सीजी- Dhamtari: आवारा श्वानों पर नियंत्रण का अभियान तेज, एबीसी अभियान के तहत 947 की नसबंदी, रेबीज रोकथाम पर भी जोर – INA

सुप्रीम कोर्ट और भारत सरकार के एनिमल वेलफेयर बोर्ड ऑफ इंडिया के दिशा-निर्देशों के अनुरूप नगर निगम धमतरी द्वारा आवारा श्वानों की आबादी के वैज्ञानिक एवं मानवीय नियंत्रण के लिए एनिमल बर्थ कंट्रोल कार्यक्रम संचालित किया जा रहा है।
नगर निगम के अनुसार यह अभियान 22 अप्रैल 2026 से शुरू किया गया है। इसके तहत प्रशिक्षित पशु चिकित्सकों की टीम निर्धारित मानकों के अनुसार आवारा श्वानों का स्वास्थ्य परीक्षण, नसबंदी, आवश्यक टीकाकरण तथा ऑपरेशन के बाद उनकी देखभाल सुनिश्चित कर रही है। अभियान का उद्देश्य श्वानों के प्रति मानवीय व्यवहार बनाए रखते हुए उनकी अनियंत्रित संख्या पर प्रभावी नियंत्रण करना है। नगर निगम की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक 22 अप्रैल से 31 जुलाई 2026 के बीच कुल 947 आवारा श्वानों की सफलतापूर्वक नसबंदी की गई। इनमें 573 नर और 374 मादा श्वान शामिल हैं।
कार्य की गुणवत्ता, पारदर्शिता और निर्धारित मानकों के पालन की पुष्टि के लिए 4 अगस्त 2026 को एनिमल वेलफेयर बोर्ड ऑफ इंडिया की गाइडलाइन के अनुसार गठित ऑर्गन काउंटिंग कमेटी ने ऑपरेशन से जुड़े रिकॉर्ड और प्रक्रियाओं का भौतिक सत्यापन किया। समिति ने निर्धारित मानकों के अनुरूप दस्तावेजों और ऑपरेशन संबंधी कार्यों की जांच की।
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जिला प्रशासन का कहना है कि एबीसी कार्यक्रम से न केवल आवारा श्वानों की संख्या को वैज्ञानिक एवं मानवीय तरीके से नियंत्रित करने में मदद मिलेगी, बल्कि रेबीज जैसी बीमारियों की रोकथाम, नागरिकों की सुरक्षा और मानव-पशु सहअस्तित्व को भी बढ़ावा मिलेगा। अभियान को आगामी समय में भी चरणबद्ध और सतत रूप से जारी रखा जाएगा।
कलेक्टर अबिनाश मिश्रा ने कहा कि उच्चतम न्यायालय और एनिमल वेलफेयर बोर्ड ऑफ इंडिया के दिशा-निर्देशों के अनुरूप एबीसी कार्यक्रम का उद्देश्य किसी भी पशु को नुकसान पहुंचाना नहीं, बल्कि वैज्ञानिक, मानवीय और टिकाऊ तरीके से आवारा श्वानों की संख्या नियंत्रित करना है। उन्होंने कहा कि इससे नागरिकों की सुरक्षा, जनस्वास्थ्य और पशु कल्याण तीनों को समान रूप से लाभ मिलता है। अभियान की गुणवत्ता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए नियमित सत्यापन भी कराया जा रहा है।