Delhi-Ncr दिल्ली में बाहर से पटाखे लाने पर ‘सुप्रीम रोक’, फिर कैसे और कहां से आएंगे ग्रीन क्रैकर्स?- #INA

दिल्ली में बाहर से पटाखे लाने पर 'सुप्रीम रोक', फिर कैसे और कहां से आएंगे ग्रीन क्रैकर्स?

दिल्ली में पटाखों से हटाया गया बैन.

दिल्ली में ग्रीन पटाखों की अनुमति देने के सुप्रीम कोर्ट के फैसले से एशिया के सबसे बड़े मार्केट सदर बाजार के पटाखा व्यापारी खुश हैं, लेकिन नियमों और शर्तों को लेकर परेशान हैं. परेशानी इस बात की है कि अगर दिल्ली के बाहर से पटाखे नहीं ला सकते हैं तो पटाखे आएंगे कहां से और ऐसे में वक्त भी बहुत कम दिया गया है. हालांकि, इस फैसले से ग्राहक पूरी तरह खुश हैं. उनका कहना है कि पहले भी पटाखे जलाते थे, लेकिन खरीदने के लिए दिल्ली से बाहर गुरुग्राम या दूसरी जगह जाना पड़ता था. अब वह दिल्ली में ही ग्रीन क्रैकर्स खरीद कर जला पाएंगे.

दिल्ली फायरवर्क्स शॉप कीपर्स ट्रेड एसोसिएशन के अध्यक्ष राजीव जैन ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा ग्रीन पटाखे की बिक्री की मंजूरी देने पर टीवी9 भारतवर्ष से खास बातचीत की. इस दौरान उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश से राहत तो मिली है, लेकिन ये राहत अधूरी है. समय और सामान दोनों की शॉर्टेज है.

सवाल- ग्रीन पटाखे आएंगे कहां से इतने कम समय में?

जवाब- राजीव जैन ने कहा कि पिछले एक साल से 19 दिसंबर 2024 के बाद से बराबर पटाखों पर रोक लगी हुई है. धीरे-धीरे दिल्ली ही नहीं पूरे NCR में बैन करा दिया गया. इस समय बहुत कम माल (ग्रीन पटाखे) लोगों के पास उपलब्ध है. या ये भी कह सकते हैं कि माल की उपलब्धता ही नहीं है.

सवाल- इतने कम समय में डिमांड-सप्लाई के बीच का गैप कैसे पूरा होगा?

जवाब- सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि दिल्ली-NCR के बाहर से आप पटाखे नहीं मंगा सकते हैं. इसकी वजह से परेशानी आएगी. दिल्ली में पटाखे बेचने के लिए हम लोगों ने एक लंबी लड़ाई लड़ी है. अगर गैरकानूनी तरीके से बेचना होता तो हम लोग ये लड़ाई ही नहीं लड़ते. वकीलों को इतनी भारी फीस ही अदा नहीं करते. समस्या यही है कि माल नहीं है, जितना माल होगा व्यापारी बचेंगे और उसके बाद दुकान बंद कर घर चले जाएंगे. वैसे भी समय बहुत थोड़ा ही मिला है. उसके बाद जो डिमांड रहेगी, वह बाकी लोगों के हाथ में जाएगी (ब्रेक मार्केटिंग), उसके बारे में कुछ नहीं कह सकते.

सवाल- तो फिर इस आदेश के मायने क्या हैं?

जवाब- यह बिल्कुल ऐसी स्थिति हो गई है कि हाथ-पैर बांध दिए गए हैं और सामने खाने की थाली रख दी गई है. खाना कैसे खाएंगे, स्थिति समझ से बाहर है, लेकिन हम तो लीगली करेंगे, जितना हमसे होगा, उतना ही करेंगे. तीन दिन में वैसे भी काम नहीं होने वाला है.

सवाल- दिल्ली में कितने माल की डिमांड रहती है?

जवाब- यह कहना बहुत कठिन है. लोगों की इच्छाएं और आवश्यकताएं बदलती रहती हैं. बैन लगाए 6 से 7 साल हो गए, तभी से परेशानी बढ़ती जा रही. जज साहब ने एक बहुत अच्छी बात कही कि अगर हम दिल्ली में पटाखों को ओपन नहीं करेंगे तो माफिया डेवलप होगा. शायद उन्होंने जो पिछला अनुभव देखा कि बैन के बावजूद पटाखे जलाए गए. इसीलिए हमें रिलैक्सेशन दिया, लेकिन उस रिलैक्सेशन में कुछ कमियां रह गई हैं.

सवाल- तो दिल्ली में कब से पटाखे मिल पाएंगे?

जवाब- सुप्रीम कोर्ट का फैसला तो आज ही आया है. रेखा गुप्ता सरकार के मंत्री से गुजारिश करेंगे कि उसमें कुछ संशोधन हो सकता हो तो जरूर करें. उम्मीद बहुत कम लगती है.

सवाल- पटाखे ग्रीन हैं या नहीं, इसको कैसे सुनिश्चित करेंगे?

जवाब- कोर्ट ने बहुत सारे निर्देश दिए हैं. उन सभी निर्देशों का पहले से ही पालन हो रहा है. पूरे भारतवर्ष में करीब 1400 कंपनियां हैं. वह 2019 से ही ग्रीन पटाखे का निर्माण कर रही हैं. उसमें कहीं पर कोई कोताही नहीं होगी. जैसा कोर्ट का डायरेक्शन है, उसी अनुसार फॉलो होगा. हम लीगल पटाखे वाले उसकी अवहेलना नहीं करेंगे.

राजीव जैन ने कहा कि ग्रीन पटाखों की पहचान करना बहुत सरल है. बार कोड को स्कैन करें. उसमें कंपनी का नाम आएगा. NEERI का और PESO का कोड है. सभी व्यापारी भाई को NEERI का सर्टिफिकेट भी उपलब्ध करा रहे हैं, जो समय और मौके पर अधिकारियों को दिखा सकते हैं.

सवाल- तो दिल्ली में पटाखे की बिक्री कब से हो पाएगी?

जवाब- 18 से 20 तारीख तक के लिए कोर्ट ने परमिशन दी है. हम कोशिश करेंगे जिससे जितना बन पड़ेगा. उसी मार्जिन में हम काम करेंगे. 18 से ही पटाखे बिकने शुरू होंगे. उससे पहले बेचने की परमिशन नहीं है.

दिल्ली में बाहर से पटाखे लाने पर ‘सुप्रीम रोक’, फिर कैसे और कहां से आएंगे ग्रीन क्रैकर्स?

[ad_2]


देश दुनियां की खबरें पाने के लिए ग्रुप से जुड़ें,

[ad_1]

#INA #INA_NEWS #INANEWSAGENCY
Copyright Disclaimer :-Under Section 107 of the Copyright Act 1976, allowance is made for “fair use” for purposes such as criticism, comment, news reporting, teaching, scholarship, and research. Fair use is a use permitted by copyright statute that might otherwise be infringing., educational or personal use tips the balance in favor of fair use.
Credit By :-This post was first published on https://www.tv9hindi.com/, we have published it via RSS feed courtesy of Source link,

Back to top button