शासनादेश को डीएम दिखा रहे ठेंगा आमीन को बनाया PA, नियमों की खुलेआम धज्जियां

देहरादून। जिले के सर्वोच्च प्रशासनिक पद पर बैठे जिलाधिकारी सविन बंसल एक बार फिर गंभीर आरोपों के घेरे में हैं। इस बार मामला सीधे-सीधे शासनादेश की अवहेलना, नियमों को ताक पर रखने और पद के दुरुपयोग से जुड़ा है। आरोप है कि DM सविन बंसल ने स्पष्ट शासनादेश के बावजूद एक आमीन स्तर के कर्मचारी को अपना PA (पर्सनल असिस्टेंट) नियुक्त कर दिया, जो नियमों के अनुसार पूर्णतः अवैध है।
सूत्रों के अनुसार, शासनादेश में स्पष्ट प्रावधान है कि जिलाधिकारी के PA पद पर केवल निर्धारित योग्यता, पद और अनुभव वाला कार्मिक ही तैनात किया जा सकता है। इसके बावजूद नियमों को नजरअंदाज कर आमीन को PA बनाना यह दर्शाता है कि DM कार्यालय अब नियमों से ऊपर चल रहा है।
❓ सवालों के घेरे में DM की कार्यशैली
सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि—क्या DM सविन बंसल को शासनादेश की जानकारी नहीं थी? या फिर जानबूझकर शासन के आदेशों को ठेंगा दिखाया गया? क्या यह नियुक्ति व्यक्तिगत भरोसे, मनमर्जी या किसी खास मकसद से की गई? प्रशासनिक गलियारों में चर्चा है कि यह फैसला न केवल नियमों के खिलाफ है, बल्कि इससे पूरे प्रशासनिक ढांचे की साख पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
🔥 विवादों से पुराना नाता
यह पहला मौका नहीं है जब DM सविन बंसल विवादों में आए हों। इससे पहले भी उन पर—महिला अधिकारियों को मानसिक रूप से प्रताड़ित करने के आरोप,कर्मचारियों का वेतन रोकने,बार-बार स्पष्टिकरण मांगकर दबाव बनाने,और प्रशासनिक निर्णयों में मनमानी के आरोप लगते रहे हैं
इन सभी मामलों ने पहले ही DM की कार्यशैली को सवालों के घेरे में ला दिया था, और अब आमीन को PA बनाना आग में घी डालने जैसा माना जा रहा है।
शासन की चुप्पी पर भी सवाल
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इतने स्पष्ट नियम उल्लंघन के बावजूद अब तक शासन स्तर से कोई कार्रवाई या स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है। क्या यह चुप्पी किसी संरक्षण की ओर इशारा कर रही है? प्रशासनिक विशेषज्ञों का कहना है कि यदि ऐसे मामलों पर सख्त कार्रवाई नहीं हुई तो यह एक खतरनाक परंपरा को जन्म देगा, जहां जिलाधिकारी जैसे संवैधानिक पद पर बैठे अधिकारी भी शासनादेशों को नजरअंदाज करने लगेंगे।
कार्रवाई की मांग तेज
सामाजिक संगठनों और कर्मचारी संगठनों ने मांग की है कि—इस नियुक्ति की तत्काल जांच कराई जाए,शासनादेश उल्लंघन पर DM सविन बंसल से जवाब तलब किया जाए और नियमों के विपरीत की गई तैनाती को तुरंत निरस्त किया जाए अब सवाल साफ है क्या शासन अपने ही आदेशों की अवहेलना पर आंख मूंदे रहेगा,या फिर कानून सबके लिए बराबर साबित होगा?




