Delhi-Ncr पीड़िता की सुरक्षा की मांग या पिता की चिंता? कुलदीप सेंगर की बेटी ऐश्वर्या का गृह मंत्री अमित शाह को लेटर- #INA

पीड़िता की सुरक्षा की मांग या पिता की चिंता? कुलदीप सेंगर की बेटी ऐश्वर्या का गृह मंत्री अमित शाह को लेटर

कुलदीप सेंगर की बेटी ऐश्वर्या और गृह मंत्री अमित शाह.

उन्नाव रेप केस एक बार फिर चर्चा में है. कुलदीप सेंगर को हाई कोर्ट से मिली राहत और उस पर सुप्रीम कोर्ट की रोक के बाद दोनों पक्षों (पीड़िता और सेंगर) से बयानों की बौछार जारी है. इस बीच सेंगर की बेटी ऐश्वर्या ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को एक पत्र लिखा है. इसमें उन्होंने पीड़िता की सुरक्षा की बात की है. उनका कहना है कि भगवान न करे किसी तीसरे व्यक्ति द्वारा कोई एक्सीडेंट, खुद को नुकसान पहुंचाना या कोई क्रिमिनल एक्टिविटी होती है तो सारा दोष एक बार फिर मेरे पिता पर डाल दिया जाएगा. आइए जानते हैं उन्होंने अपने पत्र में क्या-क्या लिखा है.

