Delhi-Ncr कंकाल मिले, सबूत नहीं! निठारी केस में कटघरे में खड़ी जांच, सुप्रीम कोर्ट ने कही ये अहम बातें- #INA

फाइल फोटो.
साल 2006 में निठारी केस खौफ का दूसरा नाम बन गया था. मोनिंदर पढ़ेर और सुरेंद्र कोली इसमें मुख्य आरोपी थे. पंढेर पहले ही रिहा हो चुके हैं. अब सुरेंद्र कोली भी जेल से बाहर आ गया है. जेल से बाहर निकलते वक्त मीडिया ने कोली से बात करने की कोशिश की लेकिन वो चुपचाप गाड़ी में बैठ गया.
साल 2006 में नोएडा के निठारी में एक नाले से 16 नर कंकाल मिले थे. इससे पहले लगातार ये खबरें आ रही थी कि इलाके के कई बच्चे गायब हुए हैं. जब बच्चों के कंकाल मिले तो हंगामा मच गया. जांच की गई तो घटना के तार निठारी की कोठी नंबर D-5 तक पहुंचे. इस बंगले में मालिक मोनिंदर सिंह पंढेर अपने नौकर सुरेंद्र कोली के साथ रहता था.
पुलिस ने जघन्य अपराध के लिए दोनों गिरफ्तार कर लिया लेकिन लंबी जांच, अलग-अलग अदालतों में सुनवाई के बाद अब इस केस में सुप्रीम कोर्ट का एक अहम फैसला आया है. जिसमें सुरेंद्र कोली को आरोपों से बरी करते हुए रिहा करने का आदेश दिया गया. पंढेर पहले ही बरी हो चुके हैं. यानी लंबी जांच के बाद भी तमाम एजेंसियां इस मामले में आरोपियों के खिलाफ ठोस सबूत नहीं जुटा पाईं.
16 नहीं बल्कि 17 कंकाल दिखाई देंगे
अगर निठारी कांड का एक्स-रे करें तो वहां आपको 16 नहीं बल्कि 17 कंकाल दिखाई देंगे. 16 उन मासूम बच्चों के, जिनकी चीखें निठारी की D-5 कोठी की दीवारों में दब कर रह गई और ये फैसला नहीं हो पाया कि बच्चों की उस दशा का जिम्मेदार कौन है. 17वां कंकाल उस जांच का जिसे पिछले कई वर्षों से प्रतिष्ठित एजेंसियों ने अंजाम दिया. एजेंसियों की नाकामी से निकले जांच के इस कंकाल पर सुप्रीम कोर्ट ने भी तल्ख टिप्पणी की है.
सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में साफ कह दिया कि जांच में कोई दम नहीं था. कई तरह की लापरवाही बरती गई थी. ऐसे में ये सवाल उठ रहा है कि जब पंढेर और सुरेंद्र कोली दोनों के खिलाफ ही सबूत नहीं हैं. दोनों ही इस मामले में शामिल नहीं थे. तो फिर उन बच्चों की हत्याओं का असली दोषी कौन है? पीड़ित परिवार भी जांच एजेंसियों से ये सवाल पूछ रहे हैं.
सुप्रीम कोर्ट ने कही बहुत अहम बात
दरअसल, निठारी कांड में सुरेंद्र कोली से जुड़ा ये 13वां मामला था, जिसमें उसे बरी किया गया है. इससे पहले उसे 12 मामलों में बरी किया जा चुका है. यानी अब इस मामले के दोनों आरोपी बरी हो चुके हैं. फैसले के बाद सुरेंद्र कोली को भी आज जेल से रिहा कर दिया गया, जो गौतमबुद्ध नगर की लुक्सर जेल में बंद था. सुप्रीम कोर्ट ने सुरेंद्र कोली की रिहाई का आदेश देते हुए जो बातें कही वो बहुत अहम हैं.
ये बातें CBI समेत उन तमाम जांच एजेंसियों पर सवाल हैं जिनका काम मामले की गहनता से जांच कर पीड़ितों को न्याय दिलवाना है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा, ये खेद की बात है कि लंबी जांच के बाद भी अपराधी की पहचान स्थापित नहीं हो सकी. क्योंकि संदेह, चाहे कितना भी गंभीर क्यों न हो वो सबूतों की जगह नहीं ले सकता. जब तक अपराध साबित ना हो जाए कोई भी व्यक्ति निर्दोष ही रहता है और अपराध हमेशा सबूतों से ही साबित होना चाहिए.
खुदाई शुरू होने से पहले जगह को सुरक्षित नहीं किया गया
चीफ जस्टिस बी.आर. गवई, न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति विक्रम नाथ की पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा, जब कोई जांच सही वक्त पर..पेशेवर तरीके से की जाती है, तो सबसे कठिन रहस्यों को भी सुलझाया जा सकता है. लेकिन इस मामले में असली अपराधी की पहचान करने में हुई लापरवाही और देरी ने पूरी प्रक्रिया को कमजोर किया.
सुप्रीम कोर्ट ने ये भी कहा, खुदाई शुरू होने से पहले उस जगह को सुरक्षित नहीं किया गया. जांच के दौरान अहम वैज्ञानिक अवसर गंवा दिए गए. पोस्टमार्टम और फॉरेंसिक रिजल्ट वक्त पर सही तरीके से रिकॉर्ड नहीं हुए. ऐसा सबूत नहीं मिला, जिसे फॉरेंसिक तरीके से घटनाओं से जोड़ा जा सके. साथ ही परिवार और पड़ोस के गवाहों से पर्याप्त पूछताछ नहीं हुई. ना ही अंगों की तस्करी जैसे सुरागों की सही से जांच की गई.
इस तरह की हर चूक ने सबूतों की विश्वसनीयता को कमजोर किया. जिससे सच तक पहुंचने का रास्ता संकीर्ण हो गया. वैसे ये बात बिल्कुल सही है कि अदालत अपना कोई भी फैसला सबूतों के आधार पर सुनाती है. सबूत जुटाना जांच एजेंसियों का काम होता है. निठारी केस में ये काम CBI को सौंपा गया था क्योंकि पुलिस की जांच पर पहले दिन से सवाल उठ रहे थे. हालांकि, ये जरूर बता दें कि गाजियाबाद जिला अदालत से कोली और पंढेर को मौत की सजा सुनाई थी लेकिन जब मामला ऊपरी अदालतों में पहुंचा तो दोनों बरी हो गए.
ब्यूरो रिपोर्ट टीवी9 भारतवर्ष.
कंकाल मिले, सबूत नहीं! निठारी केस में कटघरे में खड़ी जांच, सुप्रीम कोर्ट ने कही ये अहम बातें
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