Entertainment: Mira Nair films: मिसिसिपी मसाला ही नहीं, सलाम बॉम्बे और मॉनसून वेडिंग भी, मीरा नायर की फिल्मों के क्या हैं मायने? – #iNA

जानी-मानी डायरेक्टर-प्रोड्यूसर मीरा नायर की कई बहुचर्चित फिल्में हैं- मिसिसिपी मसाला, सलाम बॉम्बे, मॉनसून वेडिंग, दी नेमशेक या फिर कामसूत्र आदि. लेकिन उनकी एक और फिल्म है- न्यू यॉर्क आई लव यू (New York I love You). इसे मीरा नायर की बेस्ट फिल्मों में नहीं गिना जाता. इसके बारे में कम बातें की गई हैं. लेकिन आज इसकी चर्चा लाजिमी हो गई. अनेक छोटी-छोटी कहानियों से गुंथी इस फिल्म के कुल दस निर्देशक थे- उनमें एक मीरा नायर भी हैं. इसमें न्यू यॉर्क सिटी की लाइफस्टाइल को फोकस किया गया था. न्यू यॉर्क दुनिया का सबसे महंगा और हाई प्रोफाइल शहर है लेकिन यहां की जिंदगी कैसी है- इसे इस फिल्म में बखूबी दिखाया गया था.

अब जबकि मीरा नायर के बेटे ज़ोहरान ममदानी (Zohran Mamdani) न्यू यॉर्क के मेयर बन गए हैं तो निश्चय ही इस सिटी को एक बार फिर से आई लव यू कहने की बारी आ गई है. ममदानी की जीत से न्यू यॉर्क अचानक ही दुनिया में सबसे अधिक चर्चित शहर भी बन गया. फिलहाल उनकी जीत को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सबसे बड़ी हार माना जा रहा है और अमेरिका के राजनीतिक भविष्य का नये एंगल से अनुमान लगाया जा रहा है.

महिला फिल्ममेकर की बड़ी दस्तक

ज़ोहरान ममदानी की ऐतिहासिक जीत से उनकी मां मीरा नायर भी सुर्खियों में आ गईं और उनकी फिल्मी उपलब्धियां भी. मीरा नायर खुद भी अंतरराष्ट्रीय हस्ती हैं. मां और बेटे दोनों को एक दूसरे की उपलब्धियों पर गर्व है. अब उनकी शख्सियत की चर्चा भी लाजिमी हो जाती है. उन्होंने जिस दौर में फिल्ममेकिंग शुरू की, वहां महिलाओं के लिए पर्दे के पीछे के इतने बड़े दायित्व को इतनी गंभीरता से संभालना बहुत आसान नहीं था. लेकिन मीरा ने पहली ही फिल्म सलाम बॉम्बे से ऐसी दस्तक दी कि वर्ल्ड सिनेमा के दिग्गज भी उन्हें सलाम करने लगे.

मीरा नायर के समय दीपा मेहता और आगे गुरिंदर चड्ढ़ा जैसी महिला हस्तियों ने अंतरराष्ट्रीय फिल्ममेकिंग में अलग दर्जा हासिल करके चौंकाया है. इनकी बदौलत भारतीय परिदृश्य और कहानियां दुनिया के पटल पर पहुंचीं. सत्यजित राय या राजकपूर के सिनेमा से यह अलग मिजाज लिये हुए था. मीरा नायर पिछले कुछ सालों से चर्चा से दूर हैं लेकिन लगातार फिल्में और टीवी सीरीज बना रही हैं. कामसूत्र, मॉनसून वेडिंग और दी नेमशेक जैसी फिल्मों से उन्होंने भारत और विदेशों में बसे भारतीयों के बीच अच्छी प्रतिष्ठा हासिल की. अनिवासी भारतीयों की संवेदना और जज्बात के साथ-साथ इस वर्ग के दिखावे को भी उन्होंने अपनी फिल्मों में प्रमुखता से उभारा है.

