Sport : क्या खत्म हो रहा है 5 दिनों का सब्र? आंकड़ों में देखें टेस्ट क्रिकेट का बदलता मिजाज #INA

Test Cricket: टेस्ट क्रिकेट में लगातार बदलाव देखने को मिल रहा है. टेस्ट क्रिकेट को खेल का सबसे पारंपरिक और वास्तविक रूप माना जाता है. पांच दिनों तक चलने वाली टेस्ट मैचों में खिलाड़ियों के धैर्य, तकनीक और मानसिक मजबूती की परख होती है. लेकिन आधुनिक दौर में टेस्ट क्रिकेट का यह स्वरूप तेजी से बदल रहा है. हाल ही में एक आंकड़ा सामने आया है, जिसे देख साफ पता चलता है कि समय के साथ टेस्ट मैचों की समय लगातार छोटी होती जा रही है और पांच दिनों तक चलने वाले मैचों की संख्या में भारी गिरावट आई है.
1970 के दशक से लगातार कम हो रहा टेस्ट मैच का समय
1970 के दशक से लेकर 2020 के दशक तक के आंकड़ों पर नजर डालें, तो टेस्ट मैचों के खत्म होने के पैटर्न में एक बड़ा बदलाव देखने को मिलता है. पहले मैच का रिजल्ट 2 या 3 दिन में आना लगभग नामुमकिन होता था. बहुत ही कम होता था कि मैच का नतीजा चौथे दिन निकल आए, लेकिन आज के दौर में 3, या 4 दिन में टेस्ट मैच खत्म हो जाता है.
पांचवें दिन तक नहीं पहुंच रहे मैच: 1970 के दशक में 77.65% मैच पूरे 5 दिनों तक चलते थे. जबकि 2020 के दशक में यह आंकड़ा घटकर मात्र 41.43% रह गया है. यानी अब आधे से भी कम मैच पांचवें दिन तक पहुंच पाते हैं.
चार दिनों में टेस्ट मैच का हो रहा फैसला: पहले चार दिनों में खत्म होने वाले मैच लगभग 19.55% थे, जो आज बढ़कर 35.46% हो चुके हैं.
तीन और दो दिनों का बढ़ता चलन: 1970 के दशक में सिर्फ 2.79% मैच तीन दिनों में खत्म होते थे, जो आज बढ़कर 20.32% हो गए हैं. वहीं, अब 2.79% मैच तो महज दो दिनों के भीतर ही समाप्त हो जाते हैं.
Test matches length decade wise. pic.twitter.com/JxOfN6gaOX
— Mufaddal Vohra (@mufaddal_vohra) August 29, 2026
T20 क्रिकेट ने बदला टेस्ट मैच का पहचान
टेस्ट क्रिकेट के इस बदलते ट्रेंड के पीछे कई महत्वपूर्ण चीजे जिम्मेदार हैं. आईपीएल और टी20 फॉर्मेट के आने से बल्लेबाजों की खेलने की शैली बदल गई है. अब खिलाड़ी क्रीज पर समय बिताने के बजाय पहले ही गेंद से बड़े-बड़े शॉट खेलते हैं और तेजी से रन बनाने को देखते हैं. इस चक्कर में रन तो जल्दी बनते हैं, लेकिन विकेट भी उतनी ही तेजी से गिरते हैं.
टेस्ट में अब टीमें चाहती हैं रिजल्ट
आधुनिक क्रिकेट में अब टीमों टेस्ट मैच ड्रॉ के लिए नहीं खेलती हैं. टीम चाहते है कि हर मैच का रिजल्ट निकले, क्योंकि अब वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप (WTC) के आने के बाद हर मैच टेस्ट के अंक महत्वपूर्ण हो गए हैं, जिससे टीमें जीत दर्ज करने के लिए अधिक जोखिम उठाती हैं और आक्रामक रणनीति अपनाती हैं.
गेंदबाजों की मददगार पिचें: पिछले कुछ सालों में दुनिया भर में ऐसी पिचें तैयार करने का चलन बढ़ा है जो शुरू से ही गेंदबाजों को मदद करती हैं. ऐसी पिचों पर तकनीक की कमी के कारण बल्लेबाज टिक नहीं पाते और पूरी टीम जल्दी आउट हो जाती है.
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क्या खत्म हो रहा है 5 दिनों का सब्र? आंकड़ों में देखें टेस्ट क्रिकेट का बदलता मिजाज
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