Entertainment: Ek Deewane Ki Deewaniyat: पहले दिन 10 करोड़ कमाने वाली ‘दीवानियत’ के लिए मुसीबत न बन जाए ये 5 बातें, कैसे हो गई ऐसी गलतियां? – #iNA

Ek Deewane Ki Deewaniyat News: बॉक्स ऑफिस पर ‘एक दीवाने की दीवानियत’ ने पहले ही दिन 10 करोड़ का कलेक्शन करके भले ही तहलका मचा दिया हो, लेकिन फिल्म में कुछ ऐसी ‘बड़ी गलतियां’ हुई हैं जो इसकी लंबी दौड़ को खतरे में डाल सकती हैं. हर्षवर्धन राणे और सोनम बाजवा की इस पॉलिटिकल ड्रामा में कई सीन इतने अवास्तविक और तर्कहीन (illogical) हैं कि दर्शक सिर पकड़कर बैठ सकते हैं.
अब सवाल उठता है कि क्या मेकर्स को लगा कि पहले दिन की धमाकेदार कमाई इन गंभीर गलतियों को छुपा देगी? आइए, जान लते हैं हर्षवर्धन राणे और सोनम बाजवा की फिल्म ‘एक दीवाने की दीवानियत’ की 5 सबसे बड़ी गलतियां, जो दर्शकों को हजम नहीं हो रही हैं.
1. महाराष्ट्र में ‘रावण दहन’
फिल्म की सबसे पहली और सबसे बड़ी गलती उसके रीजनल सेटअप से जुड़ी है. फिल्म में दिखाया गया है कि दशहरा के अवसर पर CM उम्मीदवार (यानी मुख्यमंत्री बनने की रेस में शामिल नेता) एक सार्वजनिक मंच पर रावण दहन कर रहा है. दरअसल महाराष्ट्र और दक्षिण भारत के कई हिस्सों में दशहरा का मुख्य आकर्षण रावण दहन नहीं होता, यहां पर ये पर्व भाषण, सभाओं और सांस्कृतिक जुलूसों के रूप में मनाया जाता है. (जैसे शिवसेना का दसरा मेलावा) रावण दहन मुख्य रूप से उत्तर भारत की परंपरा है. ऐसा लगता है कि स्क्रिप्ट पर बिना रिसर्च किए या जल्दबाजी में ‘बॉलीवुड फार्मूला’ थोप दिया गया है.
2. लॉजिक से परे ट्विस्ट
फिल्म का हाई पॉइंट(मेन ट्विस्ट) नायिका (सोनम बाजवा) के एक अजीबोगरीब वादे पर आधारित है. वो घोषणा करती है कि जो कोई हर्षवर्धन राणे के किरदार (विक्रमादित्य) को दशहरे से पहले मारेगा, वो उस इंसान के साथ एक रात बिताएगी. ये इस कहानी का सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट है. मतलब एक समझदार लड़की को इंडिया के मोस्ट एलिजेबल बैचलर के साथ शादी नहीं करनी, लेकिन वो उसे मारने वाले किसी भी इंसान के साथ रात गुजारने के लिए तैयार है.
3. नेता को सरेआम धमकी और खामोश पुलिस
बॉलीवुड की ड्रामा फिल्मों में अक्सर सुरक्षा और कानून-व्यवस्था को नजरअंदाज कर दिया जाता है और ‘दीवानियत’ में भी यही गलती हुई है. फिल्म में एक CM उम्मीदवार को सार्वजनिक मंच पर खुलेआम धमकी दी जाती है. भारतीय कानून के तहत, किसी भी बड़े नेता को ऐसी धमकी देना एक गंभीर अपराध है और इसके बाद पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां तुरंत कार्रवाई करती हैं. लेकिन फिल्म में इस खुलेआम धमकी के बावजूद कोई नेता, पुलिस अधिकारी, या सुरक्षाकर्मी कोई एक्शन नहीं लेता.
4. बेवजह का इमोशनल टर्न!
फिल्म का एक और सीन हमें बहुत कन्फ्यूज लगता है. जब विक्रमादित्य को पता चलता है कि उनकी मां की मृत्यु उन्हें जन्म देने के कारण उनकी गलती से नहीं हुई थी, तब वो अदा के पास जाकर कहता है, “मुझे माफ करो… मैं आज से राजनीति छोड़ दूंगा, पावर छोड़ दूंगा.” ये बात गले नहीं उतरती क्योंकि पूरी फिल्म में अदा ने कभी ये नहीं कहा है कि वो विक्रमादित्य से राजनीतिक पावर के कारण नाराज है. या उनके करियर की वजह से वो उनसे शादी नहीं करना चाहती.
5. ‘भोसले’ नहीं लगते विक्रमादित्य
हर्षवर्धन राणे का किरदार एक महाराष्ट्र के राजनीतिक पृष्ठभूमि से आता है, जिसका सरनेम ‘भोसले’ है. अब जरूरी नहीं कि हिंदी फिल्मों में महाराष्ट्रियन किरदार मराठी में बात करे. लेकिन उस किरदार को एस्टैब्लिश करने के लिए उसके डायलॉग डिलीवरी में या फिर मैनरिज़्म में जरूरी होता है, वो इस किरदार में मिसिंग है. उदहारण के तौर पर बात की जाए तो हम अजय देवगन के ‘सिंघम’ या रणवीर सिंह के ‘बाजीराव’ या ‘सिम्बा’ में एक रीजनल टच देखते हैं. यहां तक कि सुशांत सिंह राजपूत ने भी पवित्र रिश्ता में मराठी लड़के के मैनरिज़्म को बखूबी पकड़ा था. लेकिन हर्षवर्धन राणे का किरदार पूरी तरह से सामान्य हिंदी फिल्म के हीरो की तरह लगता है.
Ek Deewane Ki Deewaniyat: पहले दिन 10 करोड़ कमाने वाली ‘दीवानियत’ के लिए मुसीबत न बन जाए ये 5 बातें, कैसे हो गई ऐसी गलतियां?
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