Technology, हर समय रिकॉर्ड हो रही आपकी बातें: एपल वॉच का ‘ऑलवेज-ऑन’ लिसनिंग फीचर बना मुसीबत, प्राइवेसी को कितना है खतरा? – Apple Watch Always On Listening Features Privacy Concerns Explained — INA

सार

एपल वॉच के नए मॉडल्स में अब आपकी हर बात सुनने और समराइज करने का फीचर जुड़ गया है। कंपनी भले ही फुल प्राइवेसी का दावा करे, लेकिन 24 घंटे रिकॉर्डिंग चालू रहने से लोगों में निजता को लेकर डर और बेचैनी काफी बढ़ गई है।

एपल ने अपने लेटेस्ट एपल वॉच (Apple Watch) मॉडल्स में कुछ ऐसे फीचर्स जोड़े हैं, जो तकनीकी तौर पर बेहद एडवांस हैं, लेकिन आम लोगों के मन में अजीब सी घबराहट पैदा कर रहे हैं। नए फीचर्स की मदद से यह स्मार्टवॉच दिन भर आपके आस-पास की आवाजें सुन सकती है, जरूरत पड़ने पर बातचीत के कुछ हिस्सों को ट्रांसक्राइब (लिखकर पेश) कर सकती है, और पूरे दिन में सुनी गई बातों की समरी भी तैयार कर सकती है। इस ‘ऑलवेज-ऑन’ सर्विलांस ने प्राइवेसी को लेकर एक नई बहस छेड़ दी है।

हालांकि, एपल ने साफ किया है कि वह यूजर्स की प्राइवेसी को लेकर बेहद सख्त है। कंपनी का दावा है कि किसी भी ऑडियो को सेव या रिकॉर्ड नहीं किया जाता है। बातचीत को किसी भी व्यक्ति की पहचान से नहीं जोड़ा जाता और पूरा डेटा इस तरह एनक्रिप्टेड होता है कि खुद एपल भी उसे नहीं पढ़ सकता। इसके बावजूद, लोगों के मन में इस फीचर को लेकर जो अजीब सी हिचक है, उसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

बिना परमिशन रिकॉर्ड हो रहे आस-पास के लोग

जब हम किसी कैफे, डिनर पार्टी, बाथरूम या किसी मीटिंग में बात करते हैं, तो हमारा एक भरोसा होता है कि हमारी बातें सिर्फ वहीं मौजूद लोगों के लिए हैं। इसे ‘कॉन्टेक्सचुअल इंटीग्रिटी’ कहा जाता है। हम अपनी बातें किसी स्मार्ट डिवाइस के लिए नहीं करते जो उसे एक ऑटोमैटिक समरी में बदलकर सेव कर ले। डेटा कितना भी सुरक्षित क्यों न हो, असल दिक्कत यह है कि हमारी निजी बातचीत चुपके से एक सर्विस और प्रोडक्ट का हिस्सा बन रही है।

एपल का कहना है कि यह फीचर ‘ऑप्ट-इन’ है, यानी आप चाहें तो ही इसे चालू करें या नहीं। लेकिन असली समस्या यह है कि जो शख्स वॉच पहने है, सिर्फ उसी के पास यह विकल्प है। कमरे में मौजूद बाकी लोगों की आवाज बिना किसी परमिशन के रिकॉर्ड हो सकती हैं।

एपल ने इस परेशानी को समझते हुए ‘लाइव रिवाइंड’ फीचर को पेश किया है जो पिछले 15 सेकंड की बात को टेक्स्ट में बदल देता है। इसका इस्तेमाल शुरू करने पर एक साउंड बजता है और माइक के पास इंडिकेटर भी जलता है। लेकिन ‘सिरी रिकैप’ फीचर, जो पूरे दिन चलता है और समरी बनाता है, ऐसा कोई अलर्ट नहीं देता। अगर यह लगातार बीप करेगा, तो वॉच पहनना ही मुश्किल हो जाएगा।

स्मार्ट ग्लासेज की तरह वॉच पर भी लग सकता है बैन?

मेटा (Meta) के स्मार्ट ग्लासेज को कई दफ्तरों और पब्लिक जगहों पर बैन किया जा चुका है क्योंकि उनमें वीडियो रिकॉर्डिंग का विकल्प है। अब ऐसा ही खतरा एपल वॉच पर भी मंडरा रहा है। भविष्य में आने वाले एयरपॉड्स पर भी कैमरे लगने की अफवाहें हैं।

टेक कंपनियों के डेटा मिसयूज के पुराने ट्रैक रिकॉर्ड को देखते हुए लोगों का भरोसा टूटना लाजमी है। कई सर्वे बताते हैं कि लोग पहले से ही मानते हैं कि उनके फोन .ों के लिए उनकी बातें सुनते हैं। खुद एपल ने 2025 में एक मामले को सुलझाने के लिए 95 मिलियन डॉलर का हर्जाना दिया था, जहां सिरी के गलती से एक्टिवेट होने और प्राइवेट ऑडियो कॉन्ट्रैक्टर्स तक पहुंचने का आरोप लगा था।

कैसा है एपल का मजबूत प्राइवेसी सिस्टम?

बाकी कंपनियों के मुकाबले एपल प्राइवेसी को ज्यादा बेहतर तरीके से संभाल रहा है। इन नए फीचर्स को पावर देने वाला ‘प्राइवेट क्लाउड कंप्यूट’ ऐसे डिजाइन किया गया है कि खुद एपल का स्टाफ भी डेटा नहीं देख सकता। इसके सर्वर कोई लॉग (हिस्ट्री) नहीं रखते और जवाब देने के बाद सब कुछ डिलीट कर देते हैं। कंपनी ने इंडिपेंडेंट रिसर्चर्स को अपना सॉफ्टवेयर चेक करने की छूट भी दी है, जिससे साबित होता है कि ‘ऑलवेज-ऑन’ लिसनिंग भी बिना डेटा चुराए मुमकिन है।

नई टेक्नोलॉजी से कमजोर हो रही प्राइवेसी?

कैमरे वाले स्मार्ट चश्मे और स्मार्टफोन में मिलने वाले एआई फीचर्स पर लगातार सवाल उठ रहे हैं। खासतौर पर इन डिवाइसेस के पब्लिक यूज को लेकर सबसे ज्यादा चिंता है। मेटा स्मार्टग्लास यूजर्स पर सार्वजनिक जगहों में चोरी-चुपके वीडियो रिकॉर्ड करने और उसे सोशल मीडिया पर अपलोड करने के कई मामले सामने आ चुके हैं। कुछ मामलों में तो यूजर्स पर कार्रवाई भी हुई है। हालांकि, टेक कंपनिया यूजर डेटा के गलत इस्तेमाल से जुड़े सवालों से इंकार करती रही हैं।

टेक कंपनियां चाहे कितना भी भरोसा दिला दें, एक बुनियादी सवाल अपनी जगह कायम है। एक ऐसा डिवाइस जो पब्लिक में हमेशा आपको सुन रहा है, हमारी उस उम्मीद को तोड़ता है जहां बातचीत सिर्फ उस कमरे और उसमें मौजूद लोगों की अमानत होती है। टेक कंपनियां अब हमें एक ऐसा सोशल नॉर्म अपनाने के लिए कह रही हैं, जहां बातचीत को आसानी से कैप्चर और एनालाइज किया जा सके। अगर हम अपनी जिंदगी में इस तरह की जासूसी नहीं चाहते, तो हमें इसके खिलाफ खुलकर अपनी राय रखनी होगी।

Source link

Back to top button