UP News: 5 कैटेगरी, 30 दिन में रिपोर्ट.. यूपी में सरकारी नौकरी के आवेदकों को किन बातों का ध्यान रखना होगा? – INA

उत्तर प्रदेश में सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए ये खबर बेहद अहम है. योगी सरकार ने सरकारी सेवाओं में सीधी भर्ती के तहत चयनित अभ्यर्थियों के कैरेक्टर वेरिफिकेशन को लेकर नई नीति जारी की है. इस नीति में साफ किया गया है कि किन आपराधिक मामलों में आरोप तय होने पर अभ्यर्थी सरकारी नौकरी के लिए अयोग्य हो सकता है, किन मामलों में दोषसिद्धि जरूरी होगी और किन परिस्थितियों में राहत मिलेगी.
इतना ही नहीं, अगर किसी अभ्यर्थी ने आवेदन या स्वघोषणा पत्र में अपने खिलाफ दर्ज मुकदमे, गिरफ्तारी या आपराधिक इतिहास की जानकारी छिपाई, तो उसकी नियुक्ति रद्द की जा सकती है. उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी हो सकती है, लेकिन यहां एक अहम बात समझना जरूरी है. हर FIR या हर लंबित मुकदमे के आधार पर नौकरी से अयोग्यता नहीं होगी. सरकार ने अपराधों की अलग-अलग श्रेणियां बनाई हैं और उनके लिए अलग नियम तय किए हैं.
नई नीति का दायरा कितना बड़ा?
उत्तर प्रदेश सरकार ने सरकारी सेवाओं में सीधी भर्ती के तहत चयनित अभ्यर्थियों के कैरेक्टर वेरिफिकेशन के लिए नई समेकित नीति जारी की है. अपर मुख्य सचिव एम. देवराज की ओर से जारी शासनादेश में आपराधिक इतिहास, लंबित मुकदमों, दोषसिद्धि, प्रतिबंधात्मक कार्रवाई और गलत जानकारी देने से जुड़े नियम तय किए गए हैं. यह नीति सिर्फ राज्य सरकार के विभागों तक सीमित नहीं है.
राज्य सरकार के अधीन निगमों, परिषदों, शैक्षणिक संस्थानों, स्वायत्तशासी निकायों, उपक्रमों, पंचायती संस्थाओं और नगर क्षेत्र के स्थानीय निकायों में सीधी भर्ती के तहत होने वाली नियुक्तियों पर भी लागू होगी. सरकार ने पहले जारी अलग-अलग शासनादेशों को एक साथ समेकित कर नई व्यवस्था बनाई है. शासनादेश के मुताबिक, यह कदम इलाहाबाद हाईकोर्ट के निर्देशों के अनुपालन में उठाया गया है.
गंभीर अपराधों में आरोप तय होने पर अयोग्यता
नई नीति का सबसे अहम हिस्सा है अपराधों का वर्गीकरण. शासनादेश में अपराधों और प्रतिबंधात्मक कार्रवाइयों को पांच श्रेणियों में बांटा गया है. इनमें कुछ गंभीर अपराध ऐसे हैं, जिनमें अदालत की ओर से आरोप तय होने या दोषसिद्धि होने पर अभ्यर्थी सरकारी सेवा के लिए अयोग्य हो सकता है.
पहली श्रेणी यानी कैटेगरी-A में गंभीर, जघन्य और नैतिक अधमता से जुड़े अपराध रखे गए हैं. इनमें राज्य के खिलाफ अपराध, सेना से जुड़े अपराध, हत्या, आपराधिक मानव वध, दहेज मृत्यु, आत्महत्या के लिए उकसाना, गंभीर शारीरिक हमला, तेजाब हमला, फिरौती के लिए अपहरण, मानव तस्करी, बलात्कार और अन्य गंभीर यौन अपराध शामिल हैं.
इसी श्रेणी में लूट, डकैती, रंगदारी, संगठित अपराध, आतंकवादी गतिविधियां, भीड़ द्वारा हत्या, गंभीर साइबर अपराध, डिजिटल अरेस्ट, ओटीपी और यूपीआई धोखाधड़ी, डीपफेक, परीक्षा या चयन प्रणाली में हैकिंग, डमी अभ्यर्थी, फर्जी जाति, आय, दिव्यांगता या खेल प्रमाणपत्र, पेपर लीक, सॉल्वर गैंग और कूटरचना जैसे मामले भी शामिल हैं. इसके अलावा लोक सेवक द्वारा आपराधिक न्यासभंग, आगजनी और गंभीर अपराधों में झूठे साक्ष्य गढ़ने जैसे अपराध भी इस श्रेणी में रखे गए हैं. इन अपराधों में आरोप तय होने या दोषसिद्धि होने पर निर्धारित नियमों के अनुसार अयोग्यता लागू हो सकती है.
