Tach – एपल का बड़ा दावा: नया मैक मिनी और मैक स्टूडियो डेटा सेंटर किराए से सस्ता, AI काम लोकल करो बिना टोकन खर्च

सैन फ्रांसिस्को. एपल अब कॉरपोरेट खरीदारों को एक अलग ही ऑफर दे रहा है. कंपनी कह रही है कि उसके नए डेस्कटॉप कंप्यूटर डेटा सेंटर किराए पर लेने से सस्ते पड़ेंगे. मंगलवार से शिपिंग शुरू हो रहे अपग्रेडेड मैक मिनी और मैक स्टूडियो को एपल ने खास तौर पर लोकल AI कामों के लिए तैयार किया है. इनमें कोड लिखने से लेकर जटिल बिजनेस टास्क तक बिना क्लाउड के पूरे हो सकते हैं.
ये मशीनें करीब 20,000 डॉलर तक की हैं, लेकिन एपल का जोर इस बात पर है कि एक बार खरीदने के बाद कोई ‘टोकन’ चार्ज नहीं देना पड़ता. ओपनएआई या एंथ्रोपिक जैसे क्लाउड सर्विस पर हर बार पैसा खर्च करने की जरूरत नहीं रहती. कंपनी का दावा है कि ये मशीनें दीवार के एक सॉकेट से चल सकती हैं और डेटा सेंटर जितना पावरफुल काम कर सकती हैं.
एपल ने हाल ही में लॉन्च इवेंट में चार मैक स्टूडियो को एक साथ जोड़कर एक ट्रिलियन पैरामीटर वाला AI मॉडल चलाकर दिखाया. इसने ग्राफिक्स कोडिंग का बग ढूंढकर ठीक कर दिया. आमतौर पर ऐसे काम डेटा सेंटर में होते हैं, लेकिन एपल ने इसे डेस्कटॉप पर कर दिखाया.एपल के चीफ हार्डवेयर ऑफिसर जॉनी सरौजी ने कहा, एक बार मशीन आपके डेस्क पर आ गई तो आपने उसका पैसा चुका दिया. अब बार-बार इस्तेमाल करो, कोई टोकन कॉस्ट नहीं. परफॉर्मेंस और कीमत दोनों में हम बढ़िया वैल्यू देते हैं.
बड़ा मौका और चुनौती भी
यह एपल के लिए बड़ा मौका भी है और बड़ी चुनौती भी. आईडीसी के आंकड़ों के मुताबिक एंटरप्राइज डेस्कटॉप मार्केट में एपल की हिस्सेदारी महज 4.6 प्रतिशत है, जबकि विंडोज की 91.3 प्रतिशत. माइक्रोसॉफ्ट इस सेगमेंट में सालों से राज कर रहा है. अगले महीने सैन फ्रांसिस्को में माइक्रोसॉफ्ट का विंडोज इवेंट होना है, जहां एनवीडिया और अन्य पीसी मेकर्स के नए डेस्कटॉप मशीनों पर फोकस रहने वाला है.
एपल का दांव अपनी पुरानी ताकत पावर सेविंग पर है . 2020 में जब एपल ने अपना सिलिकॉन चिप लॉन्च किया था, तो उसने कंप्यूटिंग और मेमोरी को एक साथ जोड़ दिया था. इससे बैटरी लाइफ बेहतर हुई और साइड इफेक्ट के तौर पर AI परफॉर्मेंस भी मजबूत हो गई. अब वही आर्किटेक्चर डेस्कटॉप में काम आ रहा है.
अनमटर्ड इंटेलिजेंस की बात हो रही
माइक्रोसॉफ्ट भी ‘अनमटर्ड इंटेलिजेंस’ यानी ऑन-डिवाइस AI की बात कर रहा है. सीईओ सत्य नडेला ने कहा है कि कंपनी अपनी कई AI फीचर्स को विंडोज के सुपर ऐप में समेटने वाली है. लेकिन विंडोज को कई अलग-अलग हार्डवेयर सपोर्ट करने पड़ते हैं, जबकि एपल का पूरा इकोसिस्टम एक जैसा है. एनवीडिया अभी भी डेटा सेंटर पर फोकस्ड है. जेन्सेन हुआंग ने साफ कहा कि वे एपल से सीधी टक्कर नहीं लेना चाहते, बल्कि विंडोज पीसी की क्षमता बढ़ाना चाहते हैं.
एपल का प्लान साफ है. जो AI मॉडल उसके डिवाइस पर डेवलप होगा, उसे सस्ते आईफोन-आईपैड से लेकर महंगे मैक स्टूडियो तक स्केल किया जा सकता है. क्योंकि सबके चिप्स एक जैसे सिद्धांत पर बने हैं. सरौजी का कहना है, “डेटा सेंटर में जितनी पावर चाहो उतनी पंप कर सकते हो. हम अलग-अलग जरूरत के हिसाब से प्रोडक्ट दे रहे हैं. ग्राहक खुद तय करे कि उसे कौन सा कंप्यूटर चाहिए. एपल अब एंटरप्राइज मार्केट में अपनी पुरानी कमजोरी को AI की ताकत से पाटने की कोशिश कर रहा है. सवाल यह है कि कॉरपोरेट खरीदार क्या सच में डेटा सेंटर छोड़कर मैक पर भरोसा करेंगे?
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