Political – GST में बदलाव से मिलेगा बूस्टर डोज! आर्थिक घाटा सहकर सियासी मुनाफा कमाएगी सरकार?- #INA

GST में बदलाव से मिलेगा बूस्टर डोज! आर्थिक घाटा सहकर सियासी मुनाफा कमाएगी सरकार?

कांग्रेस सांसद राहुल गांधी और पीएम मोदी

केंद्र की मोदी सरकार ने GST के मोर्चे पर लोगों को बड़ी राहत दी है. सरकार ने 4 स्लैब को कम करके अब सिर्फ 2 ही रखा है. 5 और 18 प्रतिशत. इससे कई सामान सस्ते हो जाएंगे. अपने इस फैसले से सरकार ने बता दिया है कि वो जनता को राहत देने के लिए आर्थिक घाटा सहने का तैयार है. बताया जा रहा है इससे सरकार के रेवेन्यू में 48 हजार करोड़ की कमी आएगी. सरकार ने ये कदम ऐसे समय उठाया है कि जब अगले कुछ ही महीनों में बिहार में विधानसभा के चुनाव होने हैं. उससे पहले सरकार SIR, वोट चोरी जैसे मुद्दे पर विपक्ष के निशाने पर है. राजनीतिक जानकार कह रहे हैं कि सरकार को भले ही इससे आर्थिक घाटा हो, लेकिन सियासी मुनाफा हो सकता है.

बिहार के लोगों को जागरुक करने के लिए कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने वोटर अधिकार यात्रा निकाली. महागठबंधन के मुताबिक, ये यात्रा हिट रही है. वीडियो शेयर कर बताया गया कि राहुल की यात्रा में लाखों की भीड़ जुटी. राहुल जहां जाते वहां भीड़ जुट जाती. कांग्रेस प्रवक्ताओं ने कहा कि इस यात्रा ने बिहार कांग्रेस में जान फूंकने का काम किया.

क्या राहुल की ‘हिट’ यात्रा पर भारी पड़ेगा ये दांव?

राहुल की इस यात्रा की वाहवाही के बीच ही सरकार ने आम जनता को बड़ी राहत दी. जिस सोशल मीडिया और मेनस्ट्रीम मीडिया में वोटर अधिकार यात्रा की चर्चा चल रही थी, वहां पर जीएसटी पर चर्चा होने लगी. बीजेपी और उसके वोटर एक्टिव हो गए. विपक्ष पर हावी होने लगे. इसे सरकार की सफलता बताने लगे.

खुद पीएम मोदी ने कहा कि जीएसटी 2.0 देश के सपोर्ट और ग्रोथ के लिए डबल डोज है. इससे हर परिवार को बड़ा फायदा होगा. आम जनता को इसका लाभ 22 सितंबर यानी नवरात्र से मिलेगा. ये वो वक्त होगा जब बिहार चुनाव और नजदीक होगा. दिवाली और छठ करीब होगा. लोगों के जुबान पर राहुल की यात्रा तो होगी है, साथ ही सरकार का GST वाला दांव भी होगा.

साइड होगा SIR-वोट चोरी का मुद्दा?

SIR और वोट चोरी के मुद्दे पर राहुल और महागठबंधन सरकार पर हमलावर है. उनका दावा है कि चुनाव आयोग सरकार के इशारे पर काम कर रही है और लोगों के वोट काटे जा रहे हैं. राहुल ने बाकायदा इसपर प्रेजेंटशन भी दिया. लगभग हर रोज वह चुनाव आयोग पर निशाना साधते हैं. इस मुद्दे पर विपक्ष फ्रंटफुट पर है. इसी बीच सरकार ने आम जमता को तोहफा दे दिया.

जीएसटी में बदलाव के बाद ही सत्तापक्ष और विपक्ष में बहसबाजी का ट्रैक भी बदल गया. जिस SIR-वोट चोरी पर वार पलटवार हो रहा था उसको छोड़कर अब GST पर डिबेट होने लगी. कांग्रेस राहुल के पुराने पोस्ट रिपोस्ट करने लगी. सरकार मल्लिकार्जुन खरगे और जयराम रमेश के निशाने पर आ गई, लेकिन बीजेपी ने भी पलटवार में देरी नहीं की.