विशेष कानूनों के मामले भी शामिल
दूसरी श्रेणी यानी कैटेगरी-B में विशेष कानूनों के तहत आने वाले निर्धारित गंभीर अपराध शामिल हैं. इनमें एनडीपीएस अधिनियम, आयुध अधिनियम की निर्दिष्ट धाराएं, सरकारी गोपनीयता कानून, विस्फोटक पदार्थ अधिनियम, गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम यानी UAPA और आतंकवाद से जुड़े कानून शामिल हैं.
इसके अलावा राष्ट्रीय जांच एजेंसी अधिनियम की अनुसूची में शामिल अपराध, अनैतिक व्यापार निवारण अधिनियम, पॉक्सो अधिनियम, सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की निर्दिष्ट धाराएं, भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और धनशोधन निवारण अधिनियम के कुछ मामले भी इसमें शामिल हैं.
सार्वजनिक परीक्षाओं में अनुचित साधनों की रोकथाम से जुड़े केंद्रीय और उत्तर प्रदेश के कानून, गैंगस्टर कानून, गैरकानूनी धर्म परिवर्तन निषेध कानून, गोवध निवारण कानून की निर्दिष्ट धाराएं और जहरीली या मिलावटी शराब से मौत अथवा चोट के मामलों से जुड़े कुछ आबकारी प्रावधान भी इस श्रेणी में रखे गए हैं.
प्रिवेंटिव कार्रवाई और दोषसिद्धि के नियम
अब तीसरी श्रेणी यानी कैटेगरी-C की बात करते हैं. इसमें राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम यानी NSA, COFEPOSA और राष्ट्रीय सुरक्षा, आतंकवाद, विघटनकारी गतिविधियों तथा उग्रवाद से जुड़े कुछ निर्दिष्ट कानूनों के तहत की गई प्रतिबंधात्मक कार्रवाइयां शामिल हैं, लेकिन यहां भी शर्तें हैं. प्रतिबंधात्मक आदेश जारी होने के साथ सलाहकार बोर्ड से उसकी पुष्टि और सक्षम न्यायालय या प्राधिकारी की ओर से आदेश निरस्त नहीं किया जाना जैसी निर्धारित शर्तें पूरी होनी चाहिए.
चौथी श्रेणी यानी कैटेगरी-D में ऐसे अपराध शामिल हैं, जिनमें सामान्यतः दोषसिद्धि होने पर अयोग्यता लागू होगी. इसमें आपराधिक षड्यंत्र, समाज में वैमनस्य फैलाना, राज्य की अखंडता पर प्रतिकूल प्रभाव डालने वाले अपराध, कुछ धार्मिक अपराध, गंभीर चोट, अपहरण, यौन उत्पीड़न, पीछा करना, न्याय प्रक्रिया से जुड़े अपराध, फरार अपराधी को शरण देना, संपत्ति संबंधी अपराध, आर्थिक धोखाधड़ी, दस्तावेजों की कूटरचना, आगजनी और विवाह तथा दहेज से जुड़े निर्दिष्ट अपराध शामिल हैं.
इस श्रेणी में सामान्य नियम यह है कि केवल आरोप तय होने से अयोग्यता नहीं होगी, बल्कि दोषसिद्धि की स्थिति महत्वपूर्ण होगी. हालांकि, अपील लंबित होने पर भी शासनादेश के निर्धारित नियम लागू होंगे.
बार-बार अपराध के मामलों में भी नियम सख्त
सरकार ने पांचवीं श्रेणी यानी कैटेगरी-E में बार-बार अपराध में संलिप्त पाए जाने वाले अभ्यर्थियों के लिए नियम तय किए हैं. अगर किसी अभ्यर्थी के खिलाफ अलग-अलग मामलों में दो या उससे अधिक आरोपपत्र दाखिल हो चुके हैं और उनमें कम से कम एक मामला सत्यापन की तारीख से पिछले तीन वर्षों के भीतर का है, तो उसे निर्धारित शर्तों के तहत अयोग्यता के दायरे में रखा जा सकता है. इसी तरह, यदि सत्यापन की तारीख से पिछले पांच वर्षों के भीतर तीन या उससे अधिक अलग-अलग मामलों में सक्षम अदालत आरोप तय कर चुकी है, तो भी अयोग्यता का प्रावधान है.
