रिश्वत न मिलने पर जीवित सात बुजुर्गों को सत्यापन रिपोर्ट में मृत दिखाने वाले लेखपाल के खिलाफ विभागीय जांच बैठ गई है। बसई मुस्तकिल क्षेत्र का चार्ज हटाने के साथ ही उसे आरके (रजिस्ट्रार अभिलेखागार) कार्यालय से संबद्ध कर दिया गया है। पीड़ित सातों बुजुर्गों की पेंशन भी नहीं रुकेगी।
सदर तहसील के लेखपाल सत्यदीप ने वृद्धावस्था पेंशन के वार्षिक सत्यापन में भ्रष्टाचार की सारी हदें पार कर दी थीं। उसने सत्यापन के लिए सूची जनसेवा केंद्र (सीएससी) संचालक को दे दी थी। सीएससी संचालक ने लाभार्थियों से लेखपाल के नाम पर 200 रुपये रिश्वत की मांग की थी। रिश्वत न देने वाले सात बुजुर्गों को मृत घोषित कर दिया था। लेखपाल ने सत्यापन रिपोर्ट समाज कल्याण विभाग को भेज दी थी।
संवाद न्यूज एजेंसी की पड़ताल में सामने आया था कि सातों बुजुर्ग जीवित हैं। रिश्वत न देने के कारण गलत रिपोर्ट लगाकर उन्हें कागजों में मृत घोषित कर दिया गया। 14 अगस्त के अंक में रिश्वत नहीं मिली तो सात बुजुर्गों को ओढ़ा दिया कागजी कफन शीर्षक से अमर उजाला में खबर प्रकाशित हुई तो खलबली मच गई।