Entertainment: Anupama: सिर्फ महिलाएं ही नहीं, पुरुष भी होते हैं शिकार! ‘अनुपमा’ के नए ट्रैक ने समाज के ‘मैन अप’ वाले टैबू को दी चुनौती – #iNA

Anupama New Twist: स्टार प्लस का लोकप्रिय सीरियल ‘अनुपमा’ एक बार फिर चर्चा में है. लेकिन इस बार वजह शो में होने वाला कोई पारिवारिक कलह या शादी नहीं, बल्कि एक ऐसा मुद्दा है जिस पर समाज अक्सर खामोश रहता है. रुपाली गांगुली ये इस शो में अब पुरुषों पर होने वाले अत्याचार और घरेलू हिंसा के मुद्दे को प्रमुखता से दिखाया जा रहा है और इस नए ट्रैक को लेकर ‘अनुपमा’ यानी रुपाली ने खुलकर अपनी बात रखी है.
समाज में अक्सर पुरुषों को ‘मैन अप’ करने या अपनी भावनाओं को दबाने की सलाह दी जाती है. इसी चुप्पी को तोड़ने के लिए ‘अनुपमा’ के मेकर्स ने एक खास सीक्वेंस तैयार किया है. रुपाली गांगुली ने कहा कि टीवी ड्रामा में अक्सर महिलाओं को पीड़ित और पुरुषों को अपराधी के रूप में दिखाया जाता है, लेकिन हकीकत ये भी है कि पुरुष भी हिंसा का शिकार होते हैं और वे लोकलाज के डर से चुप रहते हैं.
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जानें क्या है रुपाली का कहना
रुपाली गांगुली ने अपने बयान में कहा कि शो के मेकर्स पुरुषों के खिलाफ होने वाली ज्यादतियों के खिलाफ अनुपमा को एक ‘माउथपीस’ (आवाज) के तौर पर इस्तेमाल कर रहे हैं. समाज में बहुत सी ऐसी बातें हैं जिन्हें अनकहा छोड़ दिया जाता है, लेकिन अब उन पर बात करना जरूरी है. मैं गर्व महसूस करती हूं कि मैं इस विजन का हिस्सा हूं.”
कपिल की कहानी से खुलेगा राज
अनुपमा के लेटेस्ट प्रोमो और एपिसोड में दिखाया गया है कि कपिल नाम का किरदार अपनी पत्नी कीर्ति के हाथों मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना झेल रहा है. कीर्ति दुनिया के सामने एक आदर्श पत्नी होने का नाटक करती है, लेकिन बंद दरवाजों के पीछे वो कपिल को ब्लैकमेल और टॉर्चर करती है. अनुपमा न केवल कपिल का साथ दे रही, बल्कि समाज के दोहरे मापदंडों को चुनौती देते हुए ये साबित कर रही है कि हिंसा का कोई जेंडर नहीं होता.
सामाजिक मुद्दों पर हमेशा आगे रहा है ‘अनुपमा’
रुपाली ने आगे बताया कि ये पहली बार नहीं है जब शो ने समाज को आईना दिखाया है. इससे पहले भी ‘अनुपमा’ ने कई महत्वपूर्ण विषयों पर संदेश दिया है, जैसे कि
- किसानों के मुद्दे पर जागरूकता
- दिवाली पर छोटे दुकानदारों से मोलभाव न करने की अपील
- बेसहारा जानवरों और गौसेवा के प्रति संवेदनशीलता
- पेरेंट्स और बच्चों के बीच सही तालमेल दिखाना.
रुपाली गांगुली का कहना है कि उन्हें खुशी है कि मेकर्स राजन शाही और दीपा शाही ने इस ‘टैबू’ (वर्जित विषय) पर बोलने का साहस दिखाया. ये ट्रैक उन सभी पुरुषों के लिए एक प्रेरणा है जो चुपचाप दर्द सह रहे हैं; ये संदेश साफ है, चाहे वो पति हो या पत्नी, हिंसा किसी भी रूप में स्वीकार्य नहीं है.
Anupama: सिर्फ महिलाएं ही नहीं, पुरुष भी होते हैं शिकार! ‘अनुपमा’ के नए ट्रैक ने समाज के ‘मैन अप’ वाले टैबू को दी चुनौती
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