CG News: 2 दशक, 26 अटैक 150 जवानों का कातिल… हिडमा को मिला कर्मदंड, ऐसे क्लोज हुआ ‘लाल आतंक’ का काला चैप्टर- #INA

एनकाउंटर में मारा गया नक्सली माडवी हिडमा.
एक तरफ सुरक्षा एजेंसियां तेजी से जांच करते हुए आतंक के नेटवर्क की कमर तोड़ रही है. तो दूसरी सुरक्षाबलों ने आज कुछ ऐसा किया जिससे बचे-खुचे नक्सलवाद की आखिरी नस भी कट गई. आज देश के सबसे खूंखार नक्सली कमांडर को सुरक्षाबलों ने मृत्युदंड दिया है. एक ऐसे नक्सली कमांडर का The End हुआ है जो पिछले करीब 20 साल में 26 से ज्यादा हमले कर चुका था. 150 से ज्यादा सुरक्षाबलों की जान ले चुका था. इस नक्सली कमांडर का नाम था माडवी हिडमा, जो आज छत्तीसगढ़-आंध्र प्रदेश बॉर्डर पर मरेड मिल्ली जंगल में एनकाउंटर के दौरान मारा गया.
इस नक्सली कमांडर का खूनी इतिहास जानेंगे तो आपको इस बात का सही-सही अंदाजा हो जाएगा कि इसका मारा जाना क्यों जरूरी था. हिडमा ने सिर्फ 16 वर्ष उम्र में ही हथियार उठा लिए थे. तब से अब तक माडवी हिडमा खौफ का दूसरा नाम बना हुआ था. सबसे पहले हिडमा का नाम 2007 में रानी बोदली अटैक में आया. जब छत्तीसगढ़ के बीजापुर में नक्सलियों ने सोते हुए जवानों पर पेट्रोल बम से हमला किया. छत्तीसगढ़ पुलिस और आर्म्ड फोर्स के 55 जवान शहीद हुए थे.
2010 में दंतेवाड़ा में सुरक्षबलों पर हमला
इसके बाद उसने इतिहास के सबसे बड़े नक्सली हमले की साजिश की. ये साल था 2010, जब छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा में सुरक्षबलों पर हमला हुआ. 76 जवान शहीद हो गए. इसके बाद तो हिडमा नक्सलियों का हीरो बन गया. मई 2013 में छतीसगढ़ की झीरम घाटी में कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा पर हमला हुआ. अचानक हुई गोलीबारी में कांग्रेस के कई बड़े नेताओं समेत 27 लोगों की मौत हुई. इसकी प्लानिंग भी हिडमा ने की.
साल 2021 में हिडमा ने सुकमा-बीजापुर में फिर सुरक्षाबलों को निशाना बनाया. हमले में 22 जवान शहीद हो गए. जिस हिडमा ने इतने गहरे जख्म दिए वो सुरक्षाबलों की हिट लिस्ट में था. सुरक्षाबल उसे लगातार ट्रैक करने की कोशिश कर रहे थे. आखिरकार हिडमा की आवाजाही से जुड़ा जरूरी इनपुट मिल गया, जिसे करीब 34 घंटे तक ट्रैक किया गया. जैसे ही उसकी लोकेशन कन्फर्म हुई.
रात करीब 2 बजे शुरू हुआ ऑपरेशन
इसके बाद चारों तरफ से ऐसी घेराबंदी की गई जहां से हिड़मा के बच निकलने की किसी भी आशंका को खत्म किया जा सके. बताया जा रहा है कि ये पूरा ऑपरेशन रात करीब 2 बजे शुरू हुआ. 4 घंटे मुठभेड़ चली जिसके बाद हिडमा और उसकी पत्नी के साथ साथ 4 दूसरे नक्सली भी मार गिराए गए. माडवी हिडमा का असली नाम संतोष था. वो प्रतिबंधित संगठन कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया माओवादी में कई अहम पदों पर रहा.
