Entertainment: Priyadarshan: पद्म श्री और दो नेशनल अवॉर्ड…. लाइब्रेरियन का बेटा कैसे बना कॉमेडी का बेताज बादशाह? कहानी प्रियदर्शन की – #iNA

Priyadarshan Birthday: मिडिल क्लास में जन्मा एक लड़का, जिसके पिता कॉलेज में लाइब्रेरियन होते हैं, पिता की वजह से उसके अंदर किताबें पढ़ना का शौक पैदा होता है. पिता की वजह से ही उसका झुकाव सिनेमा की तरफ जाता है और वो बड़ा होकर बन जाता है इंडियन सिनेमा में कॉमेडी फिल्मों का बेताज बादशाह. यहां बात हो रही है प्रियदर्शन सोमन नायर की, जिन्हें दुनिया सिर्फ प्रियदर्शन के नाम से ही जानती है. पर उनके पूरे नाम में सोमन नायर भी जुड़ा हुआ है. पिछले 42 सालों से सिनेमा की दुनिया में राज कर रहे प्रियदर्शन आज (29 जनवरी) 69 साल के हो चुके हैं. उनके जन्मदिन के मौके पर चलिए आज बात करते हैं उनके कॉमेडी किंग बनने तक के सफर की.
प्रियदर्शन का जन्म 29 जनवरी 1957 को केरला के तिरुवनंतपुरम में हुआ था. उनके पिता का नाम था पूजप्पुरा सोमन नायर और मां का राजम्मा. उन्होंने तिरुवनंतपुरम के ही गवर्नमेंट मॉडल बॉयज हायर सेकेंडरी स्कूल से अपनी स्कूलिंग की थी. उसके बाद उन्होंने वहीं के ही महात्मा गांधी कॉलेज से अपनी आगे की पढ़ाई की. उसके बाद उन्होंने फिर यूनिवर्सिटी कॉलेज से एम.ए. इन फिलॉसफी की पढ़ाई की.
किताबें विरासत में मिली थीं
चूंकि प्रियदर्शन के पिता कॉलेज में लाइब्रेरियन थे तो घर में पढ़ाई का माहौल था. बचपन से प्रियदर्शन के अंदर किताबें पढ़ने का शौक पैदा हो गया था, किताबें उन्हें पिता से विरासत में मिली थीं. और सिर्फ किताबें ही नहीं, आज वो सिनेमा में हैं तो इसके पीछे की सबसे बड़ी वजह भी उनके पिता ही हैं. दरअसल, उनके पिता थिएटर प्रेमी थे. उन्हीं की वजह से प्रियदर्शन का लगाव भी फिल्मों की तरफ हो गया था.
पटकथा लेखक और अभिनेता थिक्कुरिसी सुकुमारन नायर उनके पिता के दोस्त थे और उन्होंने ही उन्हें प्रियदर्शन नाम दिया था. यूं तो दुनिया प्रियदर्शन को ‘हेरा फेरी’ और ‘हंगामा’ जैसी फिल्मों के लिए जानती है. उन्होंने फिल्मी करियर की शुरुआत बतौर डायरेक्टर साल 1984 में आई पिक्चर ‘पूचक्कोरु मुक्कुथी’ से की थी, लेकिन उन्होंने कॉमेडी किंग बनने की तैयारी फिल्म इंडस्ट्री में डेब्यू करने से पहले ही शुरू कर दी थी. जब वो कॉलेज में थे उसी दौरान उन्होंने ऑल इंडिया रेडियो (AIR) के लिए शॉर्ट प्ले और व्यंग्य नाटक लिखना शुरू कर दिया था. वहीं फिर ऑल इंडिया रेडियो से होते हुए उन्होंने मलयालम सिनेमा की दुनिया में कदम रख दिया.
मोहनलाल के साथ प्रियदर्शन की फिल्म
1978 में आई फिल्म Thiranottam में उन्होंने असिस्टेंट डायरेक्टर का काम किया था. धीरे-धीरे वो सिनेमा की दुनिया में पैरा पसारते चले गए. हम सब उन्हें फिल्मकार के रूप में जानते हैं. पर 1983 में ‘हैलो मद्रास गर्ल’ के नाम से डायरेक्टर जे. विलियम्स की एक फिल्म आई थी, जिसमें मोहनलाल लीड रोल में थे. इस फिल्म में प्रियदर्शन भी बतौर एक्टर नजर आए थे. इस फिल्म के अगले साल ही उन्होंने बतौर डायरेक्टर अपनी पहली फिल्म ‘पूचक्कोरु मुक्कुथी’ बना दी थी. मोहनलाल इस फिल्म में लीड रोल में थे. और ये फिल्म सिर्फ प्रियदर्शन के करियर की शुरुआत नहीं थी बल्कि मोहनलाल और उनके बीच गहरी दोस्त का भी आगाज था. ये दोनों काफी करीबी मित्र माने जाते हैं.
