Political – बिहार चुनाव से पहले BJP ने बनाई स्पेशल टीम, नई नियुक्तियों के जरिए जातिगत समीकरण साधने की कवायद- #INA

बिहार चुनाव से पहले BJP ने बनाई स्पेशल टीम, नई नियुक्तियों के जरिए जातिगत समीकरण साधने की कवायद

बिहार में चुनाव प्रभारियों के ऐलान के साथ बीजेपी ने चुनाव में एक और कदम आगे बढ़ाया

बिहार में विधानसभा चुनाव की तारीखों के ऐलान में अब ज्यादा दिन नहीं बचे हैं. राज्य में अपनी सत्ता बचाए रखने के लिए भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने पहले ही अपने दिग्गज नेताओं का फौज उतार रखी है. अब बीजेपी ने विधानसभा चुनाव के लिए अपने चुनाव प्रभारियों का भी ऐलान कर दिया है. केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को बिहार का चुनाव प्रभारी बनाया गया है जबकि केंद्रीय जल शक्ति मंत्री और गुजरात में बीजेपी के अध्यक्ष सीआर पाटिल और उत्तर प्रदेश के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य को सह चुनाव प्रभारी बनाया गया हैं.

बीजेपी ने अपने चुनाव प्रभारियों की नियुक्ति के जरिए बिहार में राजनीतिक संदेश देने की कोशिश करने के अलावा जातीय समीकरण भी साधने की कोशिश की है. जहां धर्मेंद्र प्रधान और केशव प्रसाद मौर्य ओबीसी समुदाय से हैं तो वहीं सीआर पाटिल अगड़ी जाति से हैं. बीजेपी को उम्मीद है कि धर्मेंद्र प्रधान और केशव प्रसाद मौर्य को चुनाव की जिम्मेदारी देने से बिहार की ओबीसी खासकर गैर-यादव ओबीसी वोटरों में अच्छा संदेश जाएगा. बिहार के अति पिछड़े वोटरों में नीतीश कुमार की पकड़ पहले से ही है. साथ ही सहप्रभारी सीआर पाटिल मराठा हैं जिनके जरिए सवर्ण जातियों को संदेश देने की कोशिश है. पिछले चुनाव के दौरान देवेंद्र फडणवीस बिहार के चुनाव प्रभारी थे.

धर्मेंद्र प्रधानः संगठन पर मजबूत पकड़, समझ भी जोरदार

ना तो धर्मेंद्र प्रधान के लिए बिहार नया है और ना ही बिहार के लिए धर्मेंद्र प्रधान नए हैं. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के साथ उनकी व्यक्तिगत नजदीकियां हैं. संगठन पर उनकी पकड़ और चुनावी मुद्दों की उनकी समझ जबरदस्त है. संगठन को समझने वाले धर्मेंद्र प्रधान बीजेपी के चुनावी रणनीतिकारों में शामिल हैं. प्रधान पहले भी बिहार के प्रभारी रह चुके हैं. वह साल 2010 में बिहार बीजेपी के सह प्रभारी थे. तब उनको अरुण जेटली और अनंत कुमार जैसे बड़े नेताओं का मार्गदर्शन मिला था. उस समय एनडीए ने चुनाव में 206 सीटों के साथ जीत हासिल की थी.

साल 2014 में बीजेपी के नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री पद के लिए उम्मीदवार बनाए जाने के ऐलान पर जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) ने एनडीए से नाता तोड़ लिया और बीजेपी ने 2015 में विधानसभा चुनाव अकेले ही लड़ा था. तब केंद्रीय मंत्री अनंत कुमार के साथ धर्मेंद्र प्रधान को बिहार का सह प्रभारी बनाया गया था. धर्मेंद्र प्रधान के साथ सीआर पाटिल भी बीजपी के बिहार के लिए चुनाव सह प्रभारी बनाए गए थे. हालांकि तब बीजेपी की हार हुई थी और जेडीयू तथा आरजेडी ने मिलकर सरकार बनाई थी.

पिछले साल 2024 के लोकसभा चुनाव से ऐन पहले जेडीयू की एनडीए में वापसी में भी अमित शाह और धर्मेंद्र प्रधान की अहम भूमिका मानी जाती है.

धर्मेंद्र प्रधान उत्तर प्रदेश, हरियाणा, मध्य प्रदेश, उत्तराखंड और कर्नाटक जैसे राज्यों के चुनाव प्रभारी रह चुके हैं. पिछली बड़ी चुनावी जिम्मेदारी धर्मेंद्र प्रधान के पास हरियाणा विधानसभा चुनाव की थी जो लोकसभा चुनाव के कुछ समय बाद हुआ और बीजेपी के लिए जमीन पर जीत बहुत कठिन मानी जा रही थी. लेकिन सभी को हैरान करते हुए बीजेपी हरियाणा में लगातार तीसरी बार सरकार बनाने में सफल रही. ऐसे ही 2022 के यूपी विधानसभा चुनाव में भी धर्मेंद्र प्रधान को चुनाव प्रभारी बनाया गया और यहां भी बीजेपी लगातार दूसरी बार सरकार बनाने में कामयाब रही.

पीएम मोदी के बेहद भरोसेमंद सीआर पाटिल

केंद्रीय मंत्री और गुजरात में बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष और सीआर पाटिल को पीएम नरेंद्र मोदी का भरोसेमंद माना जाता है. साल 2022 के गुजरात विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने पाटिल की चुनावी रणनीति और सांगठनिक कुशलता के चलते राज्य की 182 में से 156 सीटें हासिल की थी.

इससे पहले पाटिल साल 2015 में भी बिहार के चुनाव सह प्रभारी रह चुके हैं. 2014 के बाद से उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी को भी संभाला. पाटिल मध्य प्रदेश और कर्नाटक के चुनावों में भी विधानसभा सीटों के क्लस्टर पर चुनाव जिताने की भूमिका निभा चुके हैं.

कार्यकर्ताओं की सुनने वाले केशव प्रसाद मौर्य

उत्तर प्रदेश के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य गृह मंत्री अमित शाह के बेहद करीबियों में गिने जाते हैं. साल 2017 के यूपी विधानसभा चुनाव में केशव प्रसाद मौर्य बीजेपी अध्यक्ष थे तब राज्य में बहुमत के साथ बीजेपी की सरकार बनी थी. हालांकि 2022 के विधानसभा चुनाव में हारने के बाद भी केशव मौर्य को प्रदेश का डिप्टी सीएम बनाया गया . केशव मौर्य संगठन के जानकार, कार्यकर्ताओं की सुनने वाले और खरी खरी बोलने वाले नेता माने जाते हैं.


बिहार चुनाव को लेकर की गई इन नियुक्तियों से एक संदेश यह भी गया कि बिहार में आगामी चुनाव की कमान गृह मंत्री अमित शाह के हाथ में ही रहेगी. ये तीनों नेता ऐसे हैं जो चुनावी लड़ाई तो आक्रामक तरीके से लड़ते ही हैं पर अपने सहयोगियों के साथ सामंजस्य और संबंधों में मधुरता रखने के लिए भी जाने जाते हैं.

बिहार चुनाव से पहले BJP ने बनाई स्पेशल टीम, नई नियुक्तियों के जरिए जातिगत समीकरण साधने की कवायद

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