हालांकि, सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि हर मामले को अलग-अलग गिनने का तरीका तय है. एक ही घटना या लेनदेन से जुड़े मुकदमों और उसी घटना की क्रॉस FIR को एक मामला माना जाएगा. कुछ परिस्थितियों में एक ही पक्ष, भूमि, संपत्ति, पारिवारिक या वैवाहिक विवाद से जुड़े मामलों को भी अलग-अलग नहीं गिना जाएगा. जिन मामलों में अभ्यर्थी बरी हो चुका हो, समझौते या लोक अदालत के जरिए निस्तारण हो गया हो, सरकार ने मामला वापस ले लिया हो या अदालत ने कार्यवाही रद्द कर दी हो, उन्हें निर्धारित शर्तों के तहत गणना से बाहर रखा जाएगा.
हर FIR पर नौकरी नहीं जाएगी, छोटे मामलों में राहत
नई नीति को समझने के लिए इसका सबसे महत्वपूर्ण अपवाद जानना भी जरूरी है. सरकार ने स्पष्ट किया है कि केवल FIR दर्ज होने, मामला विवेचनाधीन होने या आरोपपत्र दाखिल होने से, अगर सक्षम अदालत ने आरोप तय नहीं किए हैं, तो अभ्यर्थी को अपने आप अयोग्य नहीं माना जाएगा. यह अपवाद कैटेगरी-A और B के मामलों में भी लागू होगा. कैटेगरी-D में सामान्यतः दोषसिद्धि होने तक अयोग्यता लागू नहीं होगी.
अदालत से अंतिम रूप से दोषमुक्त होने, लोक अदालत में आपसी समझौते से मामला निस्तारित होने, कानून के तहत शमन होने, अभियोजन वापस लिए जाने, हाईकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट द्वारा कार्यवाही रद्द किए जाने या सक्षम अदालत द्वारा अंतिम रिपोर्ट स्वीकार किए जाने जैसी स्थितियों में भी निर्धारित अपवाद लागू होंगे. कुछ छोटे अपराधों में भी राहत का प्रावधान हैय इनमें ऐसे असंज्ञेय या शमनीय अपराध शामिल हैं, जिनमें केवल जुर्माना या सामुदायिक सेवा का प्रावधान होय
अधिकतम एक वर्ष तक की सजा वाले निर्दिष्ट अपराध, 10 हजार रुपये से कम मूल्य की संपत्ति से जुड़े कुछ अपराध और यातायात संबंधी उल्लंघन भी राहत के दायरे में आ सकते हैं, बशर्ते वे निर्धारित गंभीर अपराध श्रेणियों में न आते हों. एक और महत्वपूर्ण प्रावधान है. कैटेगरी-D के किसी अपराध में दोषसिद्धि के बाद सात वर्ष बीत चुके हों और अभ्यर्थी का बाद का आचरण अच्छा रहा हो, तो नियुक्ति प्राधिकारी लिखित कारण दर्ज करते हुए छूट देने पर विचार कर सकता है.
किन मामलों में राहत संभव?
- केवल FIR या विवेचना लंबित होने से स्वतः अयोग्यता नहीं
- आरोपपत्र दाखिल, लेकिन अदालत ने आरोप तय नहीं किए: निर्धारित अपवाद लागू
- अदालत से अंतिम दोषमुक्ति या कार्यवाही रद्द होने पर राहत संभव
- कुछ छोटे और शमनीय अपराधों में छूट
- कैटेगरी-D में दोषसिद्धि के 7 वर्ष बाद अच्छे आचरण पर विचार संभव
आपराधिक इतिहास छिपाया तो नियुक्ति रद्द
अब बात उस नियम की, जिसका असर हर चयनित अभ्यर्थी पर पड़ सकता है. नई नीति के तहत आवेदन पत्र, सत्यापन पत्र और स्वघोषणा पत्र में आपराधिक मामलों से जुड़ी जानकारी देना अनिवार्य है. अभ्यर्थी को बताना होगा कि उसे कभी किसी आपराधिक मामले में गिरफ्तार किया गया है या नहीं, उसके खिलाफ अभियोजन चला है या नहीं और किसी अदालत ने उसे दोषी ठहराया है या नहीं.
इसके अलावा दर्ज FIR, आरोपपत्र, लंबित विचारण, प्रतिबंधात्मक कार्रवाई, पूर्व सेवा से बर्खास्तगी और किसी आयोग या बोर्ड की ओर से अनुचित साधनों के इस्तेमाल के कारण परीक्षा या चयन से प्रतिबंधित किए जाने की जानकारी भी देनी होगी. अगर अभ्यर्थी जानकारी छिपाता है या गलत तथ्य देता है और बाद में इसका पता चलता है, तो उसकी नियुक्ति निरस्त की जा सकती है. उसे सरकारी सेवा के लिए अयोग्य घोषित करने के साथ भारतीय न्याय संहिता के प्रावधानों के अनुसार अन्य दंडात्मक, दीवानी या कानूनी कार्रवाई भी की जा सकती है.