मलयालम सिनेमा में कदम रखने के 7 सालों के बाद 1991 में प्रियदर्शन तेलुगु सिनेमा में एंट्री करते हैं. वो ‘निर्णयम’ नाम की फिल्म बनाते हैं और फिर 1992 में ‘मुस्कुराहट’ नाम की फिल्म के जरिए वो बॉलीवुड में एंट्री करते हैं. ये एक कॉमेडी-थ्रिलर फिल्म थी. उसके बाद वो कॉमेडी फिल्मों की लाइन लगा देते हैं. हेरा फेरी, हंगामा, हलचल, मालामाल वीकली, भागम भाग से लेकर दे दना दन और खट्टा-मीठा तक उन्होंने ऐसी-ऐसी कॉमेडी फिल्में बना दी, जो सालों बाद देखने पर भी फ्रेश लगती हैं.
साल 2016 में हो गया था तलाक
अगर उनके पर्सनल लाइफ की बात करें तो जब वो अपने करियर की दूसरी फिल्म की शूटिंग कर रहे थे तो उसी दौरान उनकी मुलाकात एक्ट्रेस लिस्सी से हुई थी. और फिर साल 1990 में दोनों ने शादी कर ली थी. हालांकि, साल 2016 में दोनों का तलाक हो गया था. दोनों दो बच्चों के माता-पिता हैं. एक बेटा है, जिनका नाम सिद्धार्थ हैं. वो VFX आर्टिस्ट के तौर पर काम करते हैं. वहीं उनकी बेटी का नाम कल्याणी है, जो बतौर एक्ट्रेस काम करती हैं. पिछले साल ‘लोका चैप्टर- 1’ के नाम से उनकी एक फिल्म आई थी, जो काफी फेमस हुई थी. यानी प्रियदर्शन और एक्स-वाइफ लिस्सी की तरह उनके दोनों बच्चे भी फिल्मों से ही जुड़े हुए हैं.
प्रियदर्शन की फिल्में न सिर्फ ऑडियंस को पसंद आती हैं बल्कि बड़े अवॉर्ड भी अपने नाम करती हैं. प्रियदर्शन की फिल्मों को दो बार नेशनल अवॉर्ड मिल चुका है. पहला नेशनल अवॉर्ड साल 2008 में Kanchivaram को मिला था. वहीं दूसरा नेशनल अवॉर्ड 2021 में में आई फिल्म ‘मरक्कर: अरब सागर का शेर’ ने अपने नाम किया था. ये दोनों ही अवॉर्ड बेस्ट फीचर फिल्म केटेगरी में मिले थे.
बेटा भी जीत चुका है नेशनल अवॉर्ड
इतना ही नहीं ‘मरक्कर: अरब सागर का शेर’ प्रियदर्शन की एक ऐसी फिल्म है, जिसे एक नहीं तीन-तीन नेशनल अवॉर्ड मिले थे. पहला अवॉर्ड तो बेस्टर फीचर फिल्म केटेगरी में प्रियदर्शन के नाम हुआ था. तो वहीं बाकी दो अवॉर्ड्स बेस्ट VFX और बेस्ट कॉस्ट्यूम डिजाइन केटेगरी में मिले थे. VFX का अवॉर्ड प्रियदर्शन के बेटे सिद्धार्थ ने अपने नाम किया था. साल 2012 में भारत सरकार ने प्रियदर्शन को सिनेमा के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए पद्म श्री से भी नवाजा था. इंडियन सिनेमा के लिए वो सिर्फ एक डायरेक्टर नहीं हैं बल्कि एक ऐसे कलाकार हैं, जो सिर्फ फिल्म नहीं बनाते बल्कि पर्दे पर किरदारों को अमर कर देते हैं.
Priyadarshan: पद्म श्री और दो नेशनल अवॉर्ड…. लाइब्रेरियन का बेटा कैसे बना कॉमेडी का बेताज बादशाह? कहानी प्रियदर्शन की
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