खबर शहर , UP: डॉल्फिन-घड़ियाल की सुरक्षा के लिए एआई तकनीक, चंबल में लगेंगे हाईमास्ट कैमरे; अवैध खनन पर भी रहेगी नजर – INA

घड़ियाल, कछुओं, डॉल्फिन और मगरमच्छ का घर चंबल सेंक्चुअरी में रेत के अवैध खनन पर नियंत्रण और निगरानी के लिए हाईमास्ट एआई कैमरे लगाए जाएंगे। सेंट्रल इंपावर्ड कमेटी की सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की गई रिपोर्ट में यूपी, एमपी और राजस्थान सरकार ने अपने-अपने क्षेत्रों में कैमरों को लगाने का ब्योरा दिया है। आगरा सीमा में सात कैमरे सेंक्चुअरी और तीन रूट पर पीटीजेड कैमरे लगाए जाएंगे।

सीईसी की रिपोर्ट में एनएचएआई ने कहा है कि राजघाट पर चंबल नदी से होने वाले खनन को रोकने के लिए पुल पर सीसीटीवी से निगरानी का काम शुरू हो चुका है। आठ सीसीटीवी कैमरे लगाए जा रहे हैं। राजस्थान और मध्य प्रदेश दोनों तरफ से पुल तक पहुंचने वाले रास्तों के साथ नदी के ऊपरी और निचले हिस्सों को कवर करने के लिए हाई रिज़ॉल्यूशन वाले पीटीजेड कैमरे लगाए जाएंगे। इसमें स्वचालित नंबर प्लेट पहचान (एएनपीआर) शामिल होगा। पुल के एक किलोमीटर ऊपर और पांच सौ मीटर नीचे तक निगरानी होगी। इसका विवरण जिला प्रशासन, वन विभाग और पुलिस अधिकारियों से साझा किया जाएगा। राजघाट पर एक हाई मास्ट एआई-आधारित थर्मल इमेजिंग कैमरा लगाकर रात में भी निगरानी की जाएगी। रिपोर्ट में यूपी सरकार ने कहा है कि कमांड सेंटर का निर्माण अब तक नहीं हो सका है।

खनन से पुल को नहीं हुआ कोई नुकसान

सीईसी के सदस्य सचिव की रिपोर्ट में कहा गया है कि चंबल नदी पर बने पुल को खनन से कोई नुकसान नहीं हुआ है। मोबाइल ब्रिज इंस्पेक्शन यूनिट (एमबीआईयू) के परीक्षण में नदी से हुआ कटाव डिजाइन सीमा के अंदर है। नींव में कोई असामान्य क्षति, धंसाव या झुकाव नहीं देखा गया है और पुल मौजूदा यातायात के लिए सुरक्षित है। हाईवे के गश्ती दल को पुल के एक किलोमीटर ऊपर और पांच सौ मीटर नीचे की ओर किसी भी अनधिकृत खुदाई की तत्काल सूचना संबंधित अधिकारियों को देने का निर्देश दिया है।

एनएचएआई ने रिपोर्ट में कहा है कि चंबल पुल के किनारे कचरा नदी में जाने से रोकने के लिए सुरक्षा जाल लगाया गया है। पुराने जाल के टूटे हिस्सों की मरम्मत के लिए 24.41 लाख रुपये खर्च किए जा रहे हैं। सीईसी ने चंबल नदी के पुल से अनाज, प्लास्टिक की बोतलें, खाद्य पैकेट और अन्य सामग्री फेंकने के फोटो रिपोर्ट में लगाए थे। इससे जलीय जीवों को खतरा पहुंच रहा था।

जल प्रवाह का अध्ययन करेगा जलविज्ञान संस्थान

चंबल सेंक्चुअरी क्षेत्र में आगरा की सीमा में पिनाहट में लिफ्ट सिंचाई व्यवस्था है। राज्य सरकार ने कहा है कि नदी प्रवाह पर पारिस्थितिक प्रभावों का अब तक आकलन नहीं किया गया है और पर्यावरणीय प्रवाह को बनाए रखने के लिए कोई विशिष्ट उपाय तैयार नहीं किए गए हैं। हालांकि, चंबल नदी में पर्यावरणीय प्रवाह का आकलन करने के लिए राष्ट्रीय जल विज्ञान संस्थान को एक वैज्ञानिक अध्ययन करने की अनुमति दी गई है।


Credit By Amar Ujala

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