Entertainment: Ajit Pawar: राजनीति ही नहीं, बॉलीवुड के ‘गोल्डन एरा’ से भी है अजित पवार का नाता, फिल्मों से जुड़े थे पिता अनंतराव – #iNA

Ajit Pawar Death: महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम अजित पवार का बुधवार को प्लेन हादसे में निधन हो गया. वो राज्य के पावरफुल नेताओं में से एक थे. सुबह 5 बजे उठकर अपना काम शुरू करने वाले बारामती के इस नेता के व्यक्तित्व में जो अनुशासन और ‘परफेक्शन’ दिखता था, उसका कनेक्शन मुंबई के मशहूर राजकमल स्टूडियो से भी था? जी हां, अजित पवार के पिता अनंतराव पवार भारतीय फिल्म जगत के उस दौर का हिस्सा थे, जब फिल्में सिर्फ मनोरंजन नहीं, बल्कि समाज सुधार का जरिया हुआ करती थीं.

सीनियर जर्नलिस्ट अदिति पराड़कर की मानें तो अजित पवार के पिता अनंतराव पवार, वी. शांताराम के ‘संकटमोचक’ थे. अनंतराव पवार का जन्म अहमदनगर के एक किसान परिवार में हुआ था. एक छोटे से गांव में रहने वाले और किसान परिवार से होने के बावजूद, अनंतराव के सपनों में फिल्मों का रंग था. वे मुंबई आए और उस दौर के सबसे महान फिल्मकार वी. शांताराम (शांताराम बापू) के साथ जुड़ गए. अनंतराव पवार केवल एक कर्मचारी नहीं, बल्कि राजकमल कलामंदिर (राजकमल स्टूडियोज) के एक मजबूत स्तंभ थे. उन्होंने सहायक निर्देशक और प्रोडक्शन मैनेजमेंट की कमान संभाली.

‘दो आंखें बारह हाथ’ और ‘नवरंग’ के पीछे का दिमाग

वी. शांताराम अपने अनुशासन के लिए जाने जाते थे, और अनंतराव ने उस अनुशासन को अपने भीतर इस कदर उतारा कि वे शांताराम बापू के सबसे भरोसेमंद सहयोगी बन गए. भारतीय सिनेमा की एवरग्रीन फिल्में जैसे ‘दो आंखें बारह हाथ’ (1957), ‘नवरंग’ (1959), ‘झनक झनक पायल बाजे’ और ‘गीत गाया पत्थरों ने’ के निर्माण में अनंतराव पवार की अहम भूमिका थी. उस दौर में आज की तरह आधुनिक तकनीक नहीं थी. फिल्म रील की भारी कमी होती थी और अनंतराव का काम यह सुनिश्चित करना था कि एक भी शॉट बर्बाद न हो. ‘दो आंखें बारह हाथ’ की शूटिंग के दौरान, जिसमें कैदियों के सुधार की कहानी दिखाई गई थी, अनंतराव ने सेट मैनेजमेंट और तकनीकी बारीकियों को इतनी सटीकता से संभाला कि फिल्म ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का नाम रोशन किया.

जब पिता के निधन ने बदल दी अजित पवार की जिंदगी

अनंतराव पवार का फिल्मी सफर शानदार चल रहा था, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था. उनके निधन ने पवार परिवार को झकझोर दिया. उस वक्त अजित पवार अपनी पढ़ाई कर रहे थे. पिता के जाने के बाद, परिवार की जिम्मेदारी अजित पवार और उनके भाई के कंधों पर आ गई. यहीं से अजित पवार का फिल्मी दुनिया से नाता टूटा और वे अपने चाचा शरद पवार के मार्गदर्शन में राजनीति की ओर मुड़ गए. जानकार कहते हैं कि अजित पवार के काम करने की जो ‘कॉर्पोरेट’ और ‘सटीक’ शैली है, वो असल में उनके पिता से विरासत में मिली है, जिन्होंने राजकमल स्टूडियो के प्रोफेशनल माहौल में सालों काम किया था.

राजकमल की ‘अनुशासन की पाठशाला’

अनंतराव ने जिस राजकमल स्टूडियो में काम किया, वो फिल्म इंडस्ट्री वालों के लिए यूनिवर्सिटी से कम नहीं था. वहां हर काम का वक्त तय था और गलती की कोई गुंजाइश नहीं थी. अजित पवार की कार्यशैली में भी वही झलकता है, वे सुबह 5 बजे उठते थे, 7 बजे मंत्रालय पहुंच जाते थे और अधिकारियों की क्लास लेते थे. ये ‘स्टूडियो डिसिप्लिन’ ही है जो आज महाराष्ट्र की राजनीति में ‘दादा’ (अजित पवार) की पहचान है.

Ajit Pawar: राजनीति ही नहीं, बॉलीवुड के ‘गोल्डन एरा’ से भी है अजित पवार का नाता, फिल्मों से जुड़े थे पिता अनंतराव

[ad_2]


देश दुनियां की खबरें पाने के लिए ग्रुप से जुड़ें,

[ad_1]

#INA #INA_NEWS #INANEWSAGENCY
Copyright Disclaimer :-Under Section 107 of the Copyright Act 1976, allowance is made for “fair use” for purposes such as criticism, comment, news reporting, teaching, scholarship, and research. Fair use is a use permitted by copyright statute that might otherwise be infringing., educational or personal use tips the balance in favor of fair use.
Credit By :-This post was first published on https://www.tv9hindi.com/, we have published it via RSS feed courtesy of Source link,

Back to top button