Entertainment: ‘मोहब्बतें’ अमिताभ बच्चन की दूसरी ‘ज़ंजीर’ साबित हुई, जब शहंशाह का बादशाह से हुआ सामना – #iNA

मोहब्बतें अमिताभ बच्चन के अभिनय की दूसरी पारी की सबसे अहम फिल्म थी. यशराज बैनर्स तले बनी यह फिल्म 27 अक्टूबर 2000 को रिलीज हुई थी. फिल्म के पच्चीस साल हो गए हैं. आज इसकी कहानी, गाने, संवाद, अमिताभ-शाहरुख का पहला आमना-सामना सब नॉस्टेल्जिया जगाने वाले लगते हैं. साल 2000 बिग बी के फिल्मी करियर के लिए टर्निंग पॉइंट भी साबित हुआ था. अमिताभ को इस साल मिलेनियन स्टार घोषित तो किया गया था लेकिन कई मोर्चे पर वह मुश्किलों से घिरे थे. काम करने के लिए फिल्में नहीं थीं. करोड़ों के कर्ज के बोझ तले दबे थे. ऐसे में इसी साल पहले केबीसी और फिर मोहब्बतें की सफलता ने उनकी नई पारी को पटरी पर लाने का काम किया.
यानी काफी हद तक मोहब्बतें फिल्म अमिताभ बच्चन के लिए दूसरी ज़ंजीर साबित हुई. जैसे ज़ंजीर से अमिताभ अपनी पहली बारी में चर्चा में आए उसी तरह मोहब्बतें से उन्होंने दूसरी पारी में नए मुकाम को हासिल किया. कई बार तो ऐसा भी कहा जाता है अमिताभ की दूसरी पारी, उनकी पहली पारी से ज्यादा यादगार साबित होगी. यह विचार उनकी बुजुर्ग भूमिकाओं को लेकर हैं जहां युवावस्था की फिल्मों के मुकाबले अधिक विविधता वाली फिल्में आती हैं. लेकिन एक सच यह भी अमिताभ की अगर पहली पारी लोकप्रिय नहीं होती, तो दूसरी पारी भी इतनी कामयाब कहां हो पाती.
पहली बार अमिताभ-शाहरुख एक साथ
बहरहाल मोहब्बतें ऐसी फिल्म है, जिसमें अमिताभ बच्चन और शाहरुख खान का पर्दे पर पहली बार आमना-सामना हुआ था. तब इसे शहंशाह बनाम बादशाह की टक्कर भी कहा गया था. महज एक साल पहले शाहरुख खान की बादशाह फिल्म आई थी और किंग खान हिंदी फिल्म इंडस्ट्री के सुपरस्टार बन चुके थे. शाहरुख की लगातार सुपरहिट फिल्में आ रही थीं. महज आठ साल में वह बॉक्स ऑफिस के बाजीगर बन गए थे. उनकी सारी फिल्में हिट हो रही थी. आमिर, सलमान की तरह शाहरुख भी बड़े स्टार हो चुके थे.
हालांकि अमिताभ बच्चन की शहंशाह सन् 1988 में आई थी और सन् 1973 में ही वह एंग्री यंग मैन और सुपरस्टार का खिताब पा चुके थे. लेकिन 1990 की सुपरहिट अग्निपथ के कुछ समय के बाद उनके सितारे की चमक फीकी पड़ने लगी थी. इसके बाद उनकी कई फिल्में आईं लेकिन बॉक्स ऑफिस पर कमाल नहीं दिखा सकीं, जिसके लिए वो विख्यात थे. इसी दौर में अमिताभ-गोविंदा की बड़े मियां छोटे मियां भी आई थी. फिल्म हिट तो हुई लेकिन अमिताभ से ज्यादा श्रेय गोविंदा ले गए.
