Delhi-Ncr कुछ के लिए स्माइल, कुछ के लिए स्ट्रेस… ‘डॉग प्रेमी क्लब’ नोट कर ले SC की ये 7 बातें- #INA

आवारा कुत्तों पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला.
एक खबर इस वक्त पूरे देश में ट्रेंड कर रही है. सोसाइटी के व्हाट्सएप ग्रुप से सोशल मीडिया के अलग-अलग प्लेटफॉर्म्स तक इसी खबर पर लोगों के बीच विमर्श छिड़ा है, जिसमें बहुत चिंगारियां हैं. ये खबर देश के उन आवारा कुत्तों से जुड़ी हुई है जो एक बार फिर सड़कों पर आजाद घूमेंगे. ये ऐसा मुद्दा है, जिस पर कुछ दिन पहले तक डॉग लवर्स दुखी थे और वो लोग खुश थे जो आवारा कुत्तों के आतंक के शिकार हुए लेकिन सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले से हालात और जज्बात दोनों बदल गए हैं.
सुप्रीम कोर्ट ने आवारा कुत्तों को लेकर एक ऐसा फैसला सुनाया है, जिसे लेकर डॉग प्रेमी क्लब में तो भरपूर जश्न का माहौल है लेकिन वो लोग जरूर मायूस होंगे जो डॉग बाइट्स के पीड़ित हैं, जिन्हें आवारा कुत्तों ने सड़कों पर दौड़ाकर काटा है. इन दुखी लोगों में वो भी शामिल होंगे, जिनके अपने रेबीज की वजह से दुनिया में नहीं हैं.
आवारा कुत्तों पर कोर्ट ने अपने पुराने फैसले को लगभग पलट दिया है और इसे डॉग लवर्स अपनी जीत बता रहे हैं. 11 अगस्त को अदालत ने दिल्ली-NCR के सभी आवारा कुत्तों को शेल्टर होम में रखने का निर्देश दिया था लेकिन अब कोर्ट ने कहा है अब आवारा कुत्ते शेल्टर होम में नहीं जाएंगे. पहले सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि डॉग शेल्टर होम में ही आवारा कुत्तों की नसबंदी और टीकाकरण हो. अब कोर्ट का निर्देश है कि नसबंदी और वैक्सीनेशन के बाद कुत्तों को छोड़ दिया जाए.
पूरे देश में लागू होगा कोर्ट का फैसला
पहले कोर्ट का ऑर्डर था कि सभी तरह के आवारा कुत्ते शेल्टर होम में रखें जाएं लेकिन अब कोर्ट का ऑर्डर है, सिर्फ रेबीज से संक्रमित, बीमार और आक्रामक कुत्ते ही शेल्टर होम में रखे जाएंगे. अदालत ने पहले कहा था कि वैक्सीनेशन के बाद भी कुत्तों को न छोड़ा जाए लेकिन अब अदालत का आदेश है कि जो कुत्ते अब तक शेल्टर होम में भेजे गए हैं उन्हें भी तुरंत छोड़ दिया जाए.
सबसे ज़रूरी बात, पहले अदालत का ये निर्देश सिर्फ दिल्ली-एनसीआर तक सीमित था लेकिन अब कोर्ट ने आवारा कुत्तों को लेकर जो आदेश दिया है, वो देश के सभी राज्यों के साथ केंद्र शासित प्रदेशों पर भी लागू होगा. इसके अलावा देश भर की निचली अदालतों में आवारा कुत्तों से जुड़े लंबित मामले सुप्रीम कोर्ट ट्रांसफर होंगे. हालांकि शुक्रवार को अदालत ने अपने पुराने आदेश पर आंशिक रोक के साथ जो 7 बातें कहीं हैं, वो डॉग लवर्स को भी नोट कर लेनी चाहिए.
- पहली बात- आवारा कुत्तों को कोई सार्वजनिक स्थान पर खाना नहीं खिलाएगा
- दूसरी बात- हर वॉर्ड में आवारा कुत्तों के लिए विशेष फीडिंग जोन बनेगा
- सिर्फ निर्धारित जगह पर ही स्ट्रीट डॉग्स को खाना खिलाया जाएगा
- नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ शिकायत दर्ज की जाएगी.
