खबर शहर , स्मृति शेष : तुलसीघाट की रामलीला में राम बनते थे प्रो. कौशल किशोर, फेसबुक पर किया था पोस्ट; सबको राम-राम – INA

एकाएक तबीयत बिगड़ गई, सबको राम-राम। बीएचयू राजनीति विज्ञान विभाग के पूर्व अध्यक्ष और सामाजिक विज्ञान संकाय के पूर्व डीन प्रो. कौशल किशोर मिश्र ने अपने फेसबुक वाल पर 27 सितंबर को जैसे ही इस मैसेज को पेस्ट किया। उनके शुभचिंतकों ने फोन कर कुशलक्षेम पूछना शुरू कर दिया। जब उनके निधन की खबर आई तो लोग स्तब्ध रह गए।

तुलसीघाट पर होने वाली रामलीला में वह प्रभुश्री राम की भूमिका में नजर आते थे। हर साल रामलीला में उनके अतुलनीय योगदान को भुलाया नहीं जा सकता। रामलीला के दौरान मानस की चौपाइयों का भी वाचन करते थे। इसके अलावा विश्वविद्यालय में रहने और सेवानिवृत्ति के बाद भी वह लोगों को प्रकृति से जुड़े रहने के लिए प्रेरित किया करते थे। राजनीतिक विशेषज्ञ होने के साथ ही समाजिक, धार्मिक कार्यों में भी बढ़ चढ़कर भागीदारी करते थे।


14 दिन तक बीएचयू में चला इलाज, आईसीयू में ली अंतिम सांस
मूल रूप से देवरिया जिले के बनकटा मिश्र गांव निवासी प्रो. कौशल किशोर मिश्र (67) की 27 सितंबर को तबीयत बिगड़ने के बाद उनका इलाज बीएचयू अस्पताल के आईसीयू में चल रहा था। गुरुवार की सुबह सवा 8 बजे उनके निधन की खबर मिलते ही उनके शुभचिंतक नगवां स्थित आवास पर पहुंचने लगे। हरिश्चंद्र घाट पर उनका अंतिम संस्कार किया गया, जहां उनके बेटे कृतार्थ मिश्रा ने मुखाग्नि दी।

100 से अधिक शोध छात्र, 50 से अधिक पुस्तकें
बीएचयू न्यूरोलॉजी विभाग के अध्यक्ष प्रो. विजय नाथ मिश्र ने बताया कि प्रो. कौशल किशोर ने 50 से अधिक पुस्तकें लिखी हैं, इसमें मनुस्मृति प्रमुख है। 100 से अधिक छात्रों को शोध भी करवाया है। वह बीएचयू शिक्षक संघ के अध्यक्ष और महामंत्री भी रहे। शिक्षा जगत से जुड़े विभिन्न सम्मानों के साथ ही उनको काशी रत्न सम्मान से भी नवाजा गया था।

शिक्षाविदों, समाजसेवियों, राजनेताओं ने दी श्रद्धांजलि
प्रो. कौशल किशोर मिश्र के निधन पर राजस्थान के पूर्व राज्यपाल कलराज मिश्र ने दुख प्रकट किया। राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डाॅ. दयाशंकर मिश्र दयालु ने कहा कि प्रो. मिश्र बनारसी मिजाज को जीने वाले खांटी बनारसी थे। भाजपा क्षेत्रीय अध्यक्ष दिलीप पटेल, मेयर अशोक तिवारी, विधायक डॉ. नीलकंठ तिवारी, विधायक सौरभ श्रीवास्तव आदि नेताओं ने श्रद्धांजलि दी। राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ की ओर से शोकसभा आयोजित की गई।

बंद रही पप्पू की अड़ी, याद किए गए मुन्ना भैया
घर-परिवार से लेकर काॅलोनीवासी और शुभचिंतक प्रो. कौशल किशोर को मुन्ना भैया के नाम से जानते थे। उनके निधन पर अस्सी स्थित पप्पू की अड़ी गुरुवार को बंद रही। उनके घर से शव को लेकर हरिश्चंद्रघाट जाते समय रास्ते में लोगों ने पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी।


यम भी हार गए, मुन्ना भैया की जिजीविषा के .
बीएचयू न्यूरोलॉजी विभाग के अध्यक्ष प्रो. विजयनाथ मिश्रा ने अपने फेसबुक वाल पर प्रो. कौशल किशोर मिश्र के निधन पर लिखा कि यम भी हार गये, मुन्ना भैया के जिजीविषा के .। वह आईसीयू में जिंदा रहने के लिए पूरा संघर्ष करते रहे। पिछले एक सप्ताह में लगभग हर दिन ऐसी स्थिति आई, जिसमें, एक चिकित्सक होने के नाते मुझे और मेरे साथी चिकित्सकों को आशा विहीन हो जाना पड़ता था।

कारण था कि फेफड़े का संक्रमण। इस वजह से वह ऑक्सीजन नहीं ले पा रहे थे। यहां तक कि वेंटिलेटर पर होने के बावजूद, ऑक्सीजन लेवल 60 प्रतिशत तक पहुंच गया। उनकी किडनी, हृदय सभी ठीक से काम कर रहे थे। इलाज के दौरान लंग बाईपास मशीन (ईक्मो) के प्रयोग की सलाह दी गई।

इस पर ट्रामा सेंटर प्रभारी प्रो. सौरभ सिंह, डिप्टी एमएस प्रो. राजेश मीना की पहल पर बीएचयू अस्पताल में इक्मो मशीन आई। इस पर वह एक दिन ठीक थे लेकिन फेफड़े में संक्रमण अधिक रहा। अंतत: वह 8 दिन तक यम को हराते रहे और बृहस्पतिवार सुबह हार गए।

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Credit By Amar Ujala

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