Entertainment: De De Pyaar De 2 Review: ‘शैतान’ के बाद फिर आमने-सामने अजय देवगन-आर माधवन! जानें फिल्म में किस के तेवर पड़े भारी – #iNA

De De Pyaar De 2 Review in Hindi: साल 1984… फिल्म ‘शराबी’ में अमिताभ बच्चन ने एक गाना गाया था, “दे दे प्यार दे, प्यार दे, प्यार दे रे, हमें प्यार दे…” तब तो उन्हें प्यार की खोज करते हुए ही पसीना आ गया था. लेकिन जब 2019 में लव रंजन अपनी फिल्म ‘दे दे प्यार दे’ लेकर आए, तब उन्होंने दिखा दिया कि 50 साल के आशीष (अजय देवगन) पर दो हसीनाएं (रकुल और तब्बू) फिदा हैं. प्यार का ये ट्रायंगल मजेदार तो था, पर अजय देवगन का 26 साल की लड़की को डेट करना और पहली पत्नी से तलाक न लेना, इस स्टोरी लाइन पर कई ‘संस्कारी’ दर्शकों ने दावल उठाए थे.
वैसे भी लव रंजन की फिल्मों पर हमेशा से ‘औरत के खिलाफ’ होने का इल्जाम लगाया जाता है. क्योंकि उनकी कहानियों में अक्सर लड़के ही हावी दिखते हैं. पर 6 साल बाद, 2025 में आई ‘दे दे प्यार दे 2’ बताती है कि फिल्ममेकर ने अब अपना ‘पुराना चोला’ बदलने की ठान ली है. इस बार कहानी की ‘जान’ है वो लड़की, जो अपनी बात खुल कर कहती है, और जिसे कोई चुप नहीं करा सकता.
कहानी
पिछली फिल्म में तो आशीष ने अपनी नई गर्लफ्रेंड को बच्चों और बीवी से मिलवाया था. इस बार कहानी थोड़ी आगे बढ़ी है. छह साल बाद, आयशा (रकुल प्रीत सिंह) फाइनली आशीष (अजय देवगन) से शादी करने का मन बना चुकी है. अब बारी है घरवालों से मिलने की. आयशा उन्हें अपने मम्मी-पापा राकेश (आर. माधवन) और अंजू खुराना (गौतमी कपूर) से मिलवाने चंडीगढ़ ले जाती है. राकेश, जिन्हें सब ‘राज’ भी कहते हैं, और अंजू… ये जोड़ी खुद को ‘पढ़े-लिखे, मॉडर्न और खुली सोच’ वाले पेरेंट्स मानती है. पहले तो दोनों बड़े आराम से आशीष से मिलते हैं, पर जैसे ही पता चलता है कि 56 साल का आदमी उनकी 26 साल की बेटी से शादी करना चाहता है, तो उनके सारे ‘प्रगतिशील’ आदर्श हवा हो जाते हैं.
बस फिर क्या था! ‘लिबरल डैड’ राज, अचानक से ‘पापा नोज बेस्ट’ वाले सख्त पापा बन जाते हैं. अपनी बेटी को आशीष से दूर करने के लिए वो एक प्लान बनाते हैं. इस प्लान में एंट्री होती है आदित्य (मीजान जाफरी) की, जिसे राकेश ‘बेटी पटाओ मिशन’ पर लगा देते हैं, ताकि आयशा, आशीष को छोड़ दे. आगे क्या होता है? ये जानने के लिए थिएटर में जाकर ‘दे दे प्यार दे’ 2 देखनी होगी.
जानें कैसी है ये फिल्म
‘दे दे प्यार दे’ एक अच्छी कॉमेडी फिल्म है. शैतान के बाद आर माधवन और अजय देवगन को फिर एक बार एक नए अंदाज में देखना मजेदार है. पूरी फिल्म में हम बोर नहीं होते. सेकंड हाफ में कुछ पल के लिए फिल्म की रफ्तार धीमी होती है, पर चेहरे पर मुस्कराहट फिर भी रहती है. ये वो फिल्म है, जो न आपको सोचने में मजबूर करती हैं न ही कोई ज्ञान देती है. बस, थिएटर में जाओ, पॉपकॉर्न खाओ और एन्जॉय करो.
निर्देशन
इस बार ‘दे दे प्यार दे 2’ डायरेक्शन की कमान अंशुला शर्मा के हाथ में है, जो पहले लव रंजन को असिस्ट कर चुके हैं. लव रंजन ने तरुण जैन के साथ मिलकर इस सीक्वल की कहानी को लिखा है. ‘दे दे प्यार दे 2’ की शुरुआत रिफ्रेशिंग. इस बार लव रंजन की नायिका दमदार है. वो प्यार के लिए अपने अमीर परिवार से बगावत करने के लिए भी तैयार है. कहानी के पहले हाफ तक, इस फिल्म में आपको कहीं से भी वो ‘पुरुष-प्रधान सोच’ नहीं दिखेगी, जिसके लिए लव रंजन को जाना जाता है. राकेश और अंजू का गुस्सा जायज और स्वाभाविक लगता है.
निर्देशक ने शुरुआत में आयशा को अपने आशिक (आशीष) को मम्मी-पापा के तीखे सवालों से बचाते हुए दिखाया है. फिल्म देखते हुए यही लगता है कि अब ‘पापा नोज बेस्ट’ वाली बात पर आयशा पलट कर जवाब देगी. लेकिन, अचानक से कहानी में एक ऐसा झटका दिया गया है कि आयशा, आशीष और हम सब हैरान रह जाते हैं. आयशा एक ऐसा फैसला लेती है, जिससे एक पल को फिर लगता है, “अरे! ये तो फिर वही पुराना लव रंजन स्टाइल हो गया.”
