ा इतना कुछ – #iNA @INA

भारतीय सिनेमा में योगदान के लिए दिग्गज अभिनेता मिथुन चक्रवर्ती को मंगलवार को दादासाहेब फाल्के पुरस्कार से नवाजा गया. विज्ञान भवन में आयोजित 70वें नेशनल फिल्म अवॉर्ड्स समारोह के साथ ही राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उन्हें ये सम्मान दिया. इस दौरान वहां कार्यक्रम में भारतीय सिनेमा के तमाम बड़े सितारे मौजूद रहे. इस बड़े मौके पर मिथुन चक्रवर्ती ने अपनी जिंदगी से जुड़ी कई अहम बातें वहां शेयर कीं.

मिथुन चक्रवर्ती ने इस दौरान बताया कि फिल्म इंडस्ट्री में त्वचा के रंग की वजह से उन्हें कितनी मुश्किलों का सामना करना पड़ा. उन्होंने कहा, “मुझसे कहा गया था ‘फिल्म इंडस्ट्री में काला रंग नहीं चलेगा’. जितना अपमान हो सकता था, हुआ.” हालांकि तमाम मुश्किलातों के बावजूद मिथुन ने फिल्म इंडस्ट्री में अपनी खास जगह बनाई. उन्होंने अपने डांस को अपनी ताकत बनाया.

पैरों से किया कमाल

मिथुन चक्रवर्ती ने कहा, “फिर मैंने फैसला किया कि मैं डांस करूंगा. मैं चाहता था कि लोग मेरे पैरों को देखें ना कि मेरे चेहरे को या मेरी त्वचा के रंग को. सब फिल्मों में पैरों से डांस किया और लोग मेरे रंग को भूल गए.” इस मौके पर उन्होंने नए टैलेंट को संदेश दिया और अपने उस यकीन को भी बयां किया जिसके ज़रिए उन्होंने इंडस्ट्री में अपनी जगह बनाई. उन्होंने कहा, “अगर ये मैं कर सकता हूं तो कोई भी कर सकता है.”

आ गया था अहंकार

इस दौरान मिथुन चक्रवर्ती ने खुलासा किया कि जब उन्हें कामयाबी मिली तो उनके अंदर एक तरह का अहंकार आ गया था. उन्होंने कहा कि हालांकि मुझे कुछ वक्त में ही समझ आ गया था कि ऐसा व्यवहार मुझे मिलने वाले मौके को खत्म कर सकता है. इस एहसास ने ही उन्हें विनम्र बनाए रखा और जमीन से जोड़े रखा. इस दौरान उन्होंने अपनी लाइफ का मंत्रा भी शेयर किया. मिथुन ने कहा, “खुद सो जाना लेकिन अपने सपनो को मत सोने देना.”


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