Crime- बिहार: MIT मुजफ्फरपुर में एक और जूनियर से रैगिंग, सीनियर्स ने की गंदी हरकत; डिप्रेशन में छात्र

बिहार: MIT मुजफ्फरपुर में एक और जूनियर से रैगिंग, सीनियर्स ने की गंदी हरकत; डिप्रेशन में छात्र

बिहार के मुजफ्फरपुर स्थित एमआईटी (मुजफ्फरपुर इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी) में एक बार फिर रैगिंग का मामला सामने आया है. इस बार भी प्रथम सेमेस्टर के एक छात्र के साथ आठ सीनियर छात्रों ने रैगिंग किया है. इस दौरान आरोपी छात्रों ने ना केवल जूनियर के साथ बर्बरतापूर्ण तरीके से मारपीट की, बल्कि गाली गलौज करते हुए उसके साथ अश्लील हरकत भी की. इस वारदात की वजह से पीड़ित छात्र डिप्रेशन में चला गया है. छात्र ने इस संबंध में एआईइसीटीई (अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद के एंटी रैगिंग सेल) में शिकायत दी है.

एआईईसीटीई ने मामले की गंभीरता को देखते हुए कॉलेज प्रबंधन को पीड़ित छात्र की काउंसिलिंग कराने और आरोपियों की पहचान कर उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने के आदेश दिए हैं. जानकारी के मुताबिक कॉलेज में नया सत्र शुरू होने के बाद यह दूसरी घटना है. नये सत्र में नामांकन के बाद रैगिंग की यह दूसरी घटना है. यह मामला सामने आने के बाद कॉलेज प्रशासन भी हरकत में आ गया है और रैगिंग रोकने के लिए कड़ी कार्रवाई की बात कही जा रही है.

हॉस्टल से कॉलेज तक पीछा करते थे सीनियर

उधर, पीड़ित छात्र ने अपनी शिकायत में बताया कि सीनियर छात्र उसे हमेशा सिर झुका कर रहने के लिए कह रहे थे. वहीं सिर उठाने पर उसके साथ मारपीट की जाती थी. स्थिति यहां तक गई थी कि आरोपी छात्र उसे हॉस्टल से लेकर कॉलेज परिसर तक उसका पीछा करते और उसे प्रताड़ित करते थे. शुरू में तो पीड़ित छात्र ने बर्दाश्त करने की कोशिश की, लेकिन आए दिन हो रहे दुर्व्यवहार से वह इस कदर दुखी हो गया कि अवशाद में चला गया. आखिर में परेशान होकर एआईईसीई में शिकायत कर दी.

तीन साल में 25 छात्रों पर एक्शन

कॉलेज के प्राचार्य डॉ. एमके झा के मुताबिक उन्हें अभी तक रैगिंग की घटना की जानकारी नहीं मिली है. मामला सामने आने पर वह आरोपी छात्रों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराएंगे. बता दें कि नए सत्र में नामांकन के बाद ही एक अन्य छात्र के साथ रैगिंग का मामला सामने आया था. उस समय कॉलेज की अनुशासन समिति ने मामले की जांच की थी और आरोपी छात्रों के अभिभावकों को तलब किया था. रैगिंग के मामले की पुष्टि होने पर बीते दो-तीन वर्षों में दो दर्जन से अधिक छात्रों को ब्लैक डॉट के साथ ही आर्थिक दंड भी लगाया जा चुका है. ब्लैक डॉट को छात्र के प्रमाणपत्र पर अंकित किया जाता है. इससे यहां से निकलने पर उच्च शिक्षा या जॉब के समय उन्हें परेशानी भी होती है.


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