World News: सरेंडर मोड में अल शरा की सरकार, सीरिया पर फिर से होगा रूस का सीधा कंट्रोल – INA NEWS

World News: सरेंडर मोड में अल शरा की सरकार, सीरिया पर फिर से होगा रूस का सीधा कंट्रोल – INA NEWS

सीरिया की नई अंतरिम सरकार, यानी अहमद अल शरा की टीम, इस वक्त पूरी तरह सरेंडर मोड में नजर आ रही है. वजह साफ है सीरिया का झुकाव तेजी से रूस की तरफ बढ़ रहा है. महीनों तक खामोश बैठने और चारों तरफ से दबाव झेलने के बाद अब सीरिया ने सीधे-सीधे रूस से मदद मांग ली है.

दक्षिणी इलाकों में रूसी गश्तों की वापसी इसका सबूत है. साफ संकेत है कि सीरिया की कमान अब एक बार फिर रूस के हाथों में जाने वाली है. विदेश मंत्री असद अल-शैबानी की मॉस्को यात्रा ने इस रिश्ते को नया मोड़ दे दिया है और आगे की तस्वीर भी अब पहले से ज्यादा साफ दिख रही है.

दमिश्क का झुकाव, मॉस्को की वापसी

बीबीसी की एक रिपोर्ट के मुताबिक राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मुलाकात और रूसी नेतृत्व के साथ बातचीत के बाद यह साफ हो गया कि दमिश्क अपने पुराने साझेदार पर दोबारा दांव लगा रहा है. रूस को तटीय ठिकानों की सुरक्षा चाहिए और सीरिया को क्षेत्रीय दबाव से राहत और अंतरराष्ट्रीय अलगाव से बाहर निकलने का रास्ता. बैठक में दोनों देशों ने पुराने समझौतों की समीक्षा और नए सहयोगी ढांचे की शुरुआत पर सहमति जताई. दमिश्क ने साफ संदेश दिया है कि अब भविष्य की दिशा रूस के साथ मिलकर ही तय होगी.

आठ महीने की चुप्पी क्यों टूटी?

करीब आठ महीनों तक रूस से दूरी बनाए रखने के बाद दमिश्क का यह कदम कई सवाल खड़े करता है. असल वजह है बदलते हालात. उत्तर-पूर्व के कामिश्ली में रूसी गश्तों की वापसी ने साफ कर दिया कि मॉस्को मैदान में उतरने को तैयार है.
लेकिन सबसे बड़ी चुनौती दक्षिण का इलाका है, जहां इजराइल, तुर्की और ईरान के हित टकराते हैं. सीरिया के लिए यहां रूस का सीधा हस्तक्षेप सुरक्षा और संतुलन दोनों की गारंटी बन सकता है.

रूस को क्या फायदा होगा

रूस के सामने अब बड़ी पेचीदगी है. दशकों से वह बशर अल-असद का समर्थक रहा, लेकिन अब उसे एक ऐसी अंतरिम सरकार से तालमेल बैठाना है जिसमें पूर्व विपक्षी भी शामिल हैं.यही वजह है कि मॉस्को ने सख्ती छोड़कर व्यावहारिक नीति अपनाई है. रूस अब सीरिया की संप्रभुता और एकता की बात करता है और चाहता है कि सत्ता पक्ष और विपक्ष, दोनों राष्ट्रीय संवाद में शामिल हों.

यहां तक कि हयात तहरीर अल-शाम जैसे संगठनों पर भी उसने रुख नरम किया है और सीधे टकराव की जगह बातचीत को तवज्जो दी है. इस बदलाव की वजह सिर्फ राजनीति नहीं बल्कि सुरक्षा भी है। सीरिया में मौजूद मध्य एशियाई और उत्तरी काकेशस के लड़ाके रूस के लिए खतरा हैं. अगर वे तुर्की और जॉर्जिया के रास्ते दागेस्तान तक पहुंच गए, तो मॉस्को की मुश्किलें कई गुना बढ़ जाएंगी.

सरेंडर मोड में अल शरा की सरकार, सीरिया पर फिर से होगा रूस का सीधा कंट्रोल

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