Delhi-Ncr Noida Techie Death: लापरवाही की 5 हदें… जो पार न होतीं तो अनदेखी के गड्ढे में डूबने से बच जाता सॉफ्टवेयर इंजीनियर- #INA

नोएडा में सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की मौत.
नोएडा के सेक्टर-150 में सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की हुई मौत के मामले में अब नोएडा अथॉरिटी की कई खामियां निकलकर सामने आई हैं. सेक्टर-150 में जिस जगह पर ये हादसा हुआ, वो तिराहा है. जहां सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की कार गिरी, वहां पर अथॉरिटी के द्वारा न कोई बैरिकेडिंग की गई थी और न ही रिफ्लेक्टर या सड़कों पर मार्किंग की गई थी, जिसकी वजह से यह हादसा हुआ.
सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता (27) सेक्टर-150 की टाटा यूरेका सोसाइटी में रहता था. 16 जनवरी की रात कोहरा बहुत अधिक था. युवराज ऑफिस से वापस घर लौटते समय काफी लेट हो गया था. गुरुग्राम से उसे नोएडा आने में करीब ढाई से तीन घंटे का समय लग गया. इस दौरान कोहरा बढ़ता गया. कुछ दिखाई न देने के चलते ये हादसा हो गया. चूंकि चलती-फिरती रोड थी तो इसी दौरान एक डिलीवरी बॉय वहां से गुजरा. उसको जब गाड़ी टकराने की आवाज आई तो वह नाले की तरफ दौड़ा. फिर धीरे-धीरे रेस्क्यू टीम, युवराज के परिजन और सोसाइटी के लोग मौके पर पहुंचे, लेकिन युवराज को बचाया नहीं जा सका.
पहली लापरवाही- सोसायटी के लोग काफी सालों से इस जगह पर सड़कों पर गड्ढे, सुबह-शाम लगने वाले जाम और सर्विस रोड पर नालों के न बंद होने जैसी लापरवाही को लेकर कई बार नोएडा अथॉरिटी से शिकायत कर चुके थे, लेकिन इस पर कोई एक्शन नहीं लिया गया.
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40 मिनट तक कार की छत पर खड़े होकर चिल्लाता रहा
दूसरी लापरवाही- युवराज ने अपने पिता को 12:25 पर फोन किया और कहा कि, “पापा मुझे बचा लो. पानी बहुत ठंडा है. मैं डूब रहा हूं. मैं मरना नहीं चाहता हूं.” वह मोबाइल की टॉर्च जलाकर लोगों से मदद की गुहार लगाता रहा, लेकिन किसी ने पानी में उतरने की हिम्मत नहीं की, क्योंकि पानी 70 फीट गहरा था. युवराज के पिता राजकुमार मेहता ने तुरंत कंट्रोल रूम पुलिस को इसकी सूचना दी. 12: 45 मिनट पर राजकुमार खुद घटनास्थल पर पहुंच गए.
वहां पर लोगों की भीड़ लगी हुई थी. केवल डायल-112 के जवान मौजूद थे, जो टॉर्च मारकर यह देख रहे थे कि आखिर कार कितने अंदर गिरी है. 12:51 पर थाने से पुलिस टीम पहुंची. उन्होंने तुरंत NDRF और फायर ब्रिगेड को फोन किया, लेकिन 1:00 बजे तक रात में युवराज मेहता पानी के अंदर डूब चुका था. वह आखरी सांस तक यही कहता रहा कि मुझे बचा लो, लेकिन पिता के सामने उसकी मौत हो गई.
