Delhi-Ncr स्कूल फीस बिल पैरेंट्स के खिलाफ… AAP नेता आतिशी ने की संशोधन की मांग- #INA

आप नेता आतिशी (File Photo)
आम आदमी पार्टी ने भाजपा सरकार के स्कूल फीस बिल को पैरेंट्स के हितों के खिलाफ बताया और उसमें चार अहम संशोधन की मांग की है. दिल्ली विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष आतिशी ने कहा कि आप विधायक दल ने पैरेंट्स के हक में बिल में संशोधन के प्रस्ताव दिए हैं. अब भाजपा को तय करना है कि वह किसके साथ है? भाजपा विधायक इन प्रस्तावों पर किसके पक्ष में वोट करते हैं, उससे साफ हो जाएगा कि वह पैरेंट्स के साथ हैं या प्राइवेट स्कूलों के साथ हैं.
उन्होंने कहा कि हमने बिल में स्कूलों का ऑडिट करने का प्रावधान करने की मांग की है, जिस पर पैरेंट्स 15 दिनों में अपने सुझाव देंगे और उसी आधार पर कमेटी फीस तय करेगी. इसके अलावा, स्कूल की कमेटी में 5 की जगह 10 पैरेंट्स को चुनाव के जरिए शामिल करने, 15 फीसद की जगह 15 पैरेंट्स की शिकायत पर कार्रवाई करने और कमेटी के फैसले के खिलाफ कोर्ट जाने का अधिकार देने को लेकर बिल में संशोधन भेजे हैं.
अप्रैल से ही बिल पर चर्चा चल रही है
इससे पहले सोमवार को आप विधायक दल के चीफ व्हीप संजीव झा और विधायक कुलदीप कुमार के साथ पार्टी मुख्यालय पर प्रेसवार्ता कर नेता प्रतिपक्ष आतिशी ने कहा कि दिल्ली की भाजपा सरकार प्राइवेट स्कूलों की फीस को रेगुलेट करने के लिए स्कूल फीस बिल लेकर आई है. अप्रैल से इस बिल पर चर्चा चल रही है. अप्रैल में ही प्राइवेट स्कूल बेलगाम तरीके से अपनी फीस बढ़ा रहे थे, बच्चों को स्कूल से बाहर निकाल रहे थे, लाइब्रेरी में कैद कर रहे थे, 40 डिग्री सेल्सियस तापमान के अंदर माता-पिता स्कूल के बाहर विरोध कर रहे थे और चारों तरफ अफरा-तफरी मची हुई थी.
आतिशी ने सवाल खड़े किये कि चार महीने बाद इस बिल को विधानसभा में क्यों लाया गया? सिर्फ प्राइवेट स्कूलों को बचाने के लिए चार महीने बाद यह बिल विधानसभा में लाया गया. प्राइवेट स्कूलों को पैरेंट्स को परेशान करके बढ़ी फीस वसूलने का मौका देने के लिए बिल को चार महीने बाद लाया गया. बिल को लाने से पहले शिक्षाविद्, वकील और पैरेंट्स समेत किसी भी हितधारक से कोई रायशुमारी नहीं हुई. पैरेंट्स अपनी राय देने की मांग करते रह गए, लेकिन सरकार ने चार महीने तक बिल की कॉपी तक नहीं दिखाई.
आप ने पैरेंट्स से बिल को साझा किया
आतिशी ने कहा कि दिल्ली विधानसभा में पेश बिल को आम आदमी पार्टी ने सभी माता-पिता के साथ साझा किया. बिल पेश होने से पहले भी हमने पैरेंट्स से मुलाकात कर राय ली थी. पैरेंट्स की राय के अनुसार आप विधायक दल इस बिल में कई संशोधन टेबल कर रहा है. ताकि बिल के प्रावधान स्कूल मालिकों के बजाय पैरेंट्स के हक में हों. इन संशोधन प्रस्तावों पर सदन में वोट किया जाएगा.
