Delhi-Ncr 130वें संशोधन बिल का विपक्षी दल क्यों कर रहे हैं विरोध? जानिए क्या हैं उनकी दलीलें- #INA

130वें संशोधन बिल का विपक्षी दल क्यों कर रहे हैं विरोध? जानिए क्या हैं उनकी दलीलें

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे.Image Credit source: PTI

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने लोकसभा में बुधवार को संविधान (130वां संशोधन) विधेयक-2025, संघ राज्य क्षेत्र शासन (संशोधन) विधेयक-2025 और जम्मू कश्मीर पुनर्गठन (संशोधन) विधेयक-2025 पेश किए. इसमें प्रधानमंत्री, मंत्रियों और मुख्यमंत्रियों को गंभीर अपराध के आरोपों में गिरफ्तार किए जाने पर पद से हटाने का प्रावधान है. सदन में हंगामे के चलते तीनों विधेयकों को संसद की संयुक्त समिति को भेजने का फैसला लिया गया है. हालांकि, हंगामा थमता नजर नहीं आ रहा है. विधेयक को लेकर विपक्ष सरकार पर हमलावर है. कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने इसे जन विरोधी करार दिया है. बंगाल की सीएम ममता बनर्जी ने तो यहां तक कह डाला कि 130वां संविधान संशोधन विधेयक देश में लोकतंत्र को हमेशा के लिए खत्म कर देगा. आइए जानते हैं कि विपक्ष के किस नेता ने इस विधेयक पर क्या कहा है.

