Entertainment: जुबिन गर्ग पानी में कैसे डूब गए? क्या ये सिर्फ एक हादसा था… या फिर कुछ छुपाया जा रहा है? – #iNA

कुछ आवाजें कभी नहीं मरतींवो हवाओं में, यादों में और लोगों के दिलों में हमेशा जिंदा रहती हैं. हम बात कर रहे हैं एक ऐसे कलाकार की, जिसकी आवाज असम की पहचान बनी, जिसका संगीत सीमाओं के पार गूंजता था लेकिन अब वो आवाज हमेशा के लिए खामोश हो चुकी है. जी हां, ज़ुबिन गर्ग की मौत को एक महीना बीत चुका है लेकिन सवाल अब भी जिंदा हैं- आखिर उस दिन हुआ क्या था, जब भारत का ये म्यूजिकल लीजेंड सिंगापुर में एक कार्यक्रम में शिरकत के लिए गया, लेकिन जिंदा वापस नहीं लौट सका?
19 सितंबर 2025 – सिंगापुर के एक आलीशान यॉट पर म्यूज़िक की धुन गूंज रही थी, साथ में दोस्त थे और जश्न का माहौल था. लेकिन इसी जश्न के बीच अचानक सब कुछ बदल गया. असम का बेटा, भारत का दिल, ज़ुबिन गर्ग…दुनिया में नहीं रहा. रिपोर्ट्स के मुताबिक़, वो बिना लाइफ जैकेट के स्विमिंग करने गए और वहीं डूब गए. लेकिन क्या ये सिर्फ़ एक हादसा था…या फिर कुछ छुपाया जा रहा है?
मौत का वो दिन, क्या हुआ था?
जुबिन गर्ग 19 सितंबर को सिंगापुर में नॉर्थईस्ट इंडिया फेस्टिवल में परफॉर्म करने वाले थे. हिंदुस्तान टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, एक दिन पहले, यानी 18 सितंबर को, वो कुछ दोस्तों और आयोजकों के साथ एक यॉट पार्टी में गए. रात करीब 9 बजे उन्होंने स्विमिंग पूल में जाने की बात कही. कहा जा रहा है कि उस वक्त उन्होंने लाइफ जैकेट नहीं पहनी थी. TOI की एक रिपोर्ट में कुछ गवाहों के हवाले से लिखा गया है – उस शाम वह खुश थे. म्यूजिक और हंसी-मज़ाक चल रहा था लेकिन कुछ ही मिनटों में सब कुछ शांत हो गया. कुछ ही मिनटों बाद, जब वो नज़र नहीं आए, तो लोगों ने उनकी खोज शुरू की. करीब दस मिनट बाद उनका शव पानी में मिला.” लेकिन अब सवाल ये है – इतने लोगों के बीच, एक स्टार की मौत कैसे अनदेखी रह गई?
गरिमा साइकिया गर्ग का दर्द और सवाल
जुबिन की पत्नी गरिमा साइकिया गर्ग ने टाइम्स ऑफ इंडिया से कहा – मैं जानना चाहती हूं कि उस दिन असल में क्या हुआ था… मैं सब्र से इंतज़ार कर रही हूं लेकिन अभी सच सामने नहीं आया है.गरिमा ने कहा – 21 दिन बीत गए लेकिन अब तक किसी ने सच्चाई नहीं बताई. उन्होंने साफ़ कहा कि ये मामला राजनीति से ऊपर है और गवाहों को सामने आना चाहिए.
इससे पहले गरिमा ने एक बयान में कहा था – हमने अपना दिल, असम का दिल खो दिया है. जो भी उस दिन वहां था, सच बोले. ज़ुबिन गर्ग की पत्नी की इस अपील ने पूरे असम को झकझोर दिया. लोगों ने सोशल मीडिया पर #JusticeForZubeen ट्रेंड शुरू किया, और सरकार पर दबाव बढ़ा.
जांच और गिरफ्तारी – SIT की कार्रवाई
ज़ुबीन गर्ग की मौत की जांच के सिलसिले में कई लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है और उनसे पूछताछ की गई है. असम CID ने इसे culpable homicide not amounting to murder यानी लापरवाही से मौत का मामला बताया है. इस केस में गिरफ्तार लोगों में शामिल हैं:
- सिद्धार्थ शर्मा: ज़ुबीन गर्ग के मैनेजर.
- श्यामकानु महंता: सिंगापुर में नॉर्थ ईस्ट इंडिया फेस्टिवल के चीफ ऑर्गनाइज़र, जहां ज़ुबिन गर्ग की मौत हुई.
- संदीपन गर्ग: असम पुलिस के DSP और ज़ुबिन के कज़िन, जो घटना के समय मौके पर ही मौजूद थे.
- शेखर ज्योति गोस्वामी: ज़ुबिन के बैंडमेट.
- अमृतप्रभा महंता: ज़ुबिन की को-सिंगर.
