Technology, एआई फ्रॉड से बचाएंगे स्मार्टफोन्स के ये फीचर्स: गूगल-एपल ने दिए कई सेफ्टी टूल्स, कौन हैं और कैसे करेंगे काम? – Google, Apple Safety Features, Smartphone Tools Protect Against Ai Scams — INA

सार
एआई के बढ़ते इस्तेमाल के साथ ऑनलाइन फ्रॉड के तरीके भी लगातार बदल रहे हैं, लेकिन बहुत से लोगों को यह जानकारी नहीं होती कि गूगल और एपल के स्मार्टफोन्स में ऐसे कई सेफ्टी फीचर्स मौजूद हैं, जो यूजर को संदिग्ध कॉल, मैसेज और लिंक से बचाने में मदद कर सकते हैं। तो क्या आपके फोन में भी ऐसे फीचर्स मौजूद हैं? आइए जानते हैं इनसे जुड़ी पूरी जानकारी।

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस ने जहां एक तरफ हमारे रोज के कामों को आसान किया है, वहीं इसके खतरे भी बढ़ते जा रहे हैं। साइबर अपराधी और फ्रॉड करने वाले भी अब एआई का सहारा ले रहे हैं। साइबर सिक्योरिटी फर्म वेक्ट्रा की रिपोर्ट के अनुसार, 2025 में एआई की मदद से होने वाले फ्रॉड में 1,210 प्रतिशत की बढ़ाेतरी दर्ज की गई है।
चूंकि ज्यादा ऑनलाइन स्कैम और साइबर ठगी मोबाइल फोन के जरिए होती है, इसलिए गूगल और एपल ने अपने ऑपरेटिंग सिस्टम में कई ऐसे स्मार्ट सेफ्टी फीचर्स दिए हैं, जो कई तरह के फ्रॉड से बचा सकते हैं। इनमें से कई फीचर्स सीधे ऑन-डिवाइस एआई तकनीक का इस्तेमाल करके आपको रियल-टाइम में अलर्ट करते हैं।आइए जानते हैं कैसे…
एंड्रॉयड में कौन-कौन से सिक्योरिटी फीचर्स हैं?
1. फेक कॉल डिटेक्शन
- इसमें सबसे पहले नंबर पर आता है, फेक कॉल डिटेक्शन फीचर। इसमें अगर कोई कॉल किसी सेव किए गए नंबर से आती है, लेकिन कॉल करने वाला असली व्यक्ति नहीं है, तो यह फीचर चेतावनी देता है। कॉल फॉरवर्डिंग जैसी स्थितियों में भी यह संदिग्ध कॉल्स की पहचान करने में मदद करता है।
- यह फीचर आपको एंड्रॉयड 12 या उसके बाद के वर्जन पर गूगल फोन एप वाले डिवाइसेज में मिलता है और डिफॉल्ट तौर पर ऑन रहता है। इसे आप फोन एप के सेटिंग्स में जाकन कॉलर आईडी एंड स्पैम में ऑन कर सकते हैं।
2. स्कैम डिटेक्शन
- कॉल के दौरान अगर कोई संदिग्ध स्थिति होती है और सामने वाला आपसे निजी जानकारी शेयर करने के लिए कहता है, तो यह फीचर चेतावनी दे सकता है।
- यह सुविधा गूगल पिक्सल 9 और उसके बाद के नए मॉडल्स में यूजर्स को मिलती है। इसके अलावा सैमसंग S26 और दूसरे फ्लैगशिप फोन्स में भी यह फीचर दिया गया है।
- यह फीचर आपको फोन एप के सेटिंग्स में जानें पर स्कैम डिटेक्शन के नाम से मिल सकता है।
3. वर्चुअल असिस्टेंट संभालेगा कॉल
- अगर किसी अंजान नंबर से कॉल आती है, तो कुछ डिवाइसेज में कॉल स्क्रीन या कॉल असिस्ट का विकल्प मिलता है। इसे चुनने पर एक वर्चुअल असिस्टेंट आपकी जगह कॉल को हैंडल कर सकता है।
- कॉल खत्म होने के बाद यूजर उसका ट्रांसक्रिप्ट या रिकॉर्डिंग भी देख सकता है। यह सुविधा चुनिंदा गूगल और सैमसंग डिवाइसेज में उपलब्ध है।
4. मैसेज में मिलेगी स्कैम वॉर्निंग
- गूगल मैसेजेंस संदिग्ध मैसेज की पहचान कर सकता है। ऐसे मैसेज के ऊपर लाइकली ए स्कैम की चेतावनी दिखाई जाती है, जिससे यूजर को पता चल सके कि मैसेज संदिग्ध हो सकता है।
- इस फीचर को इस्तेमाल करने के लिए आपको मैसेज सेटिंग्स में जाकर प्रोटेक्शन एंड सेफ्टी पर टैप करना होगा। इसके बाद स्पैम प्रोटेक्शन में जाकर इसे ऑन किया जा सकता है।
5. दूसरे एप्स से ओटीपी रहेगा सुरक्षित
- एंड्रॉयड 17 में वेबओटीपी और एसएमएस और एसएमएस रिट्रीवर जैसे फीचर्स की मदद से अनऑथराइज्ड एप्स से ओटीपी को सुरक्षित रखा जा सकता है।
- मैसेज में आए ओटीपी को पहचानने के बाद सिस्टम उसे ऐसे एप्स से तीन घंटे तक छिपाकर रख सकता है। इससे किसी संदिग्ध या अनधिकृत एप के जरिए ओटीपी तक पहुंचने का खतरा कम किया जा सकता है।
आईफोन यूजर्स के लिए कौन-से फीचर्स मौजूद है?