- कोर्ट के अनुसार ‘पशु प्रेमी’ आवारा कुत्तों को गोद लेने के लिए आवेदन कर सकते हैं
- एक बार गोद लिए गए कुत्ते को दोबारा सड़क पर नहीं छोड़ा जा सकेगा
- अदालत ने याचिका लगाने वाले NGO को 2 लाख और डॉग लवर्स को 25 हज़ार रुपए कोर्ट में जमा कराने को कहा है. इस राशि का उपयोग आवारा कुत्तों के लिए तैयार होने वाले बुनियादी ढांचे और सुविधाओं के लिए किया जाएगा
ये तय कैसा होगा कि कौन सा कुत्ता आक्रामक है?
कोर्ट के निर्देश का एक प्वाइंट है कि सिर्फ रेबीज़ से संक्रमित और आक्रामक कुत्ते ही शेल्टर होम में रखे जाएंगे लेकिन ये तय कैसा होगा कि कौन सा कुत्ता आक्रामक है? ये कौन बताएगा कि आक्रामक और ख़तरनाक कुत्तों की परिभाषा क्या है? सवाल ये भी है कि आवारा कुत्तों में हिंसक कुत्तों की पहचान कैसे होगी? अगर वैक्सीनेशन के बाद भी आवारा कुत्ते ने किसी को काट लिया तो उसकी ज़िम्मेदारी कौन लेगा. जवाबदेही किसकी होगी?
इसीलिए सवाल है- ये तय कैसे होगा कि कौन सा आवारा कुत्ता आक्रामक है और कौन सा नहीं है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि आवारा कुत्तों को नसबंदी और वैक्सीनेशन के बाद वापस छोड़ दिया जाए. इससे डॉग प्रेमी क्लब खुश है लेकिन आए दिन ऐसे कई वीडियो आते हैं, जिसमें आवारा कुत्तों का झुंड राह चलते किसी लड़की पर या किसी बच्चे पर टूट पड़ता है. उनके शरीर को नोंचता है. बुरी तरह घायल कर देता है. क्या ऐसे पीड़ितों को दलील दी जा सकती है कि घबराइए नहीं. कुत्ते का वैक्सीनेशन हो चुका है.
किसी की जान जाती है तो वैक्सीनेशन वाला तर्क चलेगा?
आए दिन ऐसी खबरें आती हैं कि आवारा कुत्तों ने 6 महीने, 10 महीने या 2 साल की बच्ची को नोंचकर मार डाला. उसके माता पिता को क्या ये दलील दी जा सकती है कि कुत्तों का वैक्सीनेशन कर दिया गया था. अगर कुत्तों के दौड़ाते वक्त या हमला करते वक्त कोई हादसा हो जाता है और किसी की जान चली जाती है तो क्या वैक्सीनेशन वाला तर्क चलेगा.
जिन लोगों पर कुत्तों ने हमले किए क्या उन्हें ये समझाया जा सकता है कि इंजेक्शन लगने के बाद कुत्ता काटना भूल गया है या आवारा कुत्तों के बीच से आक्रामक कुत्तों को छांटने से ही कुत्तों के काटने की ये समस्या समाप्त हो जाएगी? यही सवाल और आशंकाएं उन लोगों के मन में भी है, जो पहले डॉग बाइट्स के शिकार हुए हैं. वैसे ऐसे सवाल फीडिंग जोन को लेकर भी हैं जो आवारा कुत्तों के लिए बनाए जाएंगे.
कोर्ट का निर्देश है- आवारा कुत्तों के खाने के लिए फीडिंग जोन बनेंगे. सवाल है- क्या ये फीडिंग जोन रिहाइशी इलाकों से दूर होंगे? इसका चयन लोकल अथॉरिटी कैसे करेंगी. कोर्ट का संदेश स्पष्ट है आवारा कुत्तों को खाना फीडिंग जोन में ही खिलाया जाएगा. सवाल है- क्या डॉग लवर्स फीडिंग जोन में खिलाने जाएंगे और ये निर्देश मानेंगे?
ब्यूरो रिपोर्ट टीवी9 भारतवर्ष.
कुछ के लिए स्माइल, कुछ के लिए स्ट्रेस… ‘डॉग प्रेमी क्लब’ नोट कर ले SC की ये 7 बातें
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