2:00 बजे NDRF-SDRF की टीम मौके पर पहुंची, लेकिन पानी ठंडा होने और बेसमेंट में सरिया होने की वजह से NDRF-SDRF के जवान पानी में उतरने की हिम्मत नहीं जुटा सके. इस लापरवाही में सबसे बड़ी बात यह सामने आई कि पानी में उतरने के लिए उनके पास नाव तक नहीं थी, जो रस्सी लेकर आए भी थे, वो छोटी थी. केवल स्थानीय गोताखोर पानी में उतरे और 30 मिनट के बाद वह भी वापस लौट आए. 3:00 बजे क्रेन को बुलाया गया. उस पर लटक कर गोताखोर पानी में उतरे. करीब एक घंटे तक ढूंढने के बाद युवराज NDRF और गोताखोरों को मिला. 4:30 बजे उसको बाहर निकल गया. जब तक उसे अस्पताल ले गए, तब तक उसकी मौत हो चुकी थी.
क्या बचाई जा सकती थी युवराज की जान?
तीसरी लापरवाही- मृतक के पिता राजकुमार मेहता और टाटा यूरेका सोसायटी के रहने वाले निवासियों ने कहा कि हाईटेक शहर, तीन प्राधिकरण, मजबूत पुलिसिंग, लेकिन इसके बावजूद न तो पुलिस और फायर ब्रिगेड के पास कोई सुरक्षा उपकरण थे और न ही प्राधिकरण और NDRF टीम के पास सुरक्षा के इंतजाम. यदि सड़क किनारे मजबूत बैरिकेड़िंग होती, पानी भरे प्लॉट को पहले ही भर दिया गया होता, पर्याप्त स्ट्रीट लाइट और रिफ्लेक्टर लगाए गए होते, सड़कों पर मार्किंग होती और कोहरे से पहले सेफ्टी ऑडिट नियमित तरीके से किया गया होता तो इस हादसे को रोका जा सकता था.
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ठीक 10 दिन पहले घने कोहरे के चलते एक कैंटर भी इसी जगह दुर्घटनाग्रस्त हो गया था, लेकिन न तो किसी ट्रैफिक पुलिस कर्मी ने इस पर ध्यान दिया और न ही प्राधिकरण ने. सोसायटी के निवासियों का कहना है कि खराब मौसम और घने कोहरे में अतिरिक्त सावधानी बरतना प्राधिकरण की जिम्मेदारी होती है, जो यहां नजर नहीं आई.
पिता ने कहा- आखरी दम तक लड़ूंगा लड़ाई
चौथी लापरवाही- सबसे बड़ी बात यह निकलकर सामने आई कि टाटा यूरेका सोसायटी के निवासी इस कार्रवाई से संतुष्ट नहीं हैं. उनका कहना है कि सिर्फ बिल्डर पर मुकदमा दर्ज करने से लापरवाही पर पर्दा नहीं डाला जा सकता. इसमें प्राधिकरण के रोड प्रोजेक्ट मैनेजर, सड़कों की सुरक्षा से जुड़े संबंधित अधिकारियों पर आखिरकार कार्रवाई क्यों नहीं की गई? उनके खिलाफ FIR दर्ज क्यों नहीं की गई?
खाली एक को हटाने से इस लापरवाही पर पर्दा नहीं डाला जा सकता है. वहीं मृतक युवराज मेहता के पिता राजकुमार मेहता का कहना है जिस किसी की भी लापरवाही से मैंने अपना बेटा खोया है, उसके खिलाफ मैं आखिरी दम तक लड़ाई लडूंगा. वहूीं पुलिस के अधिकारियों का कहना है कि मामले में जांच की जा रही है. बिल्डरों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया गया है. जिस किसी भी व्यक्ति की इस मामले में लापरवाही निकलकर सामने आएगी, उसके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी.
हादसे के बाद ही क्यों जागते हैं अधिकारी?