  1. कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने विधेयक का विरोध करते हुए सरकार पर हमला बोला. उन्होंने कहा, ये सरकार ताकत का इस्तेमाल करके जन विरोधी कानून लाने की कोशिश कर रही है. मनमानी तरीके से कानून ला रही है. ये भारतीय संविधान का काला अध्याय है. विपक्ष को बोलने ना देना अधिकारों का हनन है.
  2. पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने एक्स पर एक पोस्ट में दावा किया कि ये विधेयक न्यायपालिका की स्वतंत्रता खत्म कर देगा. उन्होंने कहा, मैं इसे एक सुपर आपातकाल से भी बड़े, देश के लोकतांत्रिक युग को हमेशा के लिए खत्म करने की दिशा में उठाए गए कदम के तौर पर इसकी निंदी करती हूं. यह दमनकारी कदम लोकतंत्र और संघवाद के लिए खतरे की घंटी है. ‘विधेयक का उद्देश्य ‘एक व्यक्ति-एक पार्टी-एक सरकार’ को मजबूत करना है. यह विधेयक संविधान के मूल ढांचे को रौंदता है. लोकतंत्र को बचाने के लिए इस विधेयक का हर कीमत पर विरोध किया जाना चाहिए.
  3. कांग्रेस नेता वी डी सतीशन ने कहा, यह विधेयक देश के कानूनों के मौलिक सिद्धांतों के खिलाफ है. विपक्ष इसका कड़ा विरोध करेगा. मौजूदा कानूनों के अनुसार, कोई व्यक्ति तभी किसी अपराध का दोषी तब माना जाता है, जब उसे अदालत द्वारा दोषी ठहराया जाता है. इस विधेयक को पारित करना न्याय के खिलाफ है. यह कानून के मौलिक सिद्धांतों के खिलाफ है. कोई भी सरकार किसी भी मंत्री के खिलाफ मामला शुरू कर सकती है. खासतौर पर ईडी बहुत विवादास्पद है, सीबीआई बहुत विवादास्पद है. वे विपक्ष के किसी भी मुख्यमंत्री या विपक्ष के किसी भी मंत्री के खिलाफ मामला शुरू कर सकते हैं. ईडी के मामलों में अदालत व्यक्ति को हिरासत में भेजेगी, फिर वह चाहे कोई भी हो.
  4. कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने कहा, मैं इन तीन विधेयकों का विरोध करता हूं, जो प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री, केंद्रीय मंत्रियों और राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों के मंत्रियों को हटाने का कानूनी ढांचा प्रदान करते हैं. यह विधेयक संविधान के मूल ढांचे को पूरी तरह से नष्ट करने वाला है. जब तक दोष साबित न हो जाए, तब तक आप निर्दोष हैं. यह विधेयक न्यायशास्त्र के सिद्धांत के खिलाफ है. यह विधेयक जांच अधिकारी को देश के प्रधानमंत्री का बॉस बनाने वाला है.
  5. मनीष तिवारी ने कहा, यह विधेयक अनुच्छेद 21 का उल्लंघन करता है. इतना ही नहीं यह संसदीय लोकतंत्र, जो मूल ढांचे का हिस्सा है, उसको न्यायिक निर्णय से रहित मात्र हिरासत के माध्यम से जनता की इच्छा को विस्थापित करके विकृत करता है. यह विधेयक राज्य के उन संस्थानों द्वारा राजनीतिक दुरुपयोग का रास्ता खोलता है, जिनके मनमाने आचरण पर सर्वोच्च न्यायालय ने बार-बार आपत्ति जताई है.
  6. कांग्रेस महासचिव (संगठन) केसी वेणुगोपाल ने कहा, मैं इस विधेयक का विरोध करता हूं. भाजपा नेता दावा करते हैं कि इस विधेयक का मकसद राजनीति में नैतिकता लाना है, लेकिन मैं भारत के गृह मंत्री से पूछना चाहता हूं- जब वो गुजरात के गृह मंत्री थे और उन्हें गिरफ़्तारी का सामना करना पड़ा था तो क्या उन्होंने नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा देने के बारे में सोचा था?
  7. विधेयक पर कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने कहा, सत्ता पक्ष की अपने बहुमत का इस्तेमाल करके इस विधेयक को पारित करने की मंशा ठीक नहीं है. इसका इस्तेमाल विपक्ष को निशाना बनाने के लिए एक हथियार के रूप में किया जाएगा. यह एक क्रूर कृत्य है. ऐसे समय में जब चुनाव आयोग पर सवाल उठ रहे हैं, सत्ता पक्ष में घबराहट है और अब उससे ध्यान भटकाने के लिए यह मुद्दा उठाया गया है?
  8. कांग्रेस सांसद रेणुका चौधरी ने कहा, रातोंरात यह विधेयक क्यों लाए? क्योंकि कांग्रेस सड़कों पर उतर आई है इसलिए. यह सिर्फ दिखावा है. बिल्कुल महिला विधेयक की तरह. यह सब सिर्फ नाटक है.
  9. AIMIM सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने कहा, मैं इसका विरोध करता हूं. यह शक्तियों के पृथक्करण के सिद्धांत का उल्लंघन करता है और सरकार चुनने के अधिकार को कमजोर करता है. यह कार्यकारी एजेंसियों को तुच्छ आरोपों और संदेह के आधार पर जज और जल्लाद बनने की खुली छूट देता है. यह सरकार पुलिस राज्य बनाने पर तुली हुई है. यह निर्वाचित सरकार के लिए मौत की कील होगी. इस देश को पुलिस राज्य में बदलने के लिए भारत के संविधान में संशोधन किया जा रहा है.
  10. विधेयक पर जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर ने भी प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने कहा कि यह बिल इसलिए लाया जा रहा है कि जब संविधान बना होगा तब जिन्होंने हमारा संविधान बनाया था उन्हें शायद इस बारे में पता ही नहीं होगा कि सत्ता में बैठे लोग इतने भ्रष्ट हो जाएंगे कि उन्हें जेल जाना पड़ेगा. जहां तक मैं समझता हूं कि यह बिलकुल ठीक है. अगर आप पर कोई आरोप लग रहा है और आप जेल जा रहे हैं तो आप जेल में बैठकर सत्ता नहीं चला सकते हैं.
  11. वहीं, इस विधेयक पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा, एनके प्रेमचंद्रन का कहना है कि विधेयक जल्दबाजी में लाए गए हैं. इसका कोई सवाल ही नहीं है क्योंकि मैं विधेयक को जेपीसी को भेजने का अनुरोध करने वाला हूं. जेपीसी में लोकसभा और राज्यसभा, सत्ता पक्ष और विपक्ष के सदस्य होंगे. वो इस पर विचार-विमर्श करेंगे और इसे आपके सामने लाएंगे.

130वें संशोधन बिल का विपक्षी दल क्यों कर रहे हैं विरोध? जानिए क्या हैं उनकी दलीलें

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