विपक्ष की आलोचना का जवाब देते हुए केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि कांग्रेस नकारात्मकता फैला रही है. गोयल ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा, दुख की बात है कि जिस तरह राहुल गांधी यह नहीं समझते कि पहली तिमाही में 7.8% की वृद्धि के साथ दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था का होना खुशी, आनंद और उत्सव का विषय है और दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था होने के बावजूद भारत को एक डेड इकॉनोमी कहते हैं, यह कुछ खास लोगों की नकारात्मक सोच है और मैं इस तरह की नकारात्मकता की निंदा करता हूं. हालांकि इतना तो साफ है कि बीजेपी जहां जीएसटी से मिलने वाली राहत को बिहार में घर-घर पहुंचाएगी वहीं कांग्रेस SIR और वोट चोरी पर भी पीछे नहीं हटेगी.

टैरिफ और चीन मुद्दे की काट!

टैरिफ के कारण अमेरिका से बिगड़े संबंधों को लेकर सरकार विपक्ष के निशाने पर है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप हर रोज भारत को लेकर नया दावा करते हैं और उनके ही दावों का सहारा लेकर विपक्ष सरकार को घेरता है. टैरिफ बढ़ने से कई लोगों की रोजी-रोटी पर संकट आ गया था, लेकिन अब सरकार ने सामानों को सस्ता करके आम से लेकर अमीरों तक को बड़ी राहत दी है.

एक ओर जहां अमेरिका से संबंध खराब हुए वहीं दूसरी ओर चीन के साथ रिश्ते मजबूत हुए हैं. हाल ही में जब पीएम मोदी SCO समिट में हिस्सा लेने के लिए तियानजिन गए थे तब उन्होंने चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात की थी. इसपर कांग्रेस ने सरकार पर हमला बोला था. उसने कहा कि हमारे 20 जवानों की जान लेने वाले चीन से पीएम मोदी दोस्ती बढ़ा रहे हैं. वो जिनपिंग से हंसकर मिल रहे हैं. चीन के मुद्दे पर घिरी सरकार को अब आक्रामक होने का मुद्दा मिल गया है.

महंगाई और बेरोजगारी… ये ऐसे मुद्दे रहे हैं जो सरकार के लिए परेशानी पैदा करते रहे हैं. इन दोनों पर सरकार भले ही कुछ भी दावे करे, लेकिन विपक्ष ने बीते 11 साल में कई बार इसपर उसे घेरा है. बिहार के चुनाव में भी ये बड़ा मुद्दा बन रहा है. लेकिन इसी बीच सरकार ने ऐसा कदम बढ़ाया जिसे मास्टरस्ट्रोक बताया जा रहा है. सरकार का ये फैसला बिहार में घर-घर को हिट करेगा. चाहे गरीब हो या अमीर हर किसी को इसका फायदा है. युवाओं से लेकर किसानों तक को फायदा पहुंचने की बात कही जा रही है.

सरकार लंबे समय से अर्थव्यवस्था को गति देने के लिए उपभोग बढ़ाने के प्रयास कर रही है और आयकर में कटौती इसी दिशा में एक कदम है. लेकिन जीएसटी का असर आयकर से ज़्यादा लोगों पर पड़ता है. आखिरकार सरकार को बदलाव करने के लिए जिस बात ने राजी किया, वह थी मांग बढ़ाने की जरूरत. अगर सामान सस्ता हो जाता है, तो लोगों के पास ज्यादा पैसा बचेगा, जिससे खपत बढ़ेगी. इससे कंसप्शन ड्राइव बढ़ेगा. लोगों के पास ज्यादा पैसा होने का मतलब है वस्तुओं की मांग. ज्यादा मांग का मतलब है ज्यादा उत्पादन, यानी उद्योग जगत में ज्यादा निवेश और रोजगार सृजन. ज्यादा रोजगार वाले लोगों का मतलब है खर्च करने के लिए और ज्यादा पैसा और यह चक्र चलता रहता है. ऐसे में कहा जा सकता है कि सरकार ने जीएसटी वाला दांव चलकर एक तीर से कई निशाने साधा है.

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