Delhi-Ncr जुलाई 2023 से अब तक क्या किया… DCPCR नियुक्तियों पर दिल्ली HC सख्त, सरकार को लगाई फटकार- #INA

दिल्ली हाईकोर्ट ने दिल्ली बाल अधिकार संरक्षण आयोग के अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति ना करने पर सरकार से नाराजगी जताई. दिल्ली हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस डीके उपाध्याय ने दिल्ली सरकार के स्थायी वकील समीर वशिष्ठ से तंज कसते हुए कहा कि 1 साल से अधिक समय बीत चुका है, इससे आपका रवैया स्पष्ट होता है. मामले में जुलाई 2023 से कछुए की चाल से प्रगति करने के लिए आपको धन्यवाद. कोर्ट ने कहा कि क्या आप पारदर्शिता के लिए लिए गए समय को उचित ठहरा रहे हैं?
दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि एक साधारण नियुक्ति करने में 3 साल का समय, अभी तक किसी की नियुक्ति नहीं हुई है. इसे रद्द कीजिए, इस कानून को निरस्त कीजिए. कोर्ट ने पूछा कि आपको कौन रोकता है? क्या आपको 3 साल का समय उचित और आवश्यक लगता है?
इस कानून को निरस्त कीजिए- दिल्ली HC
कोर्ट ने कहा कि इस कानून को निरस्त कीजिए. उच्च न्यायालय ने कहा कि आपने जुलाई 2023 से फरवरी 2026 तक का समय लिया है और उसे सही ठहरा रहे हैं. हम विभाग के प्रधान अधिकारी को तलब करेंगे. हालांकि, GNCTD द्वारा दिए गए आश्वासन को देखते हुए दिल्ली हाईकोर्ट ने सुनवाई टाल दी. कोर्ट अब मामले में अगली सुनवाई 15 अप्रैल को करेगी.
जुवेनाइल-POCSO जैसे कानून प्रभावित हो रहे
कोर्ट ने कहा कि अध्यक्ष और सदस्यों की अनुपस्थिति से जुवेनाइल जस्टिस एक्ट और POCSO एक्ट जैसे महत्वपूर्ण कानूनों की निगरानी प्रभावित हो रही है और इसके चलते दिल्ली में बच्चों के कल्याण के कार्यों में भारी कमी आई है. इससे पहले, आयोग की फंडिंग रुकने की खबरों पर भी हाई कोर्ट ने सुनवाई की थी, जिसमें एलजी कार्यालय ने स्पष्ट किया था कि फंड रोकने का कोई आदेश जारी नहीं किया गया है.
वहीं, दिल्ली सरकार ने अपने हलफनामे में आश्वासन दिया कि नियुक्तियां अप्रैल के मध्य तक पूरी कर ली जाएंगी. कोर्ट ने चेतावनी दी है कि अगर इस समय सीमा का पालन नहीं हुआ, तो इसे गंभीरता से लिया जाएगा.
जुलाई 2023 से अब तक क्या किया… DCPCR नियुक्तियों पर दिल्ली HC सख्त, सरकार को लगाई फटकार
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