Delhi-Ncr नया मास्टर प्लान, इंटरनेट सर्वे और टेक्नोलॉजी… अगर हो जाएं ये 7 काम तो कभी नहीं डूबेगी दिल्ली- #INA

दिल्ली की सड़कों पर भरे पानी का ये नजारा केवल एक तस्वरी नहीं है बल्कि तीसरी अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ते भारत की राजधानी दिल्ली की दयनीय स्थिति को बयां करती कड़वी सच्चाई है. हालात ऐसे हो चुके हैं कि फ्लाईओवर से लेकर घरों के अंदर तक हर ओर पानी ही पानी है. ये तस्वीर आपको भले ही डरावनी लग रही हों लेकिन दिल्लीवाले हर साल इस परेशानी को देखते और झेलते हैं. अब सवाल उठता है कि आखिर दिल्ली में ऐसा क्या है कि बारिश का पानी शहर से बाहर निकल ही नहीं पाता. क्या दिल्ली का ड्रेनेज सिस्टम पूरी तरह से फेल है?

दिल्ली की इस दुर्दशा और भागौलिक दिक्कत के बारे में बात करते हुए टाउन प्लानर एके जैन ने बताया कि दिल्ली की स्थिति पहले ऐसी नहीं थी. दिल्ली ने तो तेजी से विकास किया लेकिन इसके मास्टर प्लान पर कभी भी किसी सरकार ने ध्यान नहीं दिया. राजधानी में भीड़ बढ़ती गई और ड्रेनेज सिस्टम सिकुड़ता गया. सरकारें बदलती रहीं और हर सरकार के साथ ही इसे सुधारने के लिए नए विभाग भी बनते रहे. अब तक दिल्ली में जलभराव की समस्या को दूर करने के लिए 14 से अधिक स्टेट और सेंट्रल डिपार्टमेंट हैं लेकिन कोई भी विभाग एक साथ मिलकर काम नहीं करता, जिसका नतीजा हर साल दिल्ली और दिल्ली वालों को झेलना पड़ता है. एके जैने के मुताबिक अगर मौजूदा सरकार केवल 7 प्वाइंट पर काम करले तो दिल्ली को हर साल डूबने से बचाया जा सकता है.

आइए जानते हैं वो कौन से 7 बदलाव है जिन्हें करने के बाद दिल्ली को जल मग्न होने से बचाया जा सकता है.

बदलाव 1- इंटरनेट और टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल जरूरी

दिल्ली में ड्रेनेज सिस्टम का मास्टर प्लान 1976 में बना था, उस वक्त दिल्ली की कुल जनसंख्या 30 लाख के करीब थी जबकि आज ढाई करोड़ के ऊपर पहुंच चुकी है, यानी 7 गुना ज्यादा. साल गुजरे, पब्लिक बढ़ी लेकिन मास्टर प्लान में किसी प्रकार की कोई बदलाव नहीं किया गया. अगर सरकार को मास्टर प्लान में फिर से बदलाव चाहिए तो उसे इंटरनेट और टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करना होगा. दरअसल पिछले 50 साल में काफी बदलाव हुआ है और ऐसे में अगर बाढ़ जैसी स्थिति से निपटना है तो समय के हिसाब से प्लान में बदलाव करना होगा.

बदलाव 2- क्लाइमेट चेंज पर रखना होगा विशेष ध्यान

इसके अलावा भी कई सारे फैक्टर हैं जैसे क्लाइमेट चेंज. पहले इतनी बारिश नहीं होती थी अब बारिश ज्यादा होती है. सरकार को चाहिए कि जब भी वो दिल्ली के लिए ड्रेनेज मास्टर प्लान बनाएं उसमें क्लाइमेट चेंज का फैक्टर जरूर रखे. दिल्ली में हर साल जिस तरह से बाढ़ का कोहराम देखा जा रहा है उसके बाद टाउन प्लानिंग को ड्रेनेज सेंट्रिक करना ही पड़ेगा. इसका मतलब यह है कि जो टाउन प्लानिंग के कॉन्सेप्ट्स हैं जैसे बायो ड्रेनेज, जीरो रन ऑफ ड्रेनेज, सस्टेनेबल ड्रेनेज, इन सब तरीकों को प्लान में शामिल करना होगा.

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बदलाव 3- शहर में करनी होगी नाली की व्यवस्था

ड्रेन को डिसिल्ट करना होगा यानी नालियों से गाद निकालना होगा. उनके अंदर से ढीली और सख्त हो चुकी गाद को हटाना होगा ताकि वे फिर से बेहतर ढंग से काम कर सकें. इसके अलावा बारिश के पानी को और सीवर के पानी जैसे गंदे पानी के लिए अलग-अलग नाली बनाने की व्यवस्था करनी होगी. इससे ओवरफ्लो और गंध की समस्या नहीं होगी. बता दें कि इनके नहीं होने की वजह से ही दिल्ली में बारिश के मौसम में करीब 500 जगह पर सड़कों पर पानी लगता है और उसकी वजह से ट्रैफिक की समस्या होती है.

