यूपी – High Court : पहली पत्नी के रहते दूसरी शादी करने वाला हर व्यक्ति ‘पति’ नहीं माना जाएगा – INA

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि पहली शादी वैध होने पर दूसरी कानूनन शून्य है तो ऐसे व्यक्ति को दूसरी महिला के संबंध में बीएनएस के तहत धारा 80 (दहेज हत्या) व धारा 85 (क्रूरता) के मामले में ‘पति’ नहीं माना जाएगा। हालांकि, यदि पहली शादी को लेकर विवाद या संदेह हो या व्यक्ति ने अपनी पहली शादी की जानकारी छिपाकर दूसरी महिला के साथ वैवाहिक जीवन बिताया तो उसे कानून की नजर में पति माना जा सकता है। यह आदेश न्यायमूर्ति अरुण कुमार सिंह देशवाल की एकल पीठ ने दिया है।
पीलीभीत के माधोटांडा थाने में याची सर्वेश के खिलाफ दहेज हत्या व क्रूरता के आरोप में प्राथमिकी दर्ज है। उसने हाईकोर्ट में जमानत के लिए अर्जी दायर की। याची अधिवक्ता ने दलील दी कि मृतका उसकी दूसरी पत्नी थी और पहली पत्नी विवाह के समय जीवित थी। इसलिए दूसरी शादी शून्य होने के कारण वह बीएनएस की संबंधित धाराओं के तहत ‘पति’ की श्रेणी में नहीं आता।
हाईकोर्ट ने पक्षों को सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट के पूर्व फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि वैध विवाह के अभाव में दूसरी शादी करने वाले व्यक्ति को सामान्य परिस्थितियों में बीएनएस की धारा 80 और 85 के तहत ‘पति’ नहीं माना जा सकता।
हालांकि, कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि दूसरी महिला को पहली शादी की जानकारी नहीं थी। व्यक्ति ने अपनी वैध पत्नी को छिपाकर उसके साथ पति के रूप में जीवन बिताया तो वह अपने गलत आचरण का लाभ नहीं उठा सकता। ऐसी स्थिति में उसे धारा-80 और 85 के लिए ‘पति’ माना जाएगा। कानूनी मुद्दे पर फैसला सुनाने के बाद हाईकोर्ट ने आरोपी सर्वेश को जमानत भी मंजूर कर दी।