Entertainment: लोगों को हमेशा दिखना चाहती थी यंग, इसलिए ठुकरा दिया ‘दादा साहेब फाल्के अवार्ड’, मरने के बाद भी नहीं दिखा चेहरा – #iNA

फिल्मी गलियारों में ग्लैमर और खूबसूरती की कमी नहीं है. हालांकि, कुछ सितारे आज भी इंडस्ट्री में एक्टिव हैं, तो वहीं कुछ लाइमलाइट से ही दूर हो गए. इनमें एक खास नाम सुचित्रा सेन का भी शामिल है.
सुचित्रा सेन दिलीप कुमार की पारो के तौर पर जानी जाती थीं, क्योंकि दोनों ने ‘देवदास’ फिल्म में साथ काम किया था. फिल्मों में खुद की शानदार पहचान बनाने के बाद एक्ट्रेस ने लोगों से दूर अकेले रहने का फैसला किया.
एक्ट्रेस ने अकेले रहने के फैसले के चलते साल 2005 में दादा साहेब फाल्के अवॉर्ड को लेने से इनकार कर दिया. एक्ट्रेस ने हिंदी सिनेमा में 25 सालों तक काम किया, उसके बाद उन्होंने सारी शोहरत छोड़ दी.
सुचित्रा सेन का असल नाम रमा था, जिन्होंने मां बनने के बाद फिल्मों में एंट्री की थी. उन्होंने बंगाली फिल्मों से अपनी शुरुआत की थी. 1955 में आई फिल्म ‘देवदास’ से एक्ट्रेस ने बॉलीवुड में एंट्री ले लिया.
एक किस्से में बताया जाता है कि एक्ट्रेस ने राज कपूर को भी फिल्म के लिए इनकार कर दिया था. जिसके बाद राज कपूर उनसे मिलने कोलकाता पहुंचे और घुटने पर बैठकर उन्हें बुके दिया, जो कि एक्ट्रेस को पसंद नहीं आया.
साल 1978 में सुचित्रा सेन की फिल्म प्रणय पाशा आई, जो कि फ्लॉप हो गई. इस फिल्म के बाद से ही उन्होंने सभी से 36 सालों तक दूरी बनाए रखी. यहां तक कि एक्टर उत्तम कुमार ने अपनी डेथ से पहले उनसे मिलने को कहा, लेकिन एक्ट्रेस ने मना कर दिया.
उनकी बायोग्राफी लिखने वाले राइटर ने बताया कि इस तरह से अकेले रहने की वजह ये थी कि एक्ट्रेस चाहती थीं कि उनके फैंस की नजर में वो हमेशा यंग बनी रहें. यहां तक कि उनके आखिरी वक्त में भी किसी ने उन्हें नहीं देखा.
लोगों को हमेशा दिखना चाहती थी यंग, इसलिए ठुकरा दिया ‘दादा साहेब फाल्के अवार्ड’, मरने के बाद भी नहीं दिखा चेहरा
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