  1. ऐश्वर्या सेंगर लिखती हैं, विनम्रता से कहना चाहती हूं कि मैं ऐश्वर्या सेंगर पूर्व विधायक कुलदीप सिंह सेंगर की बेटी हूं. मैं यह लेटर बहुत भारी मन और गहरी चिंता के साथ लिख रही हूं क्योंकि हालात एक बार ऐसे बन रहे हैं जिसके नतीजे बहुत गंभीर हो सकते हैं. ना सिर्फ मेरे परिवार के लिए बल्कि पीड़िता के लिए भी.
  2. सर, कुछ समय से पीड़िता पब्लिकली कह रही है कि वह सुसाइड कर सकती है या उसे मारा जा सकता है. वह कह रही है अगर कुलदीप सिंह सेंगर को बेल दी गई या रिहा किया गया तो उसका परिवार खुदकुशी कर लेगा. ऐसे बयान बार-बार मीडिया और सोशल मीडिया पर आ रहे हैं. एक आम नागरिक और एक बेटी के तौर पर यह स्थिति मुझे बहुत डर और बेबसी से भर देती है.
  3. सर, मैं आपके ध्यान में एक बहुत जरूरी बात लाना चाहती हूं. 2018 में मुख्यमंत्री आवास के सामने उन्होंने (पीड़िता) खुद को आग लगाने की कोशिश की थी, जिसके बाद बिना किसी ठोस या साइंटिफिक सबूत के कि मेरे पिता 4 जून 2017 को माखी में थे. जबकि पीड़िता की अर्जी पर कोर्ट में जांच अभी भी पेंडिंग थी. मीडिया के दबाव में तुरंत एफआईआर दर्ज कर ली गई और मेरे पिता को गिरफ्तार कर लिया गया.
  4. इस केस के ट्रायल के दौरान जब मेरे पिता जेल में थे, एक अचानक एक्सीडेंट हुआ जिसने पूरे मामले का रुख पूरी तरह से बदल दिया. उस एक्सीडेंट के बाद बिना किसी ठोस सबूत के मेरे पिता को इसके लिए जिम्मेदार ठहराया गया, यह देखते हुए कि सीबीआई, आईआईटी दिल्ली की एक्सपर्ट कमेटी, सीएफएसएल (सेंट्रल फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी) और सीआरआरआई (सेंट्रल रोड रिसर्च इंस्टीट्यूट) सभी ने यह नतीजा निकाला कि यह घटना एक एक्सीडेंट थी और मेरे पिता का इसमें कोई रोल नहीं था.
  5. दिल्ली की कोर्ट ने उस केस में मेरे पिता को बरी कर दिया. इसके खिलाफ राज्य या शिकायत करने वाले ने कभी कोई अपील नहीं की. इसके बावजूद आज भी पीड़िता और मीडिया भी मेरे पिता को उस एक्सीडेंट में अपने परिवार को मारने का दोषी मानते हैं. उस घटना के बाद मीडिया की कहानी, लोगों की सोच और केस के आस-पास की पूरी बातचीत इस तरह बदल गई कि हम आज भी खुद को इस डरावनी स्थिति में पाते हैं क्योंकि फेयर ट्रायल के हमारे अधिकार को कम कर दिया गया है. कोई भी सही और कानून पर आधारित कोर्ट का फैसला, जो हमें कोई राहत दे रहा हो, विरोध और पब्लिक आंदोलनों की ओर ले जा रहा है.
  6. इस केस के आस-पास मीडिया की बहुत मज़बूत कहानी ने हमसे कोर्ट जाकर खुद को बेगुनाह साबित करने के हमारे बुनियादी अधिकार को छीन लिया है. इस वजह से हमारा यह भरोसा पूरी तरह से टूट गया है कि हमारे सबूत जो सच सामने ला सकते हैं, उन पर कभी विचार किया जाएगा और यह मेरे परिवार के लिए एक जीता-जागता ट्रॉमा बना हुआ है.
  7. सर, इस मामले में पिछली घटनाओं और घटनाओं के क्रम से यह पूरी तरह से लॉजिकल और इंसानी डर पैदा होता है कि अगर भगवान न करे, किसी तीसरे व्यक्ति द्वारा कोई एक्सीडेंट, खुद को नुकसान पहुंचाना या कोई क्रिमिनल काम होता है तो असली सच्चाई चाहे जो भी हो, सारा दोष एक बार फिर मेरे पिता पर डाल दिया जाएगा. यह न सिर्फ़ एक बेगुनाह इंसान के साथ एक और गंभीर नाइंसाफ़ी होगी, बल्कि इससे लॉ एंड ऑर्डर और खुद जस्टिस डिलीवरी सिस्टम पर भी गंभीर सवाल उठेंगे.
  8. इसलिए, मैं प्रार्थना करती हूं कि शिकायतकर्ता और उसके परिवार को काफी, असरदार और लगातार सुरक्षा दी जाए. उनकी सुरक्षा की ज़िम्मेदारी राज्य साफ़ तौर पर पक्का करे. ताकि किसी भी अनहोनी की संभावना खत्म हो जाए. यह भी पक्का किया जाए कि किसी भी संभावित घटना का राजनीतिक या मीडिया के ज़रिए गलत इस्तेमाल न किया जाए. ताकि एक बार फिर किसी बेगुनाह इंसान पर आरोप लगाए जा सकें.
  9. सर, इस लेटर में किसी के खिलाफ़ कोई भेदभाव नहीं है. यह किसी भी संभावित हादसे को रोकने, इंसानी संवेदनशीलता बनाए रखने और भविष्य में एक और गंभीर नाइंसाफी को रोकने के लिए एक छोटी सी अपील है. एक नागरिक, एक बेटी और एक पीड़ित परिवार के सदस्य के तौर पर मैं बस यही रिक्वेस्ट कर रही हूं कि इस स्थिति को समय रहते गंभीरता से लिया जाए. मुझे विश्वास है कि इस मामले की सेंसिटिविटी को ध्यान में रखते हुए आपके दखल से पीड़िता की सुरक्षा पक्का करने के लिए काफ़ी सुरक्षा उपाय किए जाएंगे, जिससे किसी भी अनहोनी की स्थिति में हमें फिर से निशाना बनाए जाने से रोका जा सके. मैं हमेशा आपकी आभारी रहूंगी.

पीड़िता की सुरक्षा की मांग या पिता की चिंता? कुलदीप सेंगर की बेटी ऐश्वर्या का गृह मंत्री अमित शाह को लेटर

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