Entertainment: ये है दी केरल ‘ब्यूटी’ की लव स्टोरी, एक ‘सुंदरी’ की दुनिया में ‘परम’ का प्रवेश क्या कहलाता है? – #iNA

कोई फिल्म बहुत अच्छी हो सकती थी, उसका मुकम्मल नजीर है- सिद्धार्थ मल्होत्रा और जान्हवी कपूर की परम सुंदरी. इस फिल्म में भी केरल की स्टोरी दिखाई गई है लेकिन ये लव स्टोरी है. रिलीज से पहले प्रचार-प्रसार की शुरुआत में ऐसा लगा यह कोई अलौकिक सुंदरी की कहानी होगी! परम सुंदरी- नाम सुनकर ही कोमलता और सौंदर्य का अहसास होने लगा. मानो कोई किन्नर या गंदर्भ लोक की कन्या हो. प्रकृति की गोद में पली परंपरागत पोशाकों वाली जान्हवी की तस्वीरें सुकून देने वाली थीं. कुछ समय पहले ही अहान-अनीत की सैयारा ने जिस मधुर संवेदना की लहर फैलाई थी, धड़क 2 और परम सुंदरी में उसके विस्तार का पूरा अनुमान था. सबको रोमांटिक फिल्मों की बहार लौटने की आशा थी.

लेकिन जैसे ही सिद्धार्थ-जान्हवी की इस फिल्म का ट्रेलर आया पता चला कि इसमें ‘परम’ युवक का नाम है जबकि ‘सुंदरी’ युवती का नाम है. दोनों का नाम ही फिल्म का टाइटल है. हालांकि इतने पर भी उम्मीद बची थी कि यह कोई अनोखी प्रेम कहानी होगी, लैला-मजनूं, हीर-रांझा की तरह नये जमाने के प्रेमी-युगल की कहानी. प्रेमी-प्रेमिका के नाम की जोड़ी बनाकर यही प्रभाव जमाने की कोशिश की गई थी. फिल्म देखने के बाद दर्शकों की अपेक्षा का क्या हुआ होगा, इसका अनुमान लगाया जा सकता है. परम एकदम भोले फ्लर्टबाज निकले तो सुंदरी एकदम ढुलमुल सोच वाली लड़की साबित हुई.

फाइंड योर सोलमेट ऐप का जाल

कहानी बस इतनी-सी है कि परम अपने सफल बिजनेसमैन पिता का असफल बेटा है. वह कई स्टार्टअप्स में अपने पिता की करोड़ों की रकम डुबो चुका है लेकिन नये आइडियाज के स्टार्टअप में निवेश का उसका शौक खत्म नहीं हुआ. अब वह एक ऐसे स्टार्टअप में निवेश करने को इच्छुक है जिसके माध्यम से कोई इंसान अपने सोलमेट तक पहुंच सकता है. इसका नाम है- फाइंड योर सोलमेट. वह अपने पिता को इसकी जानकारी देता है लेकिन पिता की शर्त है कि वह पहले खुद पर इसे आजमा कर देखें. सफल होने पर ही वो निवेश कर सकेंगे. लिहाजा नये ऐप के जरिए वह अपनी सोलमेट की तलाश में केरल के एक गांव में पहुंच जाता है, जहां सुंदरी रहती है.

सुंदरी ने अपने माता-पिता के खोने के बाद अपने घर को होम स्टे में कंवर्ट कर दिया है. परम और उसका दोस्त जग्गी यहीं ठहरते हैं. यहां तक तो फिल्म की कहानी ठीक है लेकिन सुंदरी के नजदीक आने के बाद परम की कहानी मानो ठहर सी जाती है. कहानी आगे बढ़ ही नहीं पाती. पूरे एक घंटे यानी इंटरवल तक फिल्म के अंदर ऐसा कुछ भी होता हुआ दिखाई नहीं देता जो उसकी कहानी को गति प्रदान करे. संवादों में भी कोई खास पंच नहीं. हां, इंटरवल के पहले जैसे ही सुंदरी के बचपन का साथी वीनू (सिद्धार्थ शंकर) उसके पास आता है और पता चलता है कि दोनों दस दिनों के भीतर शादी करने वाले है तो परम के दिलों की धड़कन तेज हो जाती है.

इंटरवल तक ठहरी हुई कहानी

इंटरवल के बाद फिल्म की कहानी में यह मामूली-सा ट्विस्ट आता है. अब सुंदरी की शादी आखिर किससे होगी, परम या सिद्धार्थ शंकर से, जिसने फिल्म में वीनू नायर का किरदार निभाया है, जो कि सुंदरी का बचपन का सखा है. हालांकि यह ट्विस्ट भी बड़ा अटपटा-सा है. क्योंकि एक कमर्शियल मसाला फिल्म में हीरो और हीरोइन मिलेंगे या नहीं, यह कोई ट्विस्ट नहीं. फिर भी कहानी खिंचती है बेतलब प्रसंगों के साथ. हालांकि सोनू निगम, श्रेया घोषाल आदि के गाये कुछ गाने अच्छे हैं. मसलन परदेसिया… सुंदरी के प्यार में… वगैरह. ये सुनने में अच्छे लगते हैं.

