Entertainment: Asrani: सरनेम से मशहूर होने वाले इकलौते अभिनेता थे असरानी, नहीं मिलती ऐसी कोई दूसरी मिसाल – #iNA

Asrani Surname: असरानी के नाम की कहानी भी बहुत दिलचस्प है. ऐसी कहानी फिल्म इंडस्ट्री में शायद ही किसी हीरो या हीरोइन के नाम हो. बॉलीवुड में ज्यादातर कलाकार अपने मूल नाम से मशहूर हुए या बदले हुए नाम से, लेकिन असरानी अकेले ऐसे अभिनेता थे, जो अपने सरनेम से जाने-पहचाने गए. महज एक शब्द वाला उनका नाम वाकई बहुत अलबेला और प्यारा-सा लगता है. दिवाली के दिन उनका निधन हुआ और इसके बाद उनको श्रद्धांजलि देने वालों का तांता लग गया. उनकी फिल्मों में निभाए उनके किरदार याद किए जाने लगे. इस दौरान बहुत से लोगों को पहली बार पता चला कि उनका पूरा नाम गोवर्धन असरानी था. यानी उनका नाम गोवर्धन था और असरानी था-सरनेम. फिल्म इंडस्ट्री के इतिहास में शायद ही ऐसा कलाकार हुआ जो नाम से नहीं बल्कि सरनेम से पॉपुलर हुआ. उसका सरनेम ही मुख्य नाम बन गया.
वैसे हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में कलाकारों के नाम की भी बहुत ही दिलचस्प कहानियां हैं. यहां एक शब्द का नाम लिखने का चलन काफी पहले से रहा है. जैसे कि धर्मेंद्र, जितेंद्र, नूतन, नरगिस, रंजीत, जीवन या फिर काजोल आदि तक. गौर कीजिए तो इन जैसे कलाकारों ने अपने नाम के साथ सरनेम लिखना कभी जरूरी नहीं समझा. बहुत बाद में लोगों को पता चला कि धर्मेंद्र देओल थे तो जितेंद्र रवि कपूर थे, रंजीत गोपाल बेदी थे, नरगिस सुनील दत्त से शादी के बाद दत्त बनीं या फिर नूतन और काजोल बंगाली परिवार से थीं.
बॉलीवुड में दिलचस्प है नामों की कहानी
इतिहास में झांककर देखें तो जिन कलाकारों ने एक शब्द का नाम नहीं लिखा तो उनके नाम के साथ कुमार या कुमारी लिख दिया जाता था. जैसे कि अशोक कुमार, दिलीप कुमार, राजेंद्र कुमार, राज कुमार, मनोज कुमार से लेकर अक्षय कुमार आदि तक. हालांकि बाद में इन कलाकारों के मूल नाम और सरनेम भी किसी से छुपा नहीं रह गया. लेकिन इस तरह के रिवाज और फेहरिस्त में असरानी अकेले कलाकार ठहरते हैं जो कि अपने सरनेम से जाने गए. आखिर ऐसा क्यों और कैसे हुआ?
गौरतलब है कि असरानी मूल रूप से सिंधी हिंदू परिवार से ताल्लुक रखते थे. राजस्थान में जयपुर के रहने वाले थे. जाहिर है उनके पूर्वज कभी सिंध प्रांत से आकर यहां बस गए थे. जयपुर में ही रेडियो स्टेशन से जुड़े थे. पुणे या मुंबई जाने से पहले यहां वायस ओवर आदि किया करते थे. उनकी आवाज साफ थी, उसमें खनक थी, उच्चारण भी अच्छा था. वायस ओवर में अदायगी पेश होती थी. इस लिहाज से बतौर कलाकार उनकी पहचान बनने लगी. लोग उन्हें असरानी-असरानी बोलने लगे.
असरानी
एफटीआईआई की फिल्म में भी असरानी नाम
बाद में जब मुंबई फिल्म इंडस्ट्री अभिनय के लिए संघर्ष करने गए तो उससे पहले पुणे स्थित फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (FTII) का रुख करना पड़ा. उन्हें बताया गया था कि प्रशिक्षण लेकर एक्टर बनने से राह आसान हो जाती है. लिहाजा उन्होंने अभिनय का कोर्स पूरा किया. एफटीआईआई में कोर्स पूरा करने के दौरान हर कलाकार को अपनी एक शॉर्ट फिल्म बनानी होती है. उसमें अभिनय करना होता है. दिलचस्प बात ये कि असरानी ने कोर्स के तहत बनाई गई एफटीआईआई की जिस फिल्म में काम किया था, उसमें भी स्क्रीन पर उनका नाम असरानी ही प्रमुखता से दर्ज है. उनके किरदार देव के आगे कलाकार के तौर पर लिखा है- जी.के.असरानी. यानी पूरा नाम हम कह सकते हैं- गोवर्धन कुमार असरानी. यहां भी गोवर्धन साफ-साफ नहीं लिखा गया था.
आपको बता दें कि असरानी ने एफटीआईआई की जिस फिल्म में सबसे पहले बतौर नायक अभिनय किया था, वह थी- परिवर्तन. यह सन् 1965 की बात है. इस फिल्म का निर्देशन रमेश गुप्ता ने किया था. फिल्म में असरानी ने डॉक्टर देव का किरदार निभाया था. यह बहुत ही जज्बाती किस्म का डॉक्टर है. उसकी पत्नी उसे शहर जाकर क्लिनिक खोलने या शहर में किसी बड़े अस्पताल में नौकरी करने के लिए कहती है ताकि घर में भौतिक सुख सुविधाएं बढ़ें, लेकिन देव गांव में ही गरीबों, साधनहीनों की सेवा करना चाहता है.
असरानी बोलने-सुनने में प्यारा-सा लगता है
इस फिल्म की क्रेडिट लाइन से जाहिर होता है कि फिल्मों में भाग्य आजमाने के दौरान उनको किसी ने गोवर्धन के बदले असरानी लिखने की नसीहत नहीं दी, बल्कि ये फैसला उनका अपना रहा होगा. असरानी को वह पहले से ही प्रमुखता से लिखते थे. उन्होंने एक बार बताया था कि बातों-बातों में लोग गोवर्धन की बजाय उनके सरनेम असरानी से ज्यादा पुकारा करते थे. क्योंकि असरानी बोलने में गोवर्धन की बजाय अधिक सुविधाजनक था और यह सुनने में बहुत प्यारा भी लगता है. यह लोगों की जुबान पर इतना बस गया कि उन्होंने आगे चलकर पर्दे पर गोवर्धन के बदले असरानी ही लिखवाया और अपने सरनेम से ही फेमस हो गए. गोवर्धन नाम जानने के बाद भी लोग उन्हें असरानी ही कहना ज्यादा पसंद करते हैं.
Asrani: सरनेम से मशहूर होने वाले इकलौते अभिनेता थे असरानी, नहीं मिलती ऐसी कोई दूसरी मिसाल
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