बदलाव 4- सभी विभागों का एक प्लेटफॉर्म में आने की जरूरत

दिल्ली के ड्रेनेज सिस्टम के लिए 14 तो स्टेट और सेंट्रल डिपार्टमेंट लगाए गए हैं. इसके अलावा हरियाणा और उत्तर प्रदेश सरकार के विभाग भी इसमें शामिल हैं. ये सारे विभाग अलग-अलग तरीकों से काम कर रहे हैं. इन सभी विभागों के बीच में कोई भी कॉर्डिनेशन नहीं है. इसके लिए एक हॉल ऑफ गवर्नमेंट प्लेटफार्म की शुरुआत हो. यह एक डिजिटल प्लेटफॉर्म होता है, जिस पर एक ही जगह सारे ड्रेनेज का काम होता है. अभी जितने भी कार्यक्रम चल रहे हैं फिर चाहे वो सेंट्रल वॉटर कमिशन के हों, नमामी गंगे के हों या फिर यमुना को लेकर… सब अलग-अलग काम कर रहे हैं, इसका नतीजा है कि जब पानी का लेवल बढ़ता है तो सभी योजनाओं पर असर होता है और हर विभाग के इलाके एक साथ डूब जाते हैं.

बदलाव 5- यमुना के आसपास के इलाकों को करना होगा खाली

यमुना का दिल्ली में इलाका 10 हजार हेक्टेयर है. समय-समय पर कोर्ट ने भी कहा है कि यमुना के आस-पास के इलाकों में अतिक्रमण न हो, लेकिन इन इलाकों में करीब 150 अवैध कॉलोनियां बनकर तैयार हो गई हैं. इसे मूल स्थिति में लाना चाहिए और यमुना के प्लान को डिफाइन करना चाहिए. नदी के जंगल वाले इलाकों को अतिक्रमण से मुक्त कराना होगा. गाजियाबाद में मौजूद हिंडन नदी को यमुना से इंटरलिंक कर सकते हैं. इससे यमुना का पानी हिंडन में भी ट्रांसफर कर सकते हैं. इससे गीता कॉलोनी, खजूरी खास, शास्त्री पार्क, मोनेस्ट्री, मजनू का टीला में भरने वाला पानी हिंडन में चला जाएगा और ये इलाके बचे रहेंगे.

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बदलाव 6- रिवर बैंक के आसपास के इलाके करने होंगे खाली

इसके अलावा रिवर बैंक पर बहुत सारे कंस्ट्रक्शन को मंजूरी दी गई है. जैसे कि डीएमआरसी का आईटी पार्क बन गया है. पहले वहां बस का डिप्पो हुआ करता था. साथ ही वहां मौजूद पावर प्लांट के इलाके को ग्रीन एरिया में बदलना होगा. इसी इलाके में आईपी एक्सटेंशन के पास दिल्ली सचिवालय बना है. एशियन गेम्स के दौरान इनका निर्माण हुआ था और ये तय हुआ था कि ये टेम्परेरी कंस्ट्रक्शन हैं, बाद में इसे हटा दिया जाएगा. लेकिन ये कभी हटा नहीं और अब पर्मानेंट हो चुके हैं.

बदलाव 7- रिंग रोड से सिग्नेचर ब्रिज के पास एक नाला बने

रिंग रोड से सिग्नेचर ब्रिज के पास सप्लीमेंट्री ड्रेन यानी एक अतिरिक्त नाला बनाया गया है, जिसका काम उस हिस्से के गंदे सीवेज के पानी को यमुना में जाने से बचाना है. रिंग रोड के साथ एक और ड्रेन बनाने की जरूरत है और उसे इस सप्लीमेंट्री ड्रेन से इंटरलिंग करने की जरूरत है. ऐसा करने से बरसात के मौसम में ड्रेन का पानी कॉलोनियों में जाने की जगह दूसरे ड्रेन में चला जाएगा और इससे काफी राहत मिल जाएगी. फिर राहत शिविर कैंप नहीं बनाना पड़ेगा.

वरदान कैसे बनेगी यमुना?

  • सबसे पहले टाउन प्लानिंग बदलनी होगी. साथ ही हमें स्पंज सिटी का कॉन्सेप्ट लागू करना होगा.
  • इसके अलावा दिल्ली के अंदर बायो ड्रेनेज और जीरो रन ऑफ ड्रेनेज का कॉन्सेप्ट भी लाना होगा.

क्या है बायो ड्रेनेज और जीरो रन ऑफ ड्रेनेज?

बायो ड्रेनेज – यह एक प्राकृतिक जल निकासी विधि है. इसमें जलभराव से प्रभावित क्षेत्रों में गहरी जड़ वाली प्रजातियों के पौधों का उपयोग किया जाता है. इसमें पौधे वाष्पोत्सर्जन प्रक्रिया के तहत पानी को जड़ से खींचकर वायुमंडल में छोड़ते हैं.

जीरो रन ऑफ ड्रेनेज- यह एक जल प्रबंधन प्रणाली है, जिसका लक्ष्य बारिश के पानी को सतह पर बहने से रोकना (रन-ऑफ कम करना) है. एक ऐसी प्रणाली है जो बारिश के पानी को बहने नहीं देती, बल्कि उसे जमीन में सोख लेती है.

प्राकृत आधारित हल खोजें- इसके लिए बड़े ड्रेन्स और टनल्स न बनाकर GIS + Drone Mapping तकनीक का इस्तेमाल करें. इससे पता चल जाता है कि कौन सा इलाका फ्लड जोन से ऊपर है और कौन सा नीचे है.

नया मास्टर प्लान, इंटरनेट सर्वे और टेक्नोलॉजी… अगर हो जाएं ये 7 काम तो कभी नहीं डूबेगी दिल्ली

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