आईफोन यूजर्स को भी कई स्कैम डिटेक्शन फीचर्स मिलते हैं, जो इस प्रकार है…
1. अनजान कॉल्स की स्क्रीनिंग
- आईफोन अनजान नंबर से आने वाली कॉल को खुद स्क्रीन कर सकता है। फोन कॉल का जवाब देकर कॉलर से उसका नाम और कॉल करने की वजह पूछ सकता है। इसके बाद यूजर तय कर सकता है कि कॉल उठानी है या नहीं।
- इस फीचर का इस्तेमाल करने के लिए आपको सबसे पहले अपने फोन की सेटिंग्स में जाना होगा। इसके बाद एप्स सेक्शन में जाकर फोन एप को चुनें। यहां आपको स्क्रीन अननोन कॉलर्स का विकल्प दिखाई देगा, जिस पर टैप करके आस्क रीजन फॉर कॉलिंग विकल्प को ऑन या सिलेक्ट कर लें।
2. स्पैम मैसेज के लिंक सीधे नहीं खुलेंगे
- आईफोन अनजान सेंडर्स के मैसेज में मौजूद लिंक को सीधे खोलने से रोकता है। ऐसे लिंक को खोलने के लिए उसे कॉपी करके ब्राउजर में पेस्ट करना होगा या फिर मैसेज को सेफ बताना होगा।
- इससे किसी संदिग्ध मैसेज में दिए गए लिंक पर गलती से टैप करने और स्कैम का शिकार होने का खतरा कम किया जा सकता है।
3. अनजान लोगों के मैसेज अलग रहेंगे
- आईफोन जान-पहचान वाले लोगों और अनजान सेंडर्स के मैसेज को अलग-अलग रख सकता है। अनजान मैसेज के नोटिफिकेशन भी नहीं आते हैं, जिससे संदिग्ध मैसेज से होने वाली परेशानी कम हो सकती है।
- इस फीचर तक पहुंचने के लिए आपको सबसे पहले अपने फोन के मैसेज एप में जाना होगा। इसके बाद फिल्टर विकल्प पर टैप करें और मैनेज फिल्टरिंग को चुनें। यहां आपको स्क्रीन अननोन सेंडर्स का ऑप्शन दिखाई देगा, जिसे ऑन या सिलेक्ट करके आप अनजान सेंडर्स के मैसेजेस को अलग कर सकते हैं।
फोन में ये फीचर्स क्यों हैं जरूरी?
- एआई की मदद से होने वाले फ्रॉड के तरीके लगातार बदल रहे हैं। ऐसे में केवल किसी संदिग्ध कॉल या मैसेज को पहचानना ही काफी नहीं है, बल्कि यूजर को समय रहते चेतावनी मिलना भी जरूरी है। गूगल और एपल के ये फीचर्स इसी स्तर पर सुरक्षा की अतिरिक्त परत देते हैं।
- हालांकि, किसी भी सुरक्षा फीचर को 100 प्रतिशत सुरक्षा की गारंटी नहीं माना जाना चाहिए। अनजान कॉल, संदिग्ध लिंक, ओटीपी और निजी जानकारी शेयर करते समय यूजर को खुद भी सावधानी बरतनी चाहिए।