Crime – कानपुर का करोड़पति कानूनगो, 41 संपत्तियां, 1 गलती और अब शिकंजे में… डिमोशन कर बनाया लेखपाल- #INA

कानपुर का करोड़पति कानूनगो, 41 संपत्तियां, 1 गलती और अब शिकंजे में... डिमोशन कर बनाया लेखपाल

कानूनगो आलोक दुबे

तहसील में सबसे छोटी कड़ी लेखपाल और कानूनगो को माना जाता है, लेकिन कानपुर का एक कानूनगो करोड़पति निकला. कानूनगो के पास एक दो नहीं बल्कि 41 संपतियों की जानकारी मिली. इतनी संपत्तियों के बावजूद एक गलती ने उसको शिकंजे में फंसा दिया. डीएम के आदेश पर उसको कानूनगो से डिमोशन करके लेखपाल बना दिया गया है. कानूनगो के ऊपर एक एफआईआर भी दर्ज है.

इसमें जल्द ही चार्जशीट आने की उम्मीद है. करोड़पति कानूनगो का नाम आलोक दुबे है. जानकारी के अनुसार, संदीप सिंह नामक व्यक्ति की शिकायत पर गठित जांच समिति में एडीएम (न्यायिक), एसडीएम सदर और एसीपी कोतवाली शामिल थे. जांच में पाया गया कि सिंहपुर कठार की गाटा संख्या 207 और रामपुर भीमसेन की गाटा संख्या 895 की जमीनें न्यायालय में विचाराधीन थीं.

ये गलती बनी काननूगो के गले की फांस

इन पर न तो विक्रेता का नाम खतौनी में था और न ही बिक्री की वैधानिक अनुमति. फिर भी 11 मार्च 2024 को वरासत दर्ज कर उसी दिन बैनामा कर दिया गया. इसके बाद गाटा 207 को 19 अक्टूबर 2024 को RNG इंफ्रा नाम की निजी कंपनी को बेच दिया गया. बस यही एक गलती आलोक दुबे के लिए गले की फांस बन गई. जांच में सामने आया कि यह पूरा मामला पद का दुरुपयोग, मिलीभगत और हितों के टकराव का है. इस मामले में थाना कोतवाली में मार्च 2025 को एफआईआर भी दर्ज की गई थी.

विभागीय जांच निलंबन के साथ शुरू हुई और चार आरोपों वाला आरोपपत्र मार्च 2025 को जारी किया गया. अगस्त 2025 को आरोपी की व्यक्तिगत सुनवाई हुई. जांच अधिकारी ने पाया कि आलोक दुबे ने विवादित भूमि का अनुचित तरीके से बैनामा किया, लगातार बिना अनुमति संपत्ति खरीद-फरोख्त में शामिल रहे और सरकारी आचरण नियमों का उल्लंघन किया.

डीएम ने आदेश में क्या कहा?

सहायक महानिरीक्षक निबंधन की रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि दुबे की संलिप्तता 41 संपत्तियों तक पहुंची है. डीएम ने आदेश में कहा कि राजस्व अभिलेखों में इस तरह की हेरफेर जनता के विश्वास को तोड़ने वाला अपराध है. इसी कारण दुबे को कानूनगो से हटाकर लेखपाल बनाया गया है. इस मामले में क्षेत्रीय लेखपाल अरुणा द्विवेदी की भूमिका भी संदिग्ध पाई गई है.

आलोक दुबे के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की प्रक्रिया एसडीएम सदर स्तर पर चल रही है. जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि राजस्व प्रणाली में किसी भी प्रकार की धोखाधड़ी, अभिलेखों में छेड़छाड़ या साठगांठ करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी.

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