यूपी – High Court : गंभीर मामलों में हिरासत में पूछताछ जरूरी, हत्या के मामले में आरोपी बुआ और फूफा को नहीं मिली जमानत – INA

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि गंभीर अपराधों की निष्पक्ष जांच के लिए कई मामलों में आरोपियों से हिरासत में पूछताछ आवश्यक होती है। इस टिप्पणी संग न्यायमूर्ति विवेक कुमार सिंह की एकल पीठ ने आगरा निवासी युवती की हत्या के मामले में बुआ और फूफा को अग्रिम जमानत देने से इन्कार कर दिया। मालपुरा थाने में युवती के मित्र ने एफआईआर दर्ज कराई थी। उसका कहना था कि युवती ने मौत से एक दिन पहले उसे एक 29 सेकंड का वीडियो भेजकर अपने परिजनों से जान का खतरा बताया था। बाद में उसका शव यमुना नदी में मिला। मामले के आरोपी मृतका के बुआ और फूफा ने अग्रिम जमानत अर्जी दायर की है।


याची के अधिवक्ता ने दलील दी कि उन्हें केवल संदेह के आधार पर फंसाया गया है। वीडियो की प्रामाणिकता भी अभी प्रमाणित नहीं हुई है। रिश्तेदार होने के चलते उन्हें झूठा फंसाया गया है। राज्य सरकार ने इसका विरोध कर किया। कहा कि दोनों आरोपी जांच में सहयोग नहीं कर रहे हैं। उनके विरुद्ध गैर-जमानती वारंट जारी किए जा चुके हैं। अग्रिम जमानत मिलने पर साक्ष्यों से छेड़छाड़ और जांच प्रभावित होने की आशंका है।

हाईकोर्ट ने अपने आदेश में सर्वोच्च न्यायालय के विभिन्न निर्णयों का उल्लेख किया। कहा कि अग्रिम जमानत एक असाधारण विवेकाधीन राहत है। कोर्ट ने माना कि जब आरोपी जांच में सहयोग नहीं कर रहा हो। उसके विरुद्ध गैर-जमानती वारंट जारी हो चुका हो और अपराध गंभीर प्रकृति का हो तो ऐसे में अग्रिम जमानत देने में सावधानी बरती जानी चाहिए। 


Credit By Amar Ujala

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