Entertainment: अरिजीत सिंह अकेले नहीं प्लेबैक को अलविदा कहने वाले, पहले भी कई गायकों ने फिल्मों में गाने से बनाई दूरी – #iNA

आज के लोकप्रिय गायक अरिजीत सिंह ने प्लेबैक सिंगिंग के लिए नए असाइनमेंट पर ब्रेक का जैसे ही ऐलान किया, उनकी आवाज और गायकी के कद्रदानों में मायूसी छा गई. सभी फैन्स भौंचक्क और भावुक! महज अड़तीस साल के गायक अरिजीत ने आखिर फिल्मों से अवकाश लेने का फैसला क्यों लिया? सबके जेहन और जुबान पर बस यही सवाल. इसी के साथ उनके गाए गानों की पंक्तियों के साथ सोशल मीडिया पर कथित ‘संन्यास’ की सुर्खियां शुमार हो गईं- अच्छा चलता हूं… दुआओं में याद रखना…! आदि आदि. हालांकि अरिजीत ने अपनी पोस्ट में यह भी साफ किया कि उन्होंने गाना नहीं छोड़ा, वो गाते रहेंगे, केवल फिल्मों में नहीं गाएंगे. लेकिन फैन्स तो फैन्स होते हैं. जितने फैन्स, उतने सवाल.
वैसे हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में गायकी के इतिहास के पन्ने पलटें तो अरिजीत सिंह अकेले ऐसे गायक नहीं, जिन्होंने एक समय के बाद फिल्मों में गाने से रिटायरमेंट ली. अनेक ऐसे गायक हुए, जिन्होंने एक उम्र और पड़ाव के बाद फिल्मी गाने को अलविदा कहा या दूरी बना दी. कुछ कलाकारों ने हमेशा के लिए गाना ही बंद किया तो कुछ ने फिल्मों की बजाय लाइव कंसर्ट और प्राइवेट अलबम में अपनी सक्रियता बढ़ाई. ऐसे कुछ गायक-गायिकाओं के नाम और काम की चर्चा हम आगे करेंगे.
अरिजीत के अचानक फैसले का मतलब
फिलहाल अरिजीत सिंह के फैसले का मतलब समझने की कोशिश करते हैं. अरिजीत ने अपने फैन्स को संबोधित करते हुए सोशल मीडिया पर जो भावनाएं व्यक्त की हैं, उसके मुताबिक अब उन्हें फिल्मों में गाने से ‘बोरियत’ होने लगी थी. आपको बताएं कि अरिजीत सिंह ने फिल्मों में गाने की बकायदा शुरुआत प्रीतम के साथ साल 2010 से ही की. लेकिन 2013 की फिल्म आशिकी 2 से चर्चा में आए. नए ज़माने की लव स्टोरी और कर्णप्रिय गीत-संगीत को लेकर यह फिल्म युवाओं में काफी प्रसिद्ध हुई.
इस फिल्म से युवाओं को एक ताजा आवाज सुनने को मिली, वह गाना था- तुम ही हो… अरिजीत युवाओं के नए रोल मॉडल बने. लोगों को लगा कि सोनू निगम के बाद इंडस्ट्री को एक और ऐसा गायक मिला, जिसकी आवाज़ एक दिल से निकलती है और लाखों दिलों तक पहुंचती है. अरिजीत का जबरदस्त इस्तकबाल हुआ. और लगातार प्रसिद्धि ऊंचाइयां छूते गए और पुरस्कार हासिल बटोरते रहे.
38 साल की उम्र में फिल्मों के लिए 16 साल
अरिजीत सिंह का आखिरी गाना सलमान खान की आने वाली फिल्म ‘बैटल ऑफ गलवान’ में मातृभूमि… है. इस प्रकार देखें तो जिस युवा गायक ने 2010 से अपना फिल्मी करियर प्रारंभ किया, उसने 2026 में ही इस बयान के साथ अपना फिल्मी करियर क्यों समाप्त किया कि उन्हें अब सिनेमा के लिए गाने में ‘बोरियत’ होती है, संगीत में कुछ नया करना चाहते हैं. देखें तो साल 2010 से 2026 तक अरिजीत सिंह ने बॉलीवुड फिल्मों के लिए तकरीबन सोलह साल दिए हैं. अड़तीस साल की उम्र में फिल्मों के लिए सोलह साल बहुत ज्यादा नहीं होते. हालांकि इसमें कोई दो राय नहीं कि महज सोलह सालों में ही अरिजीत सिंह ने काफी लोकप्रिय गाने दिए और फैन्स के दिलों पर राज़ किया, जिसकी चर्चा हमेशा होती रहेगी. फिल्मों गाने से वह याद किए जाएंगे.
कंसर्ट में स्वर से खेलने का मौका मिलता है
गौरतलब है कि एक समर्पित गायक हमेशा नए प्रयोग का हिमायती होता है. नए प्रयोग की साधना और चुनौती किसी भी संवेदनशील और प्रतिभाशाली कलाकार की शख्सियत की पहचान होती है. अरिजीत सिंह अगर संगीत के नए मुकाम हासिल करने के लिए फिल्मों को अलविदा कह रहे हैं तो उनकी सृजनात्मकता और ख्वाहिश की तड़प को समझा जा सकता है. अरिजीत सिंह ने ‘बोरियत’ शब्द का जिक्र करते हुए विविधता पर जोर दिया है. उन्होंने कहा कि संगीत का सच्चा आनंद जैसा स्टेज पर परफॉर्म करने में मिलता है, वैसा फिल्मों में नहीं मिल रहा है-इसलिए ‘बोरियत’ हो रही है. लाइव कंसर्ट में वह आवाज से खेल पाते हैं जादुई आरोह-अवरोह पैदा कर पाते हैं और दर्शकों या श्रोताओं से सीधे मुखातिब होते हैं तो संगीत का जोश और जीवंत होता है.