वैसे कहानी में लोचा होने के बावजूद कुछ बातें हैं जो इस फिल्म को थोड़ी अलग बनाती है और उनमें दर्शक थोड़ा रमते है. डायरेक्टर-राइटर तुषार जलोटा ने इन कमियों की भरपाई किसी और तरीके से करने की कोशिश की है. फिल्म की कहानी में शुरू से आखिर तक मोहब्बत ही मोहब्बत है. नफरत और गुस्सा कहीं दिखाई नहीं देता. परम दिल्ली के पंजाबी समुदाय से ताल्लुक रखता है. वह केरल जाता है और अपनी संस्कृति के मुताबिक रहता है लेकिन स्थानीय मलयाली उसे वहां की संस्कृति के मुताबिक रहने की नसीहत देते हैं, जिसे वह अपना लेता है. फिल्म में सचिन-जिगर का संगीत माधुर्य लिये हुये है जो केरल की मलयाली संस्कृति से मेल खाते हैं.

उसे सुंदरी के संपर्क में आने के बाद पता चलता है कि पूरा साउथ इंडिया एक ही रंग में नहीं रंगा, जैसा कि दूसरे भाग में रहने वाले भारतीय सोचते हैं, उत्तर भारत में भी यूपी, बिहार, एमपी, हरियाणा और पंजाब के अलग-अलग रंग और भाषा लोकपर्व है उसी तरह से साउथ में भी केरल, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु और कर्नाटक की भाषा और लोक पर्व में अंतर है.

पर्यटन और लोक रंग का प्रमोशन

फिल्म में केरल की प्राकृतिक छटाओं के साथ-साथ यहां के पर्व-त्योहार, लोक उत्सव, खेल कूद आदि को भी खूब दिखाया गया है. इनके बीच केरल की परंपरागत पोषाकों में सुंदरी बनी जान्हवी बहुत ही खूबसूरत लगी हैं. जान्हवी का अभिनय बेहतर लगा है. सिद्धार्थ भी अच्छे लगे हैं लेकिन कहानी और संवाद में कुछ जान होती तो प्रभाव और जमता. कुल मिलाकर फिल्म केरल के पर्यटन और लोक संस्कृति के प्रचार-प्रसार को आगे बढ़ाने वाली ही दिखती है. लोकल टूरिज्म का प्रमोशन करती चलती है और उसके बीच कहानी को मानो फिट दिया गया है.

वैसे कहानी में परम का किरदार स्वाभाविक नहीं. यह जानते हुए भी उसके साथ फ्रॉड हुआ, फाइंड योर सोलमेट नामक ऐप बनाने वाला सॉफ्टवेयर डेवलपर फ्रॉ़ड निकला, इस राज का खुलासा सबके बीच हो चुका है, इसके बावजूद वह सुंदरी और वीनू की शादी में एक विलेन की तरह व्यवधान डालता है. शादी के दिन तक वह सुंदरी को इम्प्रेस करने की कोशिश करता रहता है. यह जानते हुए भी कि सुंदरी और वीनू बचपन के साथी हैं, एक-दूसरे को पसंद करते हैं, शादी करना चाहते हैं, तारीख तय हो चुकी है, पूरा समाज और परिवार उसकी शादी के साथ है, लेकिन इन सबको धता बताते हुए परम बस सुंदरी के पीछे पड़ा हुआ है. आज के दौर में फिल्म का यह पक्ष समझ से परे है.

बजट के करीब बॉक्स ऑफिस कलेक्शन

हालांकि जानकर अचरज होता है कि करीब चालीस करोड़ के बजट में बनी परम सुंदरी ने अभी तक इंडिया में करीब 30 करोड़ और इंडिया से बाहर करीब 10 करोड़ का कलेक्शन कर लिया है. यानी फिल्म का बॉक्स ऑफिस कलेक्शन में फिल्म का बजट निकल चुका है. इसके बाद की सारी कमाई फिल्म के मुनाफे के हिस्से में जाएगी. दिनेश विजान का यह प्रोजेक्ट बहुत फायदा तो पहुंचाता नहीं दिख रहा लेकिन घाटे का सौदा भी साबित नहीं हुआ. अब देखना है इस फिल्म से सिद्धार्थ और जान्हवी को कितना फायदा होता है.

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ये है दी केरल ‘ब्यूटी’ की लव स्टोरी, एक ‘सुंदरी’ की दुनिया में ‘परम’ का प्रवेश क्या कहलाता है?

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