CG News: ‘फटी-पुरानी किताबों से पढ़ा रहे’… धमतरी के टीचर को वॉट्सऐप स्टेटस लगाना पड़ा भारी, हो गया सस्पेंड- #INA

धमतरी में वॉट्सऐप
स्टेट्स लगाने पर शिक्षक निलंबित
छत्तीसगढ़ के धमतरी में शिक्षा विभाग द्वारा एक शिक्षक के खिलाफ निलंबन का आदेश जारी किए जाने के बाद से हड़कंप मच गया. दरअसल, यह एक्शन शिक्षक द्वारा वॉट्सऐप पर स्टेट्स लगाने के बाद हुआ. वहीं अब ये सवाल उठ रहा है कि आखिर उस स्टेट्स में ऐसा क्या था कि शिक्षक को निलंबित होना पड़ा. आइए जानते हैं कि आखिर पूरा मामला क्या है…
दरअसल, एक शिक्षक ने शिक्षा व्यवस्था पर ही सवाल खड़े कर दिए जो विभागीय अधिकारियों को नागवार गुजरा. शिक्षक ने अपने स्कूल के बच्चों की समस्या को स्टेट्स के जरिए उजाकर करने की कोशिश की थी. स्कूली बच्चों को पढ़ने के लिए शिक्षा विभाग की ओर दी जाने वाली किताबें स्कूल में नहीं पहुंची थीं. इसी समस्या पर शिक्षक ने अपनी पीड़ा स्टेट्स के द्वारा व्यक्त की. जिस पर शिक्षा विभाग के अधिकारी आग बबूला हो गए और शिक्षक को ही निलंबित करने का आदेश जारी कर दिया. वहीं जारी आदेश के बाद शिक्षकों में हड़कंप मच गया.
क्यों जारी हुआ निलंबन का आदेश?
धमतरी में शिक्षा विभाग ने एक ऐसे शिक्षक को निलंबित कर दिया, जिसने राज्योत्सव की चमक-दमक के बीच शिक्षा व्यवस्था की हकीकत उजागर कर दी. कुरूद ब्लॉक के ग्राम नारी प्राथमिक शाला में पदस्थ सहायक शिक्षक ढालू राम साहू ने अपने वॉट्सऐप स्टेटस में प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था, जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों के रवैये पर टिप्पणी की थी. विभाग ने इस पोस्ट को शासन के कार्यों के विरुद्ध मानते हुए तत्काल प्रभाव से निलंबन का आदेश जारी कर दिया. निलंबन आदेश में कहा गया कि शिक्षक ने बच्चों की शिक्षा व्यवस्था ठप्प है और हम चले राज्योत्सव मनाने. जैसी टिप्पणी कर शिक्षकीय आचरण का उल्लंघन किया है.
कार्रवाई के बाद उठ रहे सवाल
छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियम 1965 के तहत कार्रवाई करते हुए उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है. लेकिन इस कार्रवाई के बाद कई बड़े सवाल खड़े हो रहे हैं. क्या किसी सरकारी कर्मचारी को अपने क्षेत्र की वास्तविक समस्याओं की ओर ध्यान आकर्षित करने का अधिकार नहीं है? क्या स्कूल में बच्चों को किताबें न मिलना शासन विरोधी टिप्पणी कहलाएगा या व्यवस्था की सच्चाई?
शिक्षा अधिनियम 2005 के अनुसार, हर बच्चे को निशुल्क और अनिवार्य शिक्षा का अधिकार है. इस अधिनियम के तहत सरकार की जिम्मेदारी है कि सभी बच्चों को किताबें, यूनिफॉर्म और अध्ययन सामग्री समय पर उपलब्ध कराई जाए. लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है.
‘फटी-पुरानी किताबों से पढ़ा रहे’… धमतरी के टीचर को वॉट्सऐप स्टेटस लगाना पड़ा भारी, हो गया सस्पेंड
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