CG News: इंस्पेक्टर बनने के बाद पता चला ‘बचपन का अपराध’, चली गई नौकरी; कोर्ट बोला-क्राइम के समय युवक नाबालिग था…फिर से मिली जॉब- #INA

सांकेतिक तस्वीर
छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में एक फूड इंस्पेक्टर को बर्खास्त कर दिया गया था. वह भी एक 22 साल पहले केस के चलते. ऐसे में इंस्पेक्टर ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया और न्याय की मांग की. कोर्ट ने उनकी दलील सुनी और उनकी बर्खास्तगी के आदेश को रद्द कर दिया. कोर्ट की ओर से कहा गया कि जब इंस्पेक्टर के ऊपर केस दर्ज हुआ था. तब वह नाबालिग थे.
दरअसल, ये मामला छत्तीसगढ़ से सामने आया है. जहां पेंड्र रोड में रहने वाले प्रहलाद प्रसाद राठौर को बचपन में पड़ोसी से हुई लड़ाई की वजह अपनी नौकरी से हाथ धोना पड़ गया. साल 2002 में दर्ज एक केस के आधार पर 2024 में उन्हें नौकरी से निकाल दिया गया. 2002 में वह नाबालिग थे. प्रहलाद प्रसाद राठौर 5 साल भारतीय नौसेना में सेवा दे चुके हैं.
2018 में हुए थे फूड इंस्पेक्टर के पद पर नियुक्त
30 अगस्त 2018 को प्रहलाद प्रसाद भूतपूर्व सैनिक कोटे से फूड इंस्पेक्टर के पद पर नियुक्त हुए थे. इसके बाद उन्होंने अपनी सेवाएं दीं और अपने फर्ज का बखूबी निभाया, लेकिन 15 मार्च 2024 पुलिस वेरिफिकेशन रिपोर्ट के आधार पर उन्हें सेवा से हटा दिया गया था. कहा गया कि प्रहलाद प्रसाद के खिलाफ पुराने क्रिमिनल केस दर्ज हैं. इसलिए वह सरकारी नौकरी के लिए योग्य नहीं हैं.
इसके बाद वह हाईकोरट पहुंचे. उन्होंने याचिका दायर की, लेकिन सिंगल बेंच की ओर से जनवरी 2025 में उनकी याचिका को खारिज कर दिया गया. इसके बाद उन्होंने डिवीजन बेंच में अपील की. उन्होंने अपील में कहा कि उनके खिलाफ 2002 में केस दर्ज हुआ था, जो 2007 में खत्म भी हो गया था. उस समय फूड इंस्पेक्टर नाबालिग थे और पड़ोसी से मामूली झगड़े के चलते ये केस दर्ज हुआ था.
बर्खास्तगी के समय नहीं नहीं सुना गया पक्ष
इसके साथ ही अपील में ये भी कहा गया कि साल 2002 में दर्ज हुए केस में कोई जांच नहीं हुई थी और न ही कोर्ट की ओर से कोई दोषसिद्धी हुई थी. वहीं, जब इस आधार पर बर्खास्तगी की गई तो उनका पक्ष नहीं सुना गया और उनसे बिना कोई जवाब मांगे बर्खास्त कर दिया गया. उन्होंने बताया कि भारतीय नौसेना में सेवा के दौरान उनका उनके चरित्र और आचरण बहुत अच्छा रहा.
चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस बीड़ी गुरु की डिवीजन बेंच ने कहा कि जिस आधार पर उन्हें नौकरी से हटाया गया. वह सही नहीं है. उनके नाबालिग रहते हुए केस दर्ज हुआ था, जिसका 2007 में ही निपटारा हो गया था और उन्होंने 2018 से सेवा शुरू की. ऐसे में पुराने मामले के आधार पर चरित्र को अगोग्य बताना मनमाना है. जुवेनाइल जस्टिस एक्ट के तहत उन्हें सभी अयोग्यताओं से छूट मिलती है.
इंस्पेक्टर बनने के बाद पता चला ‘बचपन का अपराध’, चली गई नौकरी; कोर्ट बोला-क्राइम के समय युवक नाबालिग था…फिर से मिली जॉब
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