Entertainment: Border vs Border 2: पाकिस्तान से जंग और सेना की बहदुरी…पर पहली और दूसरी बॉर्डर में हैं ये पांच बड़े अंतर – #iNA

Border 2 News: साल 1997 में जब जेपी दत्ता की ‘बॉर्डर’ आई थी, तब थिएटर में ‘हिंदुस्तान जिंदाबाद’ के नारों से दीवारें गूंज उठी थीं. अब सालों बाद, उसी वीरता और 1971 के भारत-पाक युद्ध की यादें ‘बॉर्डर 2’ के साथ बड़े पर्दे पर लौट आई हैं. हालांकि दोनों फिल्में एक ही युद्ध की पृष्ठभूमि पर आधारित हैं, लेकिन ‘बॉर्डर 2’ सिर्फ एक सीक्वल नहीं, बल्कि वॉर की कहानी का एक नया नजरिया है. सोशल मीडिया पर फिल्म को लेकर जबरदस्त बज है. आइए जानते हैं ‘बॉर्डर’ और ‘बॉर्डर 2’ के बीच वो 5 बड़े अंतर, जो इस बार की जंग को और भी दिलचस्प बना रहे हैं.
1. लोंगेवाला की जमीन से आगे बढ़ चुकी है कहानी : ‘बॉर्डर’ पूरी तरह से लोंगेवाला की लड़ाई पर केंद्रित थी, जहां मुट्ठी भर सैनिकों ने टैंकों की फौज को धूल चटाई थी. लेकिन ‘बॉर्डर 2’ का कैनवास बहुत बड़ा है. इस बार कहानी सिर्फ रेगिस्तान तक सीमित नहीं है. इसमें भारतीय नौसेना और वायुसेना के उन अनसुने ऑपरेशन्स को भी जोड़ा गया है, जिन्होंने 1971 की जीत में अहम भूमिका निभाई थी.
2. सनी देओल का नया अवतार
पहली फिल्म में सनी देओल ‘मेजर कुलदीप सिंह चांदपुरी’ के रोल में थे. ‘बॉर्डर 2’ में भी सनी पाजी का वही पुराना रसूख बरकरार है, लेकिन इस बार उनका किरदार अलग है. जहां पहली फिल्म में उनकी ताकत उनका ‘गुस्सा’ था, वहीं इस बार उनके ‘अनुभव’ और ‘लीडरशिप’ को ज्यादा गहराई के साथ दिखाया गया है. इस बार वो फिल्म में लेफ्टिनेंट कर्नल फतेह सिंह कलेर बने हैं.
3. तकनीक का सही इस्तेमाल
1997 में वीएफएक्स ज्यादा दमदार नहीं था, फिर भी जेपी दत्ता ने असली टैंकों और धमाकों से बड़े परदे पर जादू रचा था. लेकिन ‘बॉर्डर 2’ आधुनिक सिनेमा की तकनीक का भरपूर इस्तेमाल करती है. सोशल मीडिया पर लोग फिल्म के वॉर सीन्स और साउंड डिजाइन की तारीफ कर रहे हैं. टैंकों की गड़गड़ाहट और फाइटर जेट्स के फाइट सीन्स इस बार इंटरनेशनल लेवल के लग रहे हैं.
4. नई पीढ़ी के सितारों की एंट्री
पहली फिल्म में सुनील शेट्टी, अक्षय खन्ना और जैकी श्रॉफ जैसे दिग्गज थे. ‘बॉर्डर 2’ में कास्टिंग को लेकर काफी एक्सपेरिमेंट किया गया है. अहान शेट्टी, वरुण धवन और दिलजीत दोसांझ जैसे सितारों ने फिल्म में नई ऊर्जा भर दी है. खासकर दिलजीत दोसांझ का किरदार और उनके इमोशनल सीन्स दर्शकों को खूब रुला रहे हैं, जो पहली फिल्म के अक्षय खन्ना (धरमवीर) के किरदार की याद दिलाते हैं.
5. संगीत और राष्ट्रवाद का बदलता सुर
‘संदेसे आते हैं’ आज भी हर भारतीय की आंखों में आंसू ले आता है. ‘बॉर्डर 2’ में संगीतकार ने उस पुरानी धुन को बरकरार रखते हुए कुछ नईं पंक्तियां जोड़ी हैं. फिल्म का बैकग्राउंड स्कोर इस बार ज्यादा आक्रामक और जोश से भरा है, जो आज की युवा पीढ़ी के ‘न्यू इंडिया’ वाले जज्बे से मेल खाता है. ‘बॉर्डर’ जहां वतन की रक्षा के लिए ‘कुर्बानी’ की कहानी थी, वहीं ‘बॉर्डर 2’ पाकिस्तान को मुंहतोड़ जवाब देने वाले ‘दमखम’ की कहानी है. अगर आप भी 1971 की उस ऐतिहासिक जीत को एक नए प्रेरणादायी रूप में देखना चाहते हैं, तो ‘बॉर्डर 2’ थिएटर में जरूर देखें.
Border vs Border 2: पाकिस्तान से जंग और सेना की बहदुरी…पर पहली और दूसरी बॉर्डर में हैं ये पांच बड़े अंतर
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