Entertainment: अरुणा ईरानी-बोमन ईरानी… वॉलीवुड में और कितने ईरानी, जानें क्या है इनकी फिल्मी कहानी – #iNA

सोनू निगम का गाया गाना था- असलम भाई… दुबई का चश्मा… चीन की चड्ढी और ईरानी चाय… तब ये ईरानी शब्द खूब प्रचलन में आया था. आज एक बार फिर ईरान और ईरानी शब्द मीडिया की सुर्खियों में है. इजरायल और ईरान की जंग ने पूरी दुनिया का ध्यान खींचा है. लेकिन आज हम आपको बताएंगे भारत में ईरानी सरनेम लिखने वालों की कहानी. आखिर भारत में रहने वाले पारसी समुदाय के बहुत से लोग अपना सरनेम ईरानी क्यों लिखते हैं. हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में आखिर कितने ईरानी हैं.
इसमें कोई दो राय नहीं कि पारसी समुदाय ने हिंदुस्तान में सिनेमा, थिएटर और उद्योग के क्षेत्र में बड़ा योगदान दिया है लेकिन ये ईरानी लिखना क्यों पसंद करते हैं, ये जानना दिलचस्प है. हिंदी फिल्मों में ईरानी सरनेम लिखने वालों अच्छी खासी संख्या है. हिंदुस्तान में बोलती फिल्म की बुनियाद रखने वाले कोई और नहीं बल्कि ईरानी ही थे, पूरा नाम था- अर्देशिर ईरानी. अगर अर्देशिर न होते तो टॉकी मूवी बनने में और कितने समय लगते.
फिल्मों में कैसे आई अरुणा ईरानी?
संभव है आज बहुत से लोगों को अर्देशिर ईरानी का नाम सहजता से याद नहीं होगा, पहली बोलती फिल्म आलम आरा (1931) के बारे में गुगल करने पर यह नाम पढ़ने को मिलेगा. लेकिन अरुणा ईरानी और बोमन ईरानी को तो बखूबी जानते होंगे. वह अरुणा ईरानी जिन्होंने हिंदी, मराठी और गुजराती की सौ से अधिक फिल्मों और टीवी सीरियलों में काम किया है. उनके पिता ईरानी और मां हिंदू थीं. पिता थिएटर कंपनी चलाते थे, मां अभिनेत्री थीं. आर्थिक कठिनाइयों के चलते आगे की पढ़ाई खत्म करके उन्होंने बचपन से ही फिल्मों में काम करना प्रारंभ कर दिया. बड़ी होने पर हर किस्म के रोल किए. चरित्र भूमिका से लेकर वैम्प तक उन्होंने अपनी अभिनय प्रतिभा का लोहा मनवाया.
बहुत लोगों को ये जानकारी होगी कि उनके परिवार में कई लोग फिल्म इंडस्ट्री में रहे हैं मसलन इंद्र कुमार, आदि ईरानी और फिरोज ईरानी. चरित्र अभिनेत्री बिंदू उनकी कज़न सिस्टर है. अरुणा ईरानी ने अमिताभ बच्चन के साथ भी बतौर मुख्य अभिनेत्री काम किया है- वह फिल्म थी- बॉम्बे टू गोवा.
कठिन संघर्ष के बाद अभिनेता बने बोमन
अरुणा ईरानी की तरह ही बोमन ईरानी भी हिंदी फिल्मों के एक सफल कलाकार हैं. उन्होंने भी सौ से अधिक फिल्मों में काम किया है.बोमन ईरानी का प्रारंभिक जीवन भी काफी संघर्षों से घिरा रहा है. उनके जन्म से पहले ही उनके पिता का देहांत हो गया था. बचपन में कई जगहों पर काम करते हुए शिक्षा पूरी की. पेशेवर जिंदगी की शुरुआत बतौर फोटोग्राफर की थी. फिर अलीक पदमसी के संपर्क में आने के बाद थिएटर में आए और उसके बाद फिल्मों में आए. मुन्ना भाई एमएमबीबीएस से लाइमलाइट में आए.
डेजी ईरानी और हनी ईरानी की कहानी
अरुणा ईरानी और बोमन ईरानी के अलावा दो ऐसे और नाम हैं, जिनका जिक्र जरूरी है. ये नाम हैं- डेजी ईरानी और हनी ईरानी. फिल्म इंडस्ट्री में दोनों की बड़ी धाक रही है. डेजी ईरानी ने बचपन से ही अभिनय के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाई वहीं हनी ईरानी अभिनय के बाद एक मशहूर पटकथा लेखिका के तौर पर जानी गईं. हनी ईरानी गीतकार जावेद अख्तर की पहली पत्नी भी हैं. वह फरहान अख्तर और जोया अख्तर की मां हैं. हनी ईरानी ने जावेद अख्तर से अलग होने के बाद फिल्मों के लिए लिखना प्रारंभ किया. उन्होंने 1991 की लम्हे से लेकर 2013 की कृष 3 तक की पटकथा लिखी है. इन दोनों के अलावा वह डर, कहो न प्यार है, कोई मिल गया जैसी ब्लॉकबस्टर फिल्मों की भी पटकथा लेखिका हैं.
पारसी थिएटर से ही जुड़े थे ईरानी
दादा साहेब फाल्के भारत में फिल्मों के जनक कहे जाते हैं तो अर्देशिर ईरानी बोलती फिल्मों के सूत्रधार. अर्देशिर भी पारसी समुदाय से ताल्लुक रखते थे. सन् 1924 में ही उन्होंने मैजेस्टिक फिल्म कंपनी की स्थापना की थी. इसके बाद सन् 1925 में उन्होंने इंपीरियल फिल्म्स बनाई. लेकिन 14 मार्च 1931 को पहली बोलती फिल्म आलम आरा बनाकर उन्होंने इतिहास रच दिया और यहीं से बोलती फिल्में बनने लगीं. इतना ही नहीं, उन्होंने पहली भारतीय अंग्रेजी फीचर फिल्म नूरजहां (1934) के साथ-साथ भारत की पहली रंगीन फीचर फिल्म किसान कन्या (1937) भी बनाई. पुणे में जन्मे अर्देशिर ईरानी मूल रूप से थिएटर और सिनेमा के उद्यमी थे.
बोलती फिल्मों के आरंभ से पहले भारत में पारसी थिएटर का बोल वाला था. चूंकि इस पारसी थिएटर के ज्यादातर कर्ताधर्ता पारसी समुदाय के थे, जिनका मूल कभी ना कभी ईरान से था, वे तंबू लगाकर जगह जगह नाटक किया करते थे. ईरान से भारत में आने वाले पारसी समुदाय के बहुत से लोग अलग-अलग व्यवसायों में लग गए. उनके पूर्वजों के आगे जीवनयापन का एक बड़ा प्रश्न था. उन्हीं में कुछ ने अपनी रुचि के मुताबिक थिएटर और सिनेमा की ओर रुख किया. उन्हीं परिवारों से ताल्लुक रखने वाले अर्देशिर ईरानी भी थे.
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