बुरे वक्त में यश चोपड़ा से काम मांगने गए
अमिताभ बच्चन ने अपने कई इंटरव्यूज़ में मोहब्बतें फिल्म को लेकर कुछ यादें शेयर की थीं. उन्होंने बहुत ही सादगी से कहा था कि तब उनके पास कोई काम नहीं था. करियर के लिहाज से बुरा समय चल रहा था. ऐसे में एक दिन यश चोपड़ा से मिलने का वक्त मांगा. यश चोपड़ा के साथ दीवार और सिलसिला जैसी फिल्में पहले ही कर चुके थे. इसके बाद यश चोपड़ा ने मोहब्बतें में उन्हें नारायण शंकर का किरदार दिया जो कि गुरुकुल का सख्त मिजाज प्रिंसिपल है. यश चोपड़ा इस फिल्म के निर्माता थे. निर्देशन का दायित्व उदय चोपड़ा ने संभाला था. फिल्म में उदय चोपड़ा ने रोल भी निभाया था. उनके अलावा ऐश्वर्या राय, जिमी शेरगिल, प्रीति झंगियानी और शमिता शेट्टी ने प्रमुख रोल निभाए थे. फिल्म में आनंद बक्षी के लिखे गाने और जतिन-ललित के संगीत तब खूब लोकप्रिय हुए. आज भी खूब सुने जाते हैं.
परंपरा, प्रतिष्ठा और अनुशासन में प्रेम का पाठ
फिल्म की कहानी उस वक्त के युवा दर्शकों के लिए नयापन लिये हुए थी. एक ऐसा गुरुकुल है जहां प्रिंसिपल नारायण शंकर का परंपरा, प्रतिष्ठा और अनुशासन का नियम चलता है. कोई भी छात्र या शिक्षक इस नियम के खिलाफ कदम नहीं उठा सकते. प्रिंसिपल के सख्त नियमों का पालन करना यहां सबका पहला कर्तव्य है. ऐसे में यहां संगीत शिक्षक के तौर पर राज आर्यन यानी शाहरुख खान का प्रवेश होता है. वह छात्रों को संगीत सिखाते हैं और इसी के साथ जीवन में प्रेम का महत्व भी पार्टी के जरिए साबित करते हैं. लेकिन नारायण शंकर को राज आर्यन का खुलेपन वाला यह व्यवहार पसंद नहीं आता. इसके बाद दोनों के बीच द्वंद्व शुरू होते हैं लेकिन आखिरकार जीत मोहब्बत की होती है.
अमिताभ-शाहरुख की कैमेस्ट्री का दिखा रंग
एक तरफ केबीसी की लोकप्रियता बढ़ती गई और दूसरी तरफ मोहब्बतें सुपरहिट हो गई. जाहिर है अमिताभ बच्चन की करियर की गाड़ी फिर से पटरी पर आ गई. वहीं अमिताभ-शाहरुख की कैमेस्ट्री भी दर्शकों ने पसंद कर ली. तब शहंशाह बनाम बादशाह का जुमला हिट था. कंधे पर स्वेटर टांगे वायलिन बजाते शाहरुख और उसके चारों तरफ बिखरते पेड़ों के पत्ते वाले सीन लंबे समय तक सुर्खियों में रहे. आज की युवा पीढ़ी को भी ये सीन तब काफी लुभाते हैं, जब ये किसी रील में दिखाई देते हैं. मोहब्बतें के बाद अमिताभ-शाहरुख कई फिल्मों में साथ-साथ आए. मसलन कभी खुशी कभी गम, वीर ज़ारा, कभी अलविदा ना कहना, भूतनाथ और पहेली आदि. ये सभी फिल्में बॉक्स ऑफिस पर अच्छा कारोबार कर चुकी हैं.
मोहब्बतें ने ज़ंजीर की तरह किया चमत्कार
मोहब्बतें और केसीबी से पहले अमिताभ बच्चन आर्थिक परेशानियों से जूझ रहे थे. साल 1996 में उन्होंने अपनी कंपनी एबीसीएल के बैनर तले विश्व सौंदर्य प्रतियोगिता आयोजित की थी. बैंगलुरू में मिस वर्ल्ड प्रतियोगिता के आयोजन का देश भर में विरोध हुआ था. उनकी कंपनी दिवालिया हो गई. उन पर 90 करोड़ का कर्ज था. इसे उतारना आसान नहीं था. उन पर 55 तरह के मुकदमे भी थे. उन्होंने एक बातचीत में बताया है कि 1997 से 1999 तक कर्ज वसूलने वालों की प्रताड़ना से आहत रहे.
इसके बाद उनकी जिंदगी में ठीक उसी तरह से जैसे चमत्कार हुआ जैसे कि सन् 1973 में ज़ंजीर हिट होने के बाद हुआ था. सिद्धार्थ बसु की मदद से केबीसी मिली तो यश चोपड़ा की मदद से मोहब्बतें. केबीसी आज भी पच्चीस साल बाद जारी है वहीं मोहब्बतें ने उन्हें एक बार फिर रुपहले पर्दे का मेगारस्टार बना दिया.
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