इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि संपत्ति के स्वामित्व और उससे जुड़े दस्तावेज को कूटरचित घोषित कर रद्द करने का अधिकार केवल सिविल कोर्ट को है। सीनियर सिटीजन एक्ट के तहत गठित न्यायाधिकरण को केवल भरण-पोषण, मूलभूत जरूरतों और वरिष्ठ नागरिकों के जीवन और संपत्ति की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए बेदखली का अधिकार प्राप्त है।
यह टिप्पणी संग न्यायमूर्ति जेजे मुनीर और न्यायमूर्ति इंद्रजीत शुक्ला की खंडपीठ ने ललितपुर के 68 वर्षीय याची की याचिका पर की है। कोर्ट ने याची की मांग पर जाली दान विलेख (गिफ्ट डीड) की वैधता की जांच के लिए कमेटी गठित करने के डीएम के आदेश पर आपत्ति जताई। साथ ही याची को दान विलेख को रद्द कराने के लिए दीवानी अदालत का दरवाजा खटखटाने की छूट प्रदान की है।
मामले के अनुसार, बुजुर्ग याची ने आरोप लगाया कि बेटी और दामाद ने फर्जी तरीके से 2023 में ललितपुर स्थित उसके मकान का दान विलेख तैयार कराया। वह मकान उसका एकमात्र आश्रय है। गिफ्ट डीड पर उसके हस्ताक्षर भी नहीं हैं। आरोप लगाया कि इसी दस्तावेज के आधार पर उसकी पिटाई की गई और मकान से बेदखल कर दिया गया। दान विलेख में बेटी की ओर से उसकी देखभाल करने की कोई शर्त नहीं थी।