हालांकि, राहत की बात ये है कि आखिरी हिस्से में लेखक तरुण जैन और लव रंजन इस अजीबोगरीब मोड़ को सही साबित करते हैं. अंत भला, तो सब भला हो जाता है, पर मन में ये सवाल ज़रूर आता है कि क्या इतना तामझाम करने की ज़रूरत थी? ड्रामा तो है, पर थोड़ा बनावटी सा लगता है.
एक्टिंग
फिल्म देखने के बाद आप सोचेंगे कि क्या आशीष सच में इस सीक्वल का हीरो है? क्योंकि अजय देवगन ज्यादातर समय शांत और चुपचाप ही दिखते हैं. आप उन्हें दोष नहीं दे सकते, क्योंकि पूरी कहानी बाप और बेटी के बीच की ‘विचारधारा की जंग’ पर टिकी है. आशीष बड़ी समझदारी दिखाते हैं, शांत रहते हैं और राकेश-अंजू की चिंताओं का सम्मान करते हैं. वो सही समय पर चुप रहने का फैसला लेते हैं. आमतौर पर बॉलीवुड का हीरो एकदम धाकड़ होता है, पर यहां अजय देवगन आराम से बैठ कर ड्रामा देखते हैं. कई जगह उनकी इंटेंसिटी की कमी भी महसूस होती है, पर उनके किरदार के अंदर छिपा ‘सच्चा आशिक’ अंत में जरूर बाहर आता है और अजय देवगन के फैंस को ‘पैसा वसूल’ वाली फीलिंग भी दे जाता है.
रकुल प्रीत सिंह का मासूम चेहरा उनके लिए फिर एक बार फायदेमंद साबित हुआ है. उन्होंने अपने किरदार को पूरा न्याय दिया है. वैसे भी अक्सर कहा जाता है कि प्यार के लिए लड़कियां शायद ज्यादा जोर लगाती हैं, और रकुल उस ‘जबरदस्त जज्बे’ को बखूबी से बड़े परदे पर दिखाती हैं. अजय देवगन और राकुलप्रीत तो अच्छे हैं, लेकिन सच कहें, तो ‘दे दे प्यार दे 2’ में आर. माधवन और गौतमी कपूर दिल जीत लेते हैं. राकेश और अंजू के रोल में उन्होंने भारतीय समाज के उन ‘शिक्षित, प्रगतिशील, और मॉडर्न’ माता-पिता के खोखलेपन को दिखाया है, जो जबान से तो मॉडर्न होते हैं, पर दिल से नहीं.
आर. माधवन तो इस फिल्म में एक्टिंग की पाठशाला चलाते हैं. ‘शैतान’ (2024) में अपनी बेटी को वश में करने के बाद, इस फिल्म में वो अजय देवगन को खुलेआम ये कहते हुए नजर आते हैं कि उन्होंने उनकी बेटी पर ‘वशीकरण’ कर दिया है. एक पल वो अपने मॉडर्न होने पर मुस्कुराते हैं और इतराते हैं, और अगले ही पल एक ओवर पजेसिव, अहंकारी पिता की तरह मुंह बनाते हैं. दोनों (माधवन और गौतमी) इतने शानदार हैं कि आप सोचने पर मजबूर हो जाते हैं कि इन्हें पहले क्यों नहीं साथ लाया गया! जावेद जाफरी के बेटे मीज़ान जाफरी की भी फिल्म में एंट्री हुई है, उन्होंने भी अच्छा काम किया है. इशिता दत्ता (आयशा की भाभी) अपने रोल में प्यारी लगती हैं. वहीं वेटरन एक्ट्रेस सुहासिनी मुले (नानी) ने अपने छोटे रोल में जान डाल दी है.
देखें या न देखें
2025 के अंत में बॉलीवुड अपनी जड़ों यानी रोमकॉम की तरफ लौट रहा है. लव रंजन की फिल्मों की आलोचना चाहे कितनी भी हो, लेकिन उनके दर्शक हमेशा थिएटर तक पहुंचते ही हैं. ‘दे दे प्यार दे 2’ लव रंजन को उनकी ‘पुरुष प्रधान’ इमेज से निकलने में मदद करती है, भले ही इस सीक्वल में आने में छह साल लग गए. ये फिल्म अपनी तेज-तर्रार राइटिंग और दमदार कॉमेडी के कारण अलग दिखती है और यही वजह है किया ये इसकी छोटी-मोटी कमजोरियों को छिपाने का काम भी भी बखूबी करती है. सबसे बड़ी बात ये है कि ये कहानी में लॉजिक भी बनाए रखती है, जो लव रंजन की पिछली फिल्म (तू झूठी मैं मक्काार) से गायब था. तो इस वीकेंड पर अपने स्ट्रेस को भूलकर सिर्फ एन्जॉय करना है? तो थिएटर में जाकर ”दे दे प्यार दे 2′ जरूर देखें.
De De Pyaar De 2 Review: ‘शैतान’ के बाद फिर आमने-सामने अजय देवगन-आर माधवन! जानें फिल्म में किस के तेवर पड़े भारी
[ad_2]
देश दुनियां की खबरें पाने के लिए ग्रुप से जुड़ें,
[ad_1]
#INA #INA_NEWS #INANEWSAGENCY
Copyright Disclaimer :-Under Section 107 of the Copyright Act 1976, allowance is made for “fair use” for purposes such as criticism, comment, news reporting, teaching, scholarship, and research. Fair use is a use permitted by copyright statute that might otherwise be infringing., educational or personal use tips the balance in favor of fair use.
Credit By :-This post was first published on https://www.tv9hindi.com/, we have published it via RSS feed courtesy of Source link,