आतिशी ने कहा कि आप विधायक दल के चीफ व्हीप संजीव झा ने बिल में पहला संशोधन की मांग की है कि बिल को सिलेक्ट कमेटी के पास भेजा जाए. यह कमेटी हितधारकों से राय ले और स्कूलों से प्रताड़ित पैरेंट्स की आवाज भी दिल्ली विधानसभा तक पहुंचे. हम उम्मीद करते हैं कि भाजपा पैरेंट्स की आवाज सुनेगी. हालांकि हमें भाजपा पर भरोसा बहुत कम है. इसलिए हमें कई और संशोधन प्रस्ताव भी दिए हैं.
आतिशी ने कहा कि सबको पता है कि पर्ची की सेटिंग कैसे की जाती है? इसलिए आप विधायक दल ने बिल के सेक्शन-4 में संशोधन की मांग की है कि स्कूल फीस रेगुलेशन कमेटी में 5 के बजाय 10 पैरेंट्स शामिल हों. यानि यह कमेटी 15 सदस्यीय होगी, जिसमें 5 सदस्य स्कूल की तरफ से होंगे. जबकि 10 पैरेंट्स के सदस्य पैरेंट्स की जनरल बॉडी के चुनाव के जरिए चुने जाएंगे.
भाजपा की असली मंशा साफ- आप
आतिशी ने कहा कि बिल के सेक्शन-5 से भाजपा की असली मंशा निकल कर आती है. भाजपा सरकार बनते ही स्कूलों ने बेलगाम तरीके से फीस बढ़ाई. माता-पिता से बढ़ी फीस वसूल की. हमने बार-बार कहा कि नई फीस पर रोक लगे और 2024-25 की फीस से ज्यादा फीसद नहीं लेने दिया जाए, लेकिन भाजपा ने ऐसा नहीं किया. बिल के सेक्शन 5 के सब-सेक्शन 1 का प्रोवाइजर 2 कहता है कि 2025-26 के लिए 1 अप्रैल 2025 से स्कूलों द्वारा ली गई फीस को इस कानून के तहत प्रस्तावित फीस माना जाएगा.
आतिशी ने दिल्ली के पैरेंट्स से अपील करते हुए कहा कि इन संशोधनों पर जब वोटिंग हो तो दिल्ली विधानसभा का लाइव टेलिकास्ट प्राइवेट स्कूलों में पढ़ने बच्चों के हर माता-पिता जरूर देंगे. इससे दूध का दूध-पानी का पानी हो जाएगा कि क्या भाजपा के विधायक पैरेंट्स के हक में या स्कूल मालिकों के हक वोट देते हैं
संजीव झा ने कहा कि सेक्शन 17 में कोर्ट जाने का हक छीना गया है. यह असंवैधानिक है. संविधान के अनुच्छेद 13 और केशवानंद भारती केस में न्यायिक समीक्षा को मूल संरचना माना गया है. कोर्ट का हस्तक्षेप खत्म करना गलत है. यह बिल कागज भर रह गया. विधायक कुलदीप कुमार ने कहा कि यह बिल अवैध लूट को सरकारी लूट में बदलने की साजिश है.
आप विधायक दल की बिल में मांग और प्रस्तावित संशोधन
- बिल को सिलेक्ट कमेटी में भेजा जाए, ताकि माता-पिता से राय ली जाए.
- फी रेगुलेशन कमेटी 15 सदस्यीय हो, इसमें 10 पैरेंट्स हों जो पर्ची से नहीं, जनरल बॉडी के चुनाव से चुने जाएं.
- कमेटी की बैठक से पहले स्कूल के खातों का ऑडिट हो. ऑडिट रिपोर्ट माता-पिता को भेजी जाए और फीडबैक देने के लिए उन्हें 15 दिन का समय दिया जाए.
- स्कूल की शिकायत के लिए 15 फीसद नहीं, सिर्फ 15 पैरेंट्स की शिकायत पर सुनवाई हो.
- पैरेंट्स को कमेटी के फैसले के खिलाफ कोर्ट जाने का हक हो.
स्कूल फीस बिल पैरेंट्स के खिलाफ… AAP नेता आतिशी ने की संशोधन की मांग
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