‘बोरियत’ में फिल्म गीत-संगीत पर सवाल
लेकिन गौर करें तो इस फैसले में एक गंभीर सवाल वर्तमान फिल्म संगीत को लेकर भी छुपा है. क्या आज के फिल्म गीत-संगीत में विविधता की कमी आ गई है? जिस विविधता और जीवंतता की तलाश में अरिजीत सिंह अब कुछ नया करने का इरादा रखते हैं, क्या मौजूदा फिल्म संगीत में उसका दायरा छोटा हो गया? गुजरे जमाने को याद करें तो मो. रफी, किशोर कुमार, मुकेश, लता मंगेशकर, आशा भोसले, मन्ना डे, महेंद्र कपूर, येसुदास, सुरेश वाडेकर से लेकर उदित नारायण, सोनू निगम और सुनिधि चौहान तक को ऐसा कभी महसूस नहीं हुआ. ये कलाकार फिल्मों में गाने से कथित तौर पर कभी ‘बोर’ नहीं हुए. ये सभी कलाकार अलग-अलग दौर में अलग-अलग मिजाज के गीत-संगीत पर अपनी-अपनी आवाजें देते रहे. लेकिन अरिजीत सिंह को महज सोलह साल में ही फिल्मों में गाने से ‘बोरियत’ हो रही है. बहरहाल यह उनका निजी फैसला है.
सुमन कल्याणपुर, अमित कुमार, शब्बीर कुमार (फाइल फोटो)
पहले भी कुछ कलाकार फिल्मों से हुए दूर
अब उन गायकों की बातें जिन्होंने अपने सक्रिय जीवनकाल में एक समय के बाद फिल्मों में गायकी से दूरी बना ली. इस लिहाज से अरिजीत सिंह ऐसे अकेले नहीं प्लेबैक सिंगर नहीं हैं, जिन्होंने फिल्मों को अलविदा कहा. आज जब मैं यह आर्टिकल लिख रहा हूं, तो आज ही के दिन (28 जनवरी) प्रसिद्ध गायिका सुमन कल्याणपुर का जन्मदिन है. सुमन कल्याणपुर ने फिल्मों में गाकर खूब प्रसिद्धि बटोरी. उन्हें लता मंगेशकर की हमआवाज़ कहा गया है. वह लता मंगेशकर की उत्तराधिकार साबित हो सकती थीं लेकिन सन् 1981 में ‘नसीब’ फिल्म में आखिरी गीत ‘जिंदगी इम्तिहान लेती है…’ गाकर फिल्मों में पार्श्वगायन को अलविदा कह दिया.
फिल्मों में पार्श्वगायन छोड़ने के साथ ही सुमन कल्याणपुर धीरे-धीरे गुमनाम भी होने लगीं. सुमन के अलावा अपने ज़माने के मशहूर गायक कलाकार किशोर कुमार के बेटे अमित कुमार भी फिल्मों में गाना छोड़ चुके हैं. उन्होंने दूसरी पारी लाइव कंसर्ट को समर्पित कर दी. अमित कुमार के साथ ही शब्बीर कुमार भी अब गाना छोड़ चुके हैं. मो. रफी के निधन के बाद अनवर, शब्बीर कुमार और मुन्ना अजीज जैसे गायक उभरे. मुन्ना अजीज अब इस दुनिया में नहीं हैं लेकिन अनवर भी शब्बीर कुमार की तरह फिल्मों में गाना छोड़ने के बाद गुमनाम हो चुके हैं.
सोनू निगम प्रयोग से ‘बोरियत’ दूर कर लेते हैं
‘बॉबी’ में ‘मैं नहीं बोलना…’, ‘बेनाम’ में ‘यारा ओ यारा…’ या फिर ‘अवतार’ के वैष्णो देवी के गीत ‘चलो बुलावा आया है…’ गाने वाले चंचल ने भी एक समय के बाद फिल्मों को अलविदा कह दिया था. इन्हीं के साथ सुरेश वाडेकर, अनुराधा पोंडवाल, अलका याज्ञनिक और साधना सरगम जैसी कलाकारों ने भी सक्रिय पार्श्वगायन से दूरी बना ली.
गौरतलब है कि सोनू निगम भी कुछ समय के लिए फिल्मों से दूर रहे लेकिन उन्होंने संगीत में विविधता की तलाश हर समय जारी रखी और उस बोरियत को कभी पास फटकने नहीं दिया, जिसके शिकार आज अरिजीत सिंह हुए हैं. सोनू निगम जितना कंसर्ट में प्रयोग करते रहे, उतने ही फिल्मी गायकी में भी.
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अरिजीत सिंह अकेले नहीं प्लेबैक को अलविदा कहने वाले, पहले भी कई गायकों ने फिल्मों में गाने से बनाई दूरी
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