CG News: देश से नक्सलवाद पूरी तरह होगा खत्म, गृह मंत्री अमित शाह ने तय की डेडलाइन- #INA

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शनिवार को कहा कि नक्सलवाद से किसी को फायदा नहीं होता- न तो हथियार उठाने वालों को और न ही सुरक्षाकर्मियों को, और केवल शांति ही विकास का मार्ग प्रशस्त कर सकती है. उन्होंने एक बार फिर इस बात पर बल दिया कि 31 मार्च, 2026 तक देश से नक्सलवाद पूरी तरह खत्म हो जाएगा.

अमित शाह ने राज्य के बस्तर जिले के मुख्यालय जगदलपुर में इंदिरा प्रियदर्शिनी स्टेडियम में बस्तर ओलंपिक-2025 खेल आयोजन के समापन समारोह को संबोधित करते हुए माओवादियों से अनुरोध किया कि वे हथियार डाल दें और समाज की मुख्यधारा में शामिल हो जाएं.

लाल आतंक को खत्म करने का फैसला

उन्होंने कहा कि सरकार ने 31 मार्च, 2026 से पहले पूरे देश से लाल आतंक को खत्म करने का फैसला किया है, यह लक्ष्य अब प्राप्ति के करीब है. अमित शाह ने कहा कि आज मैं बस्तर में आया हूं तब मुझसे ज्यादा आनंद किसी व्यक्ति को नहीं हो सकता है. हमने तय किया था कि 31 मार्च 2026 के पहले पूरे देश से लाल आतंक को खत्म कर देंगे, और आज बस्तर ओलंपिक 2025 में हम इसके कगार पर खड़े हैं. मैं 2024 में भी आया था, 2025 में भी आया हूं और 2026 में भी आऊंगा, यह मेरा वादा है. परंतु, जब मैं 2026 में बस्तर ओलंपिक के लिए पहुंचूंगा, तब तक छत्तीसगढ़ और पूरे देश से नक्सलवाद का सफाया हो चुका होगा.

विकास पर नाग बनकर फन फैलाए बैठे

केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि जिन्होंने आत्मसमर्पण किया है और जो नक्सलवाद के कारण घायल हुए हैं, उनके लिए एक बहुत आकर्षक पुनर्वसन योजना भी हम लाएंगे. हमारा लक्ष्य है कि नक्सलवाद खत्म हो क्योंकि नक्सलवादी इस क्षेत्र के विकास पर नाग बनकर फन फैलाए बैठे हैं. नक्सलवाद खत्म होने के साथ ही इस क्षेत्र में विकास की एक नई शुरुआत होगी और पीएम मोदी तथा सीएम विष्णु देव के नेतृत्व में यह सबसे विकसित क्षेत्र बनेगा.

केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि मैं इस मंच से जितनी दृढ़ता के साथ यह कहना चाहता हूं कि 31 मार्च 2026 को यह देश नक्सलवाद से मुक्त होगा, इतनी ही विनम्रता से मैं अपील करना चाहता हूं कि अभी भी गुमराह होकर हमारे ही लोग हाथ में हथियार लेकर बैठे हैं. हथियार डाल दीजिए पुनर्वास नीति का फायदा उठाइए. अपने और अपने परिवार के कल्याण में जुट जाइए, विकसित बस्तर के संकल्प के साथ आप लोग जुड़ जाइए.

नक्सलवाद से किसी का भला नहीं

उन्होंने कहा कि नक्सलवाद से किसी का भला नहीं होना है. ना नक्सलवाद के लिए हथियार उठाने वाले लोगों का भला होना है, ना आदिवासियों का होना है, ना सुरक्षाबलों का होना है. शांति ही विकास का रास्ता प्रशस्त कर सकती है. अमित शाह ने गुमराह युवाओं से पुनर्वास नीति का फायदा उठाने और सम्मानजनक जीवन जीने का आग्रह किया.

बस्तर में बदलाव को रेखांकित करते हुए अमित शाह ने कहा कि डर की जगह अब उम्मीद ने ले ली है, जहां कभी गोलियों की आवाजें गूंजती थी, वहां अब स्कूलों की घंटियां बजती हैं, और जहां विकास कभी एक दूर का सपना था, वहां अब सड़कें, रेलवे और राजमार्ग बनाए जा रहे हैं. उन्होंने कहा कि ‘लाल सलाम’ के नारों की जगह ‘भारत माता की जय’ के नारे लग रहे हैं, जो एक बड़े बदलाव का संकेत है.

हथियारबंद कैडरों के साथ मुठभेड़

अमित शाह ने कहा कि हम सब विकसित बस्तर के लिए संकल्पित है. इस अभियान में, छत्तीसगढ़ सरकार और केंद्र सरकार ने सिर्फ़ हथियारबंद कैडरों के साथ मुठभेड़ करने और उन्हें मारने का लक्ष्य नहीं रखा था. पिछले दो वर्षों में दो हजार से अधिक नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है. मैं आज आपको कहना चाहता हूं, हमारे आदिवासी समाज के प्रमुखों ने बहुत बड़ा योगदान दिया है.

उनके मार्गदर्शन ने नक्सली युवाओं को हथियार छोड़ने का साहस और ताकत दी है, और राज्य सरकार ने भी आगे बढ़कर मदद की है. आज, मैं समुदाय के सभी नेताओं से अपील करता हूं कि जो लोग अभी भी हथियार लिए हुए हैं, उन्हें समझा-बुझाकर मुख्यधारा में वापस लाने के लिए काम करें.

नए भारत और विकसित बस्तर की संकल्पना

बस्तर ओलंपिक को लेकर केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि आत्मसमर्पण कर चुके 700 नक्सलियों ने इन खेलों में खिलाड़ी के रूप में सामने आकर पूरे देश के लिए बहुत बड़ा उदाहरण प्रस्तुत किया है. इन खिलाड़ियों ने भय की जगह आशा चुनी, विभाजन की जगह एकता का रास्ता चुना और विनाश की जगह विकास का रास्ता चुना है और यही प्रधानमंत्री मोदी की नए भारत और विकसित बस्तर की संकल्पना है.

उन्होंने कहा कि हमारे बस्तर की संस्कृति दुनियाभर में सबसे अधिक समृद्ध संस्कृति है. उन्होंने कहा कि सभी जनजातियों का खानपान, परिवेश, कला, वाद्य, नृत्य और पारंपरिक खेल सिर्फ छत्तीसगढ़ की नहीं बल्कि पूरे भारत की सबसे समृद्ध विरासत है. शाह ने कहा कि हाल ही में छत्तीसगढ़ सरकार ने आधुनिक रिकॉर्डिंग स्टूडियो बनाकर यहां के पारंपरिक गीतों को सहेजने का काम किया है. ऐसे कई परंपरागत उत्सव और त्योहार जो नक्सलवाद के लाल आतंक के साए में समाप्त होने की कगार पर थे, उन्हें भी आगे बढ़ाया गया है.

देश से नक्सलवाद पूरी तरह होगा खत्म, गृह मंत्री अमित शाह ने तय की डेडलाइन

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