- नंदेश्वर बोरा: ज़ुबिन के पर्सनल सिक्योरिटी ऑफिसर (PSO) में से एक.
- प्रबीन बैश्य नाम के एक दूसरे PSO की गिरफ्तारी की जानकारी भी सामने आई है
- मैनेजर और ऑर्गनाइजर: सिद्धार्थ शर्मा और महंता को 1 अक्टूबर, 2025 को अरेस्ट किया गया था, और उन पर गैर-इरादतन हत्या, क्रिमिनल साज़िश और लापरवाही से मौत का आरोप लगाया गया था. बाद में उन पर मर्डर का आरोप लगाया गया और उन्हें पुलिस कस्टडी में भेज दिया गया.
- कजन और दूसरे: संदीपन गर्ग को CID ने गहरी पूछताछ के बाद अरेस्ट किया. वह, बैंडमेट गोस्वामी और को-सिंगर महंता के साथ, शुरुआती पाँच अरेस्ट ग्रुप का हिस्सा थे.
- पर्सनल सिक्योरिटी ऑफिसर: बोरा और बैश्य को उनके बैंक अकाउंट में बिना किसी जानकारी के फाइनेंशियल ट्रांज़ैक्शन मिलने के बाद अरेस्ट किया गया. खबर है कि जब गर्ग की मौत हुई तो PSO उनके साथ सिंगापुर में नहीं थे.
अभी की इन्वेस्टिगेशन की स्थिति की बात करें तो, कुछ लोगों पर शुरुआत में गैर-इरादतन हत्या और लापरवाही का केस दर्ज किया गया था, लेकिन बाद में मर्डर के चार्ज भी जोड़े गए. अक्टूबर 2025 के बीच में, पांच आरोपियों को ज्यूडिशियल कस्टडी में भेज दिया गया और बक्सा जेल में ट्रांसफर कर दिया गया.
फेस्टिवल के ऑर्गनाइज़र श्यामकानु महंता ने भेदभाव और अपनी जान को खतरा बताते हुए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है. लेकिन इसमें सबसे हैरान करने वाली बात – असम पुलिस के अफसर और ज़ुबिन के रिश्तेदार संदीपन गर्ग की गिरफ़्तारी रही. संदीपन को इस केस में मिली भूमिका को लेकर असम सरकार ने सस्पेंड कर दिया है. अब सवाल ये है – क्या किसी लापरवाही ने भारत के इस म्यूज़िकल हीरो की जान ले ली, या कहानी में कोई और परत छुपी है?
असम में गुस्सा और सम्मान – ज़ुबिन की विरासत
ज़ुबिन गर्ग के बारे में कहा जाता है कि वो सिर्फ़ एक गायक नहीं थे – वो असम की आत्मा थे. उनका गाय गैंगस्टर फिल्म का गाना ‘या अली आज भी काफी लोकप्रिय है, इसके अलावा कांटे फिल्म का “रामा रे”, प्यार के साइड इफेक्ट फिल्म का “जाने क्या” और कृष फिल्म के दिल तू ही बता जैसे गीतों को अमर बनाने वाली आवाज़ सिर्फ़ गानों तक सीमित नहीं रही बल्कि वो असम की पहचान बन गईं.
लेकिन एक बात और बेहद अहम है कि ज़ुबिन की मौत ने पूरे असम राज्य को एक कर दिया है – लोग न्याय की मांग कर रहे हैं और ज़ुबिन दा को असम रत्न देने की मांग उठी है.” हिंदुस्तान टाइम्स की एक रिपोर्ट में कहा गया है – ”वह सिर्फ़ एक गायक नहीं थे; वह एक ऐसी संस्था थे जिन्होंने कई पीढ़ियों को एक साथ जोड़ा.” सरकार ने ज़ुबिन के नाम पर एक म्यूज़िक फाउंडेशन बनाने का ऐलान किया है. लेकिन सवाल अब भी वही है – क्या सच्चाई सामने आएगी?
कभी-कभी सच्चाई सिर्फ रिपोर्ट में नहीं, खामोशियों में छुपी होती है. ज़ुबिन गर्ग के केस ने ये साफ कर दिया है कि सवाल जितने आसान लगते हैं, जवाब उतने नहीं. ये एक हादसा था या किसी की लापरवाही? और अगर गवाह सच नहीं बोलेंगे – तो क्या कभी पता चल पाएगा, कि उस रात यॉट पर आखिर हुआ क्या? ज़ुबिन अब नहीं हैं, लेकिन उनकी आवाज़ अब भी गूंजती है – असम की हवा में, उसके संगीत में, और उन लाखों दिलों में जो आज भी बस एक जवाब का इंतजार कर रहे हैं.
जुबिन गर्ग पानी में कैसे डूब गए? क्या ये सिर्फ एक हादसा था… या फिर कुछ छुपाया जा रहा है?
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