Entertainment: Aamir Khan: डेब्यू फिल्म ने बनाया स्टार, फिर भी घर जाकर क्यों रोते थे आमिर खान? खुद बताई वजह – #iNA

Aamir Khan Debut Film: साल 1988 में रिलीज हुई फिल्म ‘कयामत से कयामत तक’ से आमिर खान ने बॉलीवुड में कदम रखा. महज 23 साल की उम्र में ही इस फिल्म ने उन्हें रातों-रात स्टार बना दिया था. फिल्म कयामत से कयामत तक में राज के किरदार में सिल्वर स्क्रीन पर छाने वाले आमिर खान के लिए मेगा स्टार बनना आसान नहीं था. यह उनकी वो फिल्म थी, जिसे लोगों ने खूब पसंद किया लेकिन इस फिल्म के हिट होने के बावजूद उन्हें बहुत सी मुश्किलों का सामना करना पड़ा. जाने-माने फिल्ममेकर्स उनके साथ काम करना नहीं चाहते थे.

हाल ही में एक समिट के दौरान आमिर खान ने अपनी पहली फिल्म कयामत से कयामत तक की सक्सेस के बाद के बुरे दौर का एक्सपीरियंस शेयर किया. उन्होंने कहा कि 1988 में अपनी पहली डेब्यू फिल्म के बाद रातों-रात स्टार बनने के बाद भी फिल्ममेकर्स से ऑफर पाने के लिए काफी स्ट्रगल करना पड़ा था.

“खुद को साबित करना पड़ता था”

आमिर खान ने कहा, “मुझे बहुत सी फिल्मों के ऑफर मिलने लगे, लेकिन मुझे उन डायरेक्टर्स से ऑफर नहीं मिल रहे थे, जिनके साथ मैं काम करना चाहता था. मेरे पास उन डायरेक्टर्स की एक लिस्ट भी थी, जिनके साथ मैं काम करना चाहता था, लेकिन उनमें से किसी भी डायरेक्टर ने मुझसे अप्रोच नहीं किया.” मिस्टर परफेक्शनिस्ट ने आगे बताया कि उस समय, ‘कयामत से कयामत तक’ जैसी सुपरहिट फिल्म के बाद भी, आपको खुद को एक स्टार के तौर पर साबित करना पड़ता था, तभी A-ग्रेड के डायरेक्टर आपके साथ काम करना चाहते थे.

जब आमिर खान ने एक साथ साइन की 8-9 फिल्में

आमिर खान ने बताया कि उन्होंने उस समय 8 से 9 फिल्में साइन की थीं. लेकिन जब शूटिंग शुरू हुई, तो उन्हें एहसास हुआ कि उन्होंने ‘बहुत बड़ी गलती’ कर दी है. उन्होंने कहा, “मैं एक साथ दो-तीन फिल्में करने के लिए नहीं बना हूं,’ क्योंकि ‘लव लव लव’, ‘अव्वल नंबर’, ‘तुम मेरे हो’ और ‘जवानी जिंदाबाद’ जैसी शुरुआती फिल्में थिएटर में फ्लॉप हो गईं.” आमिर आगे कहते हैं कि वो अपने करियर की शुरुआत में फिल्मों के चुनाव से ‘नाखुश’ थे. एक्टर ने कहा कि तब जाकर उन्हें ‘अच्छी स्क्रिप्ट, सही डायरेक्टर और प्रोड्यूसर’ वाली फिल्में करने की अहमियत समझ में आई.

घर जाकर क्यों रोते थे आमिर?

आमिर ने बताया, “एक समय ऐसा आया कि मेरी सारी फिल्में फ्लॉप होने लगीं, एक फ्लॉप हुई, फिर दूसरी फ्लॉप हुई, फिर तीसरी भी. इसके बाद मीडिया ने मुझे ‘वन फिल्म वंडर’ का टैग दे दिया. यह देखकर मुझे लगने लगा कि मैं शायद सही नहीं कर रहा हूं और फिर मैं शाम को घर आकर रोता था. इसके बाद मैंने खुद से वादा किया कि अब मैं तब तक कोई फिल्म साइन नहीं करूंगा, जब तक कि मुझे डायरेक्टर पर भरोसा न हो, स्क्रिप्ट मुझे पसंद न हो, और प्रोड्यूसर ऐसा न हो जो उसे अच्छे से प्रोड्यूस और रिलीज कर सके.”

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आमिर खान की लाइफ का टर्निंग प्वॉइंट

एक्टर आगे कहते हैं, “मुझे ऐसा लगने लगा कि मेरा करियर खत्म हो गया है और कुछ भी मुझे बचा नहीं पाएगा. उस समय मुझमें फिल्म को ‘ना’ कहने का भरोसा और हिम्मत थी. शायद उसी ने मुझे अपने करियर में सभी मुश्किल फैसले लेने की ताकत दी, जैसे ‘लगान’, ‘तारे ज़मीन पर’ जैसी फिल्में करना. लेकिन मैं अपने सबसे बुरे दौर में भी समझौता न करने के लिए तैयार था. उसने मुझे बहुत ताकत दी और वह मेरे लिए एक टर्निंग पॉइंट था.”

आमिर खान आखिरी बार RS प्रसन्ना के डायरेक्शन में बनी फिल्म ‘सितारे ज़मीन पर’ में नजर आए थे. फिल्म को अभी OTT पर रिलीज नहीं किया गया. आमिर खान ने इस फिल्म को प्रोड्यूस भी किया था.

Aamir Khan: डेब्यू फिल्म ने बनाया स्टार, फिर भी घर जाकर क्यों रोते थे आमिर खान? खुद बताई वजह

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