World News: SCO समिट के बाद चीन करेगा शक्ति प्रदर्शन, शामिल होंगे 24 से ज्यादा देश लेकिन भारत ने क्यों बनाई दूरी? – INA NEWS

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चीन की राजधानी बीजिंग इस हफ्ते दो बड़े आयोजनों की गवाह बनने जा रही है. पहला है शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन, जो 31 अगस्त और 1 सितंबर को तिआनजिन में होगा. इसके तुरंत बाद 3 सितंबर को चीन की राजधानी में विजय दिवस सैन्य परेड आयोजित होगी, जिसमें द्वितीय विश्व युद्ध में जापान पर जीत की 80वीं वर्षगांठ मनाई जाएगी.

इस परेड के लिए चीन ने 26 से ज्यादा देशों के राष्ट्राध्यक्षों और प्रधानमंत्रियों को इनवाइट किया है. इनमें रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग उन, बेलारूस के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर लुकाशेंको, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेझेश्कियान, इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियान्तो, म्यांमार के सैन्य प्रमुख मिन आंग हलाइंग, क्यूबा के राष्ट्रपति मिगेल डियाज-कनेल, कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य और जिम्बाब्वे के राष्ट्रपति, सर्बिया के राष्ट्रपति अलेक्सांदर वूचिच और स्लोवाकिया के प्रधानमंत्री रॉबर्ट फिको शामिल हैं.

दक्षिणपूर्व एशिया से कंबोडिया के राजा नोरोडोम सिहामोनी, लाओस के राष्ट्रपति थोंगलून सिसौलिथ और वियतनाम के राष्ट्रपति लुओंग कुआंग भी शिरकत करेंगे. दक्षिण कोरिया की संसद के अध्यक्ष वू वोन-शिक भी इस परेड में शामिल होंगे.

दुनिया को अपनी ताकत दिखाएगा चीन

परेड में चीन अपनी उन्नत सैन्य ताकत दिखाएगा. 100 से ज्यादा लड़ाकू विमान, मिसाइलें और टैंक इसमें शामिल होंगे. बीजिंग इसे अपने सहयोगियों के साथ एकजुटता का प्रदर्शन मान रहा है. खासकर ऐसे समय में जब पश्चिमी देश रूस-यूक्रेन युद्ध और एशिया-प्रशांत क्षेत्र में चीन की नीतियों को लेकर असहज हैं.

चीन की परेड में शामिल नहीं होगा भारत

भारत, तुर्की और मिस्र जैसे देशों के शीर्ष नेता केवल SCO शिखर सम्मेलन तक ही मौजूद रहेंगे और परेड से पहले ही लौट जाएंगे. भारत ने स्पष्ट संकेत दिया है कि वह चीन की सैन्य परेड का हिस्सा नहीं बनेगा. पश्चिमी देशों और उनके सहयोगियों की तरह भारत भी ऐसी परेडों से दूरी बनाए रखना पसंद करता है, ताकि किसी सैन्य धुरी के साथ खड़े होने का संदेश न जाए.

इसके पीछे एक और महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि भारत और जापान के संबंध आज अभूतपूर्व स्तर पर मजबूत हुए हैं. प्रधानमंत्री मोदी अभी हाल ही में टोक्यो यात्रा पर गए, जहां दोनों देशों ने अगले दशक के लिए साझा दृष्टिकोण अपनाया है. ऐसे में चीन की विजय दिवस परेड में शामिल होना, जिसका सीधा प्रतीकात्मक संदेश जापान पर जीत से जुड़ा है, भारत-जापान संबंधों पर प्रतिकूल असर डाल सकता था. भारत ने जापान की संवेदनाओं का सम्मान करते हुए इस आयोजन से दूरी बनाए रखी है.

क्यों भारत चीन की परेड नहीं होगा शामिल?

भारत चीन के साथ संबंध बिगाड़ना नहीं चाहता, लेकिन उसकी प्राथमिकता क्वाड (Quad) जैसी पहलों में जापान, अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया के साथ मिलकर इंडो-पैसिफ़िक में संतुलन बनाना है. ऐसे में चीन की सैन्य परेड में मौजूदगी भारत के लिए राजनीतिक रूप से गलत संदेश दे सकती थी.

चीन की 3 सितंबर की विजय दिवस परेड दरअसल जापान पर जीत की याद से जुड़ी है. इसमें शामिल होना जापान की संवेदनाओं के ख़िलाफ़ माना जा सकता है, जबकि भारत जापान को अपना करीबी साझेदार मानता है. SCO में मौजूद रहकर भारत क्षेत्रीय सहयोग और कूटनीतिक संवाद का हिस्सा बना भी है लेकिन परेड से दूरी रखकर स्वतंत्र विदेश नीति पर जोर दिया.

इस तरह, एक ओर जहां बीजिंग में रूसचीनउत्तर कोरिया की नजदीकी का प्रदर्शन होगा, वहीं भारत अपनी रणनीतिक संतुलन नीति पर कायम रहते हुए केवल SCO मंच तक सीमित रहेगा.

SCO समिट के बाद चीन करेगा शक्ति प्रदर्शन, शामिल होंगे 24 से ज्यादा देश लेकिन भारत ने क्यों बनाई दूरी?

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