पाकिस्तान में ‘रोटी-कपड़ा-मकान’ का संकट, आटा 135 रुपये प्रति किलो के पार; भूख से तड़प रहे लोग
पाकिस्तान में गेहूं और आटे की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई हैं। थोक बाजार में गेहूं 90 रुपये किलो और चक्की आटा 135 रुपये किलो हो गया है। जलवायु आपदाओं, सरकारी नीतिगत विफलताओं और विदेशी मुद्रा संकट ने हालात बिगाड़ दिए हैं। भूख से बड़े पैमाने पर अशांति और राजनीतिक अस्थिरता का खतरा है।
HighLights
चक्की आटा 135 रुपये किलो, महीनों में 20 बढ़ा।
सरकार ने 33.47 मिलियन टन गेहूं का दावा किया।
मानसूनी बारिश से फसलें डूबीं, 20 लाख विस्थापित।
एजेंसी, इस्लामाबाद। पाकिस्तान इन दिनों इतिहास के सबसे गंभीर भूख संकट का सामना कर रहा है। गेहूं और आटे की कीमतों में लगातार उछाल से हालात बिगड़ते जा रहे हैं। सरकार भले ही पर्याप्त स्टॉक का दावा कर रही हो, लेकिन हकीकत यह है कि कराची समेत देशभर में गेहूं थोक बाजारों में रिकॉर्ड दामों पर बिक रहा है। इससे आम जनता की रोटी तक पहुंच खतरे में पड़ गई है। भूख व राजनीतिक अस्थिरता का खतरा मंडरा रहा है।
कराची में थोक गेहूं का भाव 90 रुपये किलो पहुंच गया है, जो जुलाई में 62 और अगस्त के मध्य में 72 रुपये किलो था। चक्की आटा थोक बाजार में 135 रुपये किलो तक पहुंच गया है। इसमें एक महीने से भी कम समय में 20 रुपये किलो की बढ़ोतरी हुई है।
फाइन आटा 103 रुपये किलो और 10 किलो गेहूं आटे का पैकेट 794 रुपये का हो गया है, जबकि 20 किलो पैकेट 1,700 से 2,100 रुपये के बीच बिक रहा है। व्यापारियों ने कहा कि अगर तुरंत कदम नहीं उठाए गए, तो अगले कुछ महीनों में आटे के दाम 200 रुपये किलो पार कर सकते हैं।
सरकार बनाम बाजार की सच्चाई
फेडरल फूड सिक्योरिटी मंत्री राणा तनवीर हुसैन का दावा है कि देश में 33.47 मिलियन टन गेहूं मौजूद है और आयात की जरूरत नहीं है। उद्योग जगत और मिलर्स इस दावे को गलत बता रहे हैं। कराची होलसेलर्स ग्रोसर्स एसोसिएशन के चेयरमैन रऊफ इब्राहीम का कहना है कि असल उत्पादन 29–30 मिलियन टन है, जिसमें से 3–4 मिलियन टन तो पशुओं के चारे में चला गया। उनका आरोप है कि सरकार की नीतियों ने कृत्रिम संकट खड़ा कर दिया है।
जलवायु परिवर्तन
भारी मानसूनी बारिश ने हजारों एकड़ फसल डुबो दी है। 20 लाख से ज्यादा लोग विस्थापित हुए हैं। अब तक 50 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। बाढ़ का पानी सिंध की ओर बढ़ रहा है। संयुक्त राष्ट्र ने चेतावनी दी है कि यह केवल प्राकृतिक आपदा नहीं है। यह जलवायु परिवर्तन का असर है।
आर्थिक संकट से जुड़ा गेहूं संकट
विदेशी मुद्रा भंडार पहले ही 9 अरब डॉलर से नीचे हैं। पाकिस्तान को गेहूं आयात करना पड़ा, तो 1.5 अरब डॉलर से ज्यादा का खर्च आएगा। 2023 में पाकिस्तान ने 2.2 मिलियन टन गेहूं खरीदा था। 2024–25 में 3 मिलियन टन से अधिक की कमी की आशंका है। विश्व बैंक ने इस साल 20 अरब डॉलर का पैकेज घोषित किया है, जिससे पाकिस्तान को जलवायु-प्रतिरोधी कृषि और सिंचाई सुधार में मदद मिल सके।
भूख से अशांति का डर
पाकिस्तान की 72% आबादी की कैलोरी खपत गेहूं पर आधारित है। इस समय नान और रोटी बेचने वाले दाम बढ़ाने की तैयारी कर रहे हैं। कराची के एक व्यापारी ने जानकारी दी कि अगर यही हाल रहा तो करोड़ों परिवारों के लिए आटा पहुंच से बाहर हो जाएगा, जिससे बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन भड़क सकते हैं।
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