सलाम बॉम्बे बनाकर सबको चौंकाया

उनकी सबसे आखिरी फीचर फिल्म क्वीन ऑफ कैटवे (Queen of Katwe) थी. 2006 की दी नेमशेक के बाद उनकी कोई फिल्म बहुत चर्चा हासिल नहीं कर सकी. इसके बरअक्स उन्होंने शॉर्ट फिल्म और सीरीज पर ज्यादा फोकस किया. इसमें उनको कामयाबी मिली. 2020 में आई अ सुटेबल बॉय (A Suitable Boy) के अलावा 2022 की नेशनल ट्रेजर: एज ऑफ हिस्ट्री (National Treasure: Edge of History) ने उन्हें एक बार फिर से प्रसिद्धि के शिखर पर बनाए रखा.

तो सबसे पहले बात सलाम बॉम्बे की. सन् 1988 की इस फिल्म ने इतिहास रचा था. यह मीरा नायर की पहली फिल्म थी. मुंबई देश का ऐसा महानगर जो मायानगरी और चकाचौंध भरी लाइफस्टाइल के लिए विख्यात है लेकिन यहां के स्लम में और फुटपाथों पर रात-दिन गुजारने वालों की कैसी जिंदगी है, और वे लोग कैसे-कैसे सपने देखते हैं- सलाम बॉम्बे के जरिए पहली बार इस शहर का एक नया सच सामने आ सका था.

मीरा नायर में फुटपाथ पर रहने वालों के समूह को प्रशिक्षित करके यह फिल्म बना दी और दुनिया भर में चर्चा बटोर ली. उन्होंने वर्कशॉप करके बच्चों को अभिनय सिखाए. बड़े सितारों के बदले फुटपाथ पर रहने वाले रीयल लाइफ बच्चों को लिया. नतीजा- फिल्म को ऑस्कर के अलावा बाफ्टा, गोल्डेन ग्लोब में नॉमिनेशन मिला और बेस्ट डायरेक्टर का फिल्मफेयर अवॉर्ड भी. फिल्म में नाना पाटेकर, रघुवीर यादव और अनिता पंवार ने भी अभिनय किया था. सलाम बॉम्बे आज भी मुंबई के अंधेरे पक्ष को दर्शाने वाली सबसे बेहतरीन फिल्म मानी जाती है.

कामसूत्र और मॉनसून वेडिंग भी चर्चित फिल्में

मीरा नायर के फिल्मी सलाम को दुनिया भर में इतना इस्तकबाल मिला कि उन्होंने युगांडा का रुख किया और मिसिसिपी मसाला बनाने की ठानी. अश्वेत देश में कैसा नस्लवाद है, इसे उन्होंने दमखम के साथ दिखाया. सन् 1991 में इस फिल्म से उनकी कायापलट हो गई. रीसर्च के दौरान दूसरे जीवन साधी के रूप में भारतीय मूल के स्कॉलर महमूद ममदानी मिले. मीरा की जैसे मुराद पूरी हो गई. मिसिसिपी मसाला को मुकाम मिला और बेस्ट फिल्म का इंडिपेंडेंट स्पिरिट अवॉर्ड भी. लेकिन इस फिल्म के बाद उन्होंने एक बार फिर से भारतीय परिवेश और कहानियों की ओर रुख किया.

कामसूत्र बनाकर भारतीय नारी की व्यथा को व्यक्त किया तो मॉनसून वेडिंग के माध्यम से उन्होंने विदेश में बसे पंजाब की धरती से ताल्लुक रखने वाले धनाढ्य अनिवासी भारतीयों के दिखावे पर फोकस किया था. मीरा नायर की यह फिल्में सबसे अलग महत्व रखती हैं. इसमें नसीरुद्दीन शाह, शेफाली शाह, वसुंधरा दास, रणदीप हुड्डा, रजत कपूर आदि कलाकारों ने काम किया था. यहां भारत-पाक विभाजन का दर्द भी था तो महंगी ग्लैमरस शादियों की दिखावे वाली भव्यता भी. इसी क्रम में मीरा नायर की दी नेमशेक और वैनिटी फेयर को नहीं भूला जा सकता, जहां अनाथ, गरीब, हाशिए पर पड़ी महिलाओं की पीड़ा दर्ज है.

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Mira Nair films: मिसिसिपी मसाला ही नहीं, सलाम बॉम्बे और मॉनसून वेडिंग भी, मीरा नायर की फिल्मों के क्या हैं मायने?

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