यूपी – जलवायु परिवर्तन का नया खतरा: सबसे ज्यादा बनारसियों की उड़ी है नींद, स्वास्थ्य और कार्यक्षमता पर पड़ रहा प्रभाव – INA

उत्तर प्रदेश में नींद खोने के मामले में वाराणसी (बनारस) के लोग सबसे . हैं। यहां के लोगों की हर साल औसतन 73 घंटे नींद कम हो रही है, जबकि 72 घंटे की कटौती के साथ प्रयागराज दूसरे तो 71 घंटे की कटौती के साथ गोरखपुर तीसरे स्थान पर है। हर साल नींद के घंटों में हो रही कमी की वजह जलवायु परिवर्तन है। इससे स्वास्थ्य एवं कार्य क्षमता प्रभावित हो रही है। यह खुलासा हुआ है वैश्विक शोध संस्था क्लाइमेट सेंट्रल के अध्ययन में।
जलवायु परिवर्तन अब केवल मौसम का विषय नहीं रह गया, बल्कि यह लोगों की नींद, स्वास्थ्य और कार्यक्षमता को प्रभावित कर रहा है। क्लाइमेट सेंट्रल की ओर से भारत सहित दुनिया के 1,338 शहरों का अध्ययन किया गया। रिपोर्ट के मुताबिक देश में पुडुचेरी के लोग वर्षभर में औसतन 92 घंटे की नींद खो रहे हैं।
मुंबई में 84 घंटे, कोलकाता में 80 घंटे और दिल्ली में 66 घंटे औसतन नींद में कमी आई है। उत्तर प्रदेश के शहरों में रहने वाले लोग हर साल औसतन 69 घंटे की नींद खो रहे हैं। अध्यन में शामिल 10 शहरों में शोधकर्ताओं ने 2020 से 2025 के बीच के आंकड़ों का विश्लेषण किया है। इसमें नींद खोने के मामले में वाराणसी का ग्राफ सबसे अधिक मिला है।
| शहर | प्रतिवर्ष नींद कमी के घंटे |
| मेरठ | 65 |
| मुरादाबाद | 66 |
| बरेली | 67 |
| आगरा | 69 |
| अलीगढ़ | 68 |
| कानपुर | 70 |
| लखनऊ | 70 |
| गोरखपुर | 71 |
| प्रयागराज | 72 |
| वाराणसी | 73 |