फिर माओवादियों की बटालियन नंबर एक का कमांडर बन गया जो नक्सलियों की सबसे खतरनाक टुकड़ी मानी जाती है. जिसका काम सुरक्षाबलों पर हमले करना है. कई हमलों के बाद हिडमा पर एक करोड़ रुपये का इनाम घोषित किया गया. आखिरकार आज उसे अपने तमाम अपराधों की सजा मिल गई. हिडमा के एनकाउंटर में मारे जाने के बाद सुकमा में जश्न मनाया गया. जैसे ही उसके मारे जाने की खबर आई, लोगों ने पटाखे जलाकर खुशी मनाई. हिडमा छत्तीसगढ़ के सुकुमा जिले का रहने वाला था.
बचपन से जानता था जंगल का भूगोल
हिडमा को दंतेवाड़ा, सुकमा, बस्तर के घने जंगलों की पूरी जानकारी थी. इस इलाके का पूरा भूगोल वो बचपन से जानता था. इसलिए बार-बार कैंप बदलकर वो सुरक्षाबलों को चकमा दे रहा था. कई बार सुरक्षाबल उसके कैंप तक तो पहुंचते लेकिन वह कुछ ही मिनट पहले वहां से निकल चुका होता लेकिन लाल आतंक को मिट्टी में मिलाने वाले संकल्प के आगे हिडिमा की एक नहीं चली.
बताया जा रहा है कि गृहमंत्री अमित शाह ने सुरक्षाबलों को हिडमा को खत्म करने के लिए 30 नवंबर तक की डेडलाइन दी थी. इसके बाद घने जंगलों में सर्च ऑपरेशन तेज किया गया. इसी ऑपरेशन में हिडमा डेडलाइन से 12 दिन पहले ही मारा गया. आपको बता दें कि देश को नक्सलवाद से पूरी तरह मुक्त करने की डेडलाइन 31 मार्च 2026 है.
बच जाता अगर मान लेता मां की बात
वैसे माडवी हिडमा अगर एक हफ्ते पहले अपनी मां की बात मान लेता, हिंसा का रास्ता छोड़ देता तो शायद आज जिंदा होता. पिछले हफ्ते छत्तीसगढ़ के डिप्टी सीएम विजय शर्मा ने हिडमा की मां मडवी पुंजी से मुलाकात की थी. इस दौरान हिडमा की मां ने एक भावुक वीडियो अपील की थी. कहा था कि बेटा जहां भी हो घर लौट आओ और सरेंडर कर दो.
ये एक सबक है उन नक्सलियों के लिए भी है जो अभी भी हिंसा के रास्ते पर हैं. क्योंकि सुरक्षा बल अब किसी भी हाल में नक्सलियों को बख्सने के मूड में नहीं हैं. अगर इसी वर्ष की बात करें तो 312 नक्सलियों की एनकाउंटर में मौत हो चुकी है. 835 नक्सली गिरफ्तार किए जा चुके हैं. जबकि 1639 ने सरेंडर कर दिया है. नक्सलवाद अब सिर्फ देश के कुछ जिलों तक ही सिमट चुका है.
नक्सलवाद की आखिरी नस कटी
इसी वर्ष डेढ़ करोड़ के इनामी नक्सल कमांडर बसवा राजू को मारा जा चुका है. जून 2025 एक करोड़ का इनामी नक्सली सुधाकर भी एनकाउंटर में मारा गया. अब हिडमा के एनकाउंटर ने एक तरह से नक्सलवाद की आखिरी नस काट दी है. शायद अब वो वो दिन दूर नहीं जब नक्सवाद की सांसें पूरी तरह थम जाएंगी.
ब्यूरो रिपोर्ट टीवी9 भारतवर्ष.
2 दशक, 26 अटैक 150 जवानों का कातिल… हिडमा को मिला कर्मदंड, ऐसे क्लोज हुआ ‘लाल आतंक’ का काला चैप्टर
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