पुलिस और प्रशासन को 30 दिन में देनी होगी रिपोर्ट
नई नीति में चरित्र सत्यापन की प्रक्रिया और समयसीमा भी तय की गई है. नियुक्ति प्राधिकारी अभ्यर्थी का पूरा विवरण पुलिस महानिदेशक यानी DGP, अभिसूचना और संबंधित जिलाधिकारी को भेजेगा. अभ्यर्थी के गृह जिले के साथ उन जिलों में भी सत्यापन कराया जाएगा, जहां वह जांच की तारीख से पिछले पांच सालों के दौरान एक वर्ष से अधिक समय तक रहा हो. जिलाधिकारी, जिला पुलिस प्रमुख से रिपोर्ट प्राप्त करेंगे. जिला पुलिस और स्थानीय अभिसूचना इकाई अपने उपलब्ध रिकॉर्ड की जांच करके बताएगी कि अभ्यर्थी के खिलाफ कोई प्रतिकूल तथ्य है या नहीं.
सामान्य मामलों में अभ्यर्थी के घर जाकर पूछताछ करना, उसकी भौतिक उपस्थिति अनिवार्य करना या अतिरिक्त दस्तावेज मांगना जरूरी नहीं होगा. हालांकि, किसी विशेष मामले में नियुक्ति प्राधिकारी के अनुरोध पर मौके पर जांच कराई जा सकेगी. अगर अभ्यर्थी पिछले पांच सालों में किसी दूसरे राज्य या केंद्रशासित प्रदेश में एक साल या उससे अधिक समय तक रहा है, तो संबंधित राज्य या केंद्रशासित प्रदेश के पुलिस प्रमुख से भी परामर्श किया जाएगा.
शासनादेश के मुताबिक, पुलिस महानिदेशक अभिसूचना और जिलाधिकारियों को संदर्भ प्राप्त होने के 30 दिनों के भीतर रिपोर्ट देनी होगी. अगर तय समय में रिपोर्ट नहीं मिलती, तो नियुक्ति प्राधिकारी मामला गृह विभाग को भेजेगा. गृह विभाग रिपोर्ट उपलब्ध कराने के लिए जरूरी कार्रवाई सुनिश्चित करेगा. अगर पुलिस रिपोर्ट प्रतिकूल आती है, तो जिलाधिकारी रिपोर्ट भेजने से पहले अभ्यर्थी को सुनवाई का अवसर देंगे. सुनवाई भौतिक या ऑनलाइन, दोनों तरीकों से हो सकती है.
सत्यापन के इंतजार में नियुक्ति नहीं रुकेगी
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि सामान्य मामलों में चरित्र सत्यापन के कारण नियुक्ति पत्र जारी करने की प्रक्रिया लंबित नहीं रखी जाएगी. चयनित अभ्यर्थी से निर्धारित प्रारूप में सत्यापन पत्र और स्वघोषणा पत्र लेकर औपबंधिक यानी प्रोविजनल नियुक्ति पत्र जारी किया जा सकेगा, लेकिन संवेदनशील पदों या सुरक्षा की दृष्टि से ऐसे पदों पर, जहां विस्तृत पूर्व सत्यापन जरूरी है, नियुक्ति से पहले सत्यापन पूरा करना अनिवार्य होगा. ऐसे पदों पर औपबंधिक नियुक्ति पत्र जारी नहीं किया जाएगा.
राजनीतिक विचारधारा के आधार पर नौकरी से वंचित नहीं किया जाएगा
शासनादेश में राजनीतिक विचारधारा को लेकर भी स्पष्ट प्रावधान किया गया है. किसी व्यक्ति को केवल उसकी राजनीतिक विचारधारा के कारण सरकारी नौकरी के लिए अनुपयुक्त नहीं माना जाएगा. हालांकि, ऐसे संगठन का सदस्य होना, जिसका घोषित उद्देश्य हिंसक तरीके से समाज की मौजूदा व्यवस्था को बदलना है, सरकारी नियुक्ति के लिए अयोग्यता का आधार होगा.
5 कैटेगरी, 30 दिन में रिपोर्ट.. यूपी में सरकारी नौकरी के आवेदकों को किन बातों का ध्यान रखना होगा?
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