5वीं लापरवाही- एक महीने में हुई छह घटनाओं के पुलिस और प्राधिकरण ने सबक नहीं लिया. नोएडा-ग्रेटर नोएडा में एक महीने में हुई छह घटनाओं में सबसे बड़ी लापरवाही यह निकलकर सामने आई है कि जब यहां 10 दिन पहले एक कैंटर गाड़ी दुर्घटनाग्रस्त हो गई थी तो क्यों यहां पर बैरिकेड़िंग नहीं की गई? इंजीनियर की मौत के बाद ही आनन-फानन में प्राधिकरण ने वहां पर कई टन मालवा डलवाया. बैरिकेड़िंग कर रास्ते को बंद करवाया. दूसरी घटना यमुना एक्सप्रेस-वे पर हुई थी, जिसमें करीब 15 गाड़िया आपस में टकरा गई थीं और आधा दर्जन लोग घायल हुए थे.
तीसरी घटना P-3 गोलचक्कर के पास हुई थी. घने कोहरे के चलते एक स्विफ्ट कार गोलचक्कर से टकरा गई थी, जिसमें कार बुरी तरह से क्षतिग्रस्त हुई थी और चालक को गंभीर चोट आईं थी. चौथी घटना बादलपुर थाना क्षेत्र के धूम मानिकपुर में हुई थी, जहां गलत बैरिकेड़िंग और अवैध कट की वजह से एक MBBS डॉक्टर की सड़क हादसे में मौत हो गई थी. 5वीं घटना यमुना एक्सप्रेस-वे पर हुई, जहां पर दो अलग-अलग सड़क हादसों में बाइक सवार पति-पत्नी समेत तीन लोगों की मौत हो गई थी, जबकि 2 लोग घायल हो गए थे. ये घटना भी घने कोहरे की वजह से हुई थी. एक्सप्रेस-वे पर कोई भी सेफ्टी के इंतजाम नहीं थे. अगर उन्हें तुरंत उपचार मिल जाता है तो उनकी जान बच जाती.
अब आगे क्या?
इस हादसे ने गौतम बुद्ध नगर पुलिस-प्रशासन और प्राधिकरण दोनों को कटघरे में खड़ा कर दिया है. सवाल यह नहीं है कि मुआवजा कितना मिलेगा. बल्कि यह है कि क्या भविष्य में ऐसी लापरवाहियों को रोका जाएगा? जरूरत इस बात की है कि सभी सेक्टरों में खुले प्लॉट और नालों का तत्काल सर्वे कराया जाए. जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय हो और सड़क सुरक्षा को प्राथमिकता दी जाए.
पुलिस और प्राधिकरण के अधिकारियों ने क्या कहा?
जॉइंट कमिश्नर नोएडा राजीव नारायण मिश्र ने बताया कि इस हादसे के बाद जिम्मेदार दो बिल्डरों के खिलाफ पिता की तहरीर पर मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की गई है. जांच के लिए एक ACP और एक दारोगा को जिम्मेदारी दी गई है. वहीं इस घटना में NDRF की लापरवाही देखी गई है. उनके पास नाव नहीं थी. इस मामले को भी जांच में जोड़ा गया है. वहीं मृतक के पिता राजकुमार मेहता के बयान अभी होने बाकी हैं. बयान में जो भी चीज सामने आएंगी या जिसकी भी लापरवाही सामने आएगी, उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी.
वहीं नोएडा प्राधिकरण के एडिशनल चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर सतीश पाल ने बताया कि इस घटना में जिम्मेदारी तय करने के लिए जांच चल रही है. जिन लोगों की इसमें लापरवाही सामने आई है, उनके खिलाफ भी कड़ी कार्रवाई की जाएगी. नोएडा में जितने भी विकसित सेक्टर हैं, वहां की सड़कों का निरीक्षण कराया जाएगा. अवैध सड़कों पर बने कट, साइन बोर्ड, सड़क पर मार्किंग… इन सभी चीजों को दुरुस्त कराया जाएगा.
Noida Techie Death: लापरवाही की 5 हदें… जो पार न होतीं तो अनदेखी के गड्ढे में डूबने से बच जाता सॉफ्